वित्त वर्ष 2019-20 के आयकर रिटर्न में ऊंची राशि के लेन-देन को नहीं दिखाने वाले कई करदाताओं को इनकम टैक्स विभाग की ओर से स्क्रूटनी के नोटिस पहुंचे हैं. हालांकि इससे डरने की जरूरत नहीं है.
(सांकेतिक फोटो)
आयकर विभाग की ओर से इस तरह के नोटिस आने की कई वजह हो सकती हैं. मुख्य वजह एफडी और बचत खातों पर ब्याज से होने वाली आय को आयकर रिटर्न में नहीं दिखाना या उनका बैंक की जानकारी से मेल नहीं खाना हो सकता है. लेकिन इस नोटिस का मतलब ये नहीं कि आप धोखाधड़ी करने के दोषी हैं.
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बैंकों को हर साल ‘वार्षिक सूचना रिटर्न’ (ATR) दाखिल करना होता है. इसमें ऊंची राशि के लेनदेन और फिक्स्ड डिपॉजिट इत्यादि की जानकारी होती है. आयकर विभाग करदाता के रिटर्न की जानकारी और बैंक की जानकारी का मिलान करते हैं और इसमें किसी तरह का अंतर पाए जाने पर ऐसे करदाताओं को ईमेल और मेसेज से सूचना भेजी जाती है.
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बैंक बाजार डॉट कॉम के सह-संस्थापक और सीईओ आदिल शेट्टी का कहना है कि करदाताओं को आयकर विभाग के इस तरह के नोटिस से डरने की जरूरत नहीं है. आयकर विभाग को आपको बस कारण बताना है कि आपके आईटीआर की सूचनाएं बैंक की जानकारी से मेल क्यों नहीं खाती.
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संभावना है कि आयकर विभाग ने इस नोटिस के साथ आपसे कुछ दस्तावेज मांगे हों और उसे एक निश्चित तिथि तक जमा कराने के लिए कहा हो. ऐसे में जरूरी है आप समय से विभाग के नोटिस का उत्तर दें. यदि आप कानूनी भाषा में उत्तर लिखने में सक्षम हैं तो खुद जवाब दे दें, अन्यथा किसी कर सलाहकार की मदद भी ले सकते हैं.
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अगर इनकम टैक्स विभाग ने आपको 2019-20 के लिए रिवाइज्ड आईटीआर दाखिल करने का नोटिस भेजा है तो इसके लिए आपको आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल में ‘माई एकाउंट’ या ‘कम्प्लायंस टैब’ पर क्लिक करना होगा. जहां से कम्प्लायंस पोर्टल खुलेगा और उसके बाद ई-कैंपेन टैब पर जाकर अपना रिवाइज्ड आईटीआर या नोटिस का जवाब जमा करना होगा.
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