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यूटिलिटी

अब IRCTC में 15-20 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में सरकार

आईआरसीटीसी में हिस्सेदारी बेचेगी सरकार
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पिछले साल ही आईआरसीटीसी का आईपीओ लॉन्च हुआ था, अब मोदी सरकार आईआरसीटीसी में अपनी 15-20 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में है. मिल रही जानकारी के मुताबिक ये स्टेक ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बेचे जाएंगे. 
 

OFS के जरिये सेल
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दरअसल, पिछले महीने ही निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) ने मर्चेंट बैंकर्स से 10 सितंबर तक आईआरसीटीसी का ये स्टेक बेचने के लिए बोलियां मंगाई हैं. ऑफर ऑफ सेल्स के तहत कम से कम 25 फीसदी शेयर म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस कंपनियों जैसे इंस्टीट्यूशनल निवेशकों के लिए सुरक्षित रहते हैं.

आईआरसीटीसी का कारोबार
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दरअसल, सरकार ने निजीकरण के एजेंडे में अभी आईआरसीटीसी सबसे ऊपर है. आईआरसीटीसी कंपनी पर पूरी तरह से भारतीय रेलवे का अधिकार है, जिसके पास ट्रेनों में टूरिज्म, कैटरिंग, ऑनलाइन टिकट बुकिंग और सीलबंद बोतल पानी बेचने के एक्सक्लूसिव राइट्स हैं.

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हिस्सेदारी बेचने की वजह
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गौरतलब है कि पिछले साल IRCTC का आईपीओ आने के बाद इसमें सरकार की हिस्सेदारी 87.40 फीसदी हो गई है. भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के नियमों के मुताबिक सरकार को अनिवार्य सार्वजनिक होल्डिंग मानदंडों को पूरा करने के लिए कंपनी में अपनी हिस्सेदारी को घटाकर 75 फीसदी तक लाना है.

पिछले साल आईआरसीटीसी का आया था आईपीओ
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अक्टूबर 2019 में आईआरसीटीसी ने अपना आईपीओ लॉन्च किया था. जिसे निवेशकों का जबर्दस्त रेस्पॉन्स मिला था. आईपीओ के जरिए सरकार ने करीब 645 करोड़ रुपये जमा किए थे और 12.60 फीसदी की हिस्सेदारी बेची थी.
 

विनिवेश का लक्ष्य
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IRCTC के ऑफर फॉर सेल के जरिए सरकार को 2.10 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य की तरफ बढ़ने में मदद मिलेगी. इस लक्ष्य में से सरकार पब्लिक सेक्टर कंपनियों के विनिवेश के जरिए 1.20 लाख करोड़ रुपये जुटाएगी. वहीं, वित्तीय संस्थाओं की हिस्सेदारी की बिक्री के जरिए अन्य 90,000 करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे.

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