वर्ष 2020 में जब कोरोना महामारी फैलना शुरू हुई तो सबसे पहले लोगों के आने-जाने पर पाबंदी लगी और लॉकडाउन जैसा कड़ा फैसला लिया गया. इससे सबसे ज्यादा मार हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर पड़ी. उसके बाद 2021 में कोरोना की दूसरी लहर में भी स्थानीय स्तर पर लॉकडाउन लगाए गए, जिसने इस सेक्टर को उबरने का मौका ही नहीं दिया. हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की सबसे बड़ी मार असंगठित क्षेत्र पर पड़ी. यात्रा, छोटे होटल, खान-पान और रेस्टोरेंट सेक्टर में काम करने वाले करोड़ों लोगों की आय प्रभावित हुई. इनमें से कई ने अपने काम धंधे बंद कर दिए तो कई बेहद मुश्किल से अपना काम कर रहे हैं क्योंकि लॉकडाउन में सरकारों ने अनिवार्य वस्तुओं की आपूर्ति और फूड डिलिवरी की छूट दी है.
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पर्यटन एक ऐसा सेक्टर है जो एक साथ कई लोगों को रोजगार देता है. उदाहरण के लिए ऐसे समझें कि अगर कोई व्यक्ति ताजमहल घूमने जाता है तो वह सिर्फ ताजमहल का टिकट नहीं खरीदता, बल्कि ऑटो से लोकल सफर करता है, टूरिस्ट गाइड की सेवाएं लेता है, बाजार में शॉपिंग करता है, सोवेनियर खरीदता है जो किसी लोकल आर्टिस्ट ने बनाए होते हैं, स्ट्रीट फूड, होटल, रेस्टोरेंट का उपयोग करता है. और इन सबको रोजगार मिलता है ताजमहल की यात्रा या पर्यटन से. ऐसे में पर्यटन क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर कई लोगों को रोजगार मिलता है. कोरोना की मार ने इस क्षेत्र के लोगों की आजीविका पर संकट खड़ा कर दिया है.
कोरोना ने जिस एक और सेक्टर पर बुरा असर डाला वो है एविएशन सेक्टर. लॉकडाउन के चलते फ्लाइट्स के उड़ने तक पर पाबंदी लग गई. एयरलाइंस कंपनियों को अपने कर्मचारियों को कंपलसरी छुट्टी पर भेजना पड़ा या उन्हें लीव विदाउट पे पर रखा गया. ताकि लागत कम की जा सके. उसके बाद डोमेस्टिक एयर ट्रैवल को मंजूरी दी गई लेकिन कोविड प्रोटोकॉल के चलते उनकी लागत में इजाफा हुआ और कमाई कम. अभी भी इंटरनेशनल ट्रैवल को पूरी तरह खोला नहीं गया है. वहीं डोमेस्टिक ट्रैवल भी 50% तक नीचे आया है. 2020 से पहले भारत का डोमेस्टिक एयर पैसेंजर ट्रैवल दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते एविएशन मार्केट में से एक था, और अब यह मुश्किल से खर्च निकालने की स्थिति से जूझ रहा है.
अनस्किल्ड लेबर को सबसे ज्यादा काम देने वाले रीयल एस्टेट सेक्टर की हालत भी कोरोना में खस्ता हाल है. 2020 में लॉकडाउन के चलते अधिकतर मजदूर अपने घरों को लौट गए. उसके बाद से ये सेक्टर मजदूरों की कमी से जूझ रहा है. वहीं 2021 में कोरोना की सेकेंड वेब के दौरान दिल्ली-मुंबई जैसे बड़े रीयल एस्टेट बाजारों में फिर लॉकडाउन लगने से रीयल एस्टेट डेवलपमेंट में भी बाधाएं पैदा हुई हैं. इससे इस सेक्टर पर बुरा असर पड़ा है.
एमके ग्लोबल फाइनेंशियल की रिपोर्ट के हिसाब से भारत में कार बनाने वाली कंपनियों पर कोरोना की बुरी मार पड़ी है. लॉकडाउन के चलते कार की सेल्स काफी गिरी है जिससे इन पर काफी दबाव है. इतना ही नहीं 2020 में भारतीय कंपनियों ने भारत स्टेज-6 और इलेक्ट्रिक व्हीकल पर ट्रांसफर होने के लिए काफी निवेश भी किया था जिसके वजह से वह पहले से दबाव में थी. हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड की दूसरी लहर के बाद साल की दूसरी छमाही में हालात थोड़े सुधर सकते हैं लेकिन ये पूरी तरह दूसरी लहर को थामने की कोशिशों पर ही निर्भर करेगा.
www.businesstoday.in से इनपुट पर आधारित