बीते साल लॉकडाउन के बाद से अधिकतर कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दी है. ऐसे में लोगों के बीच किराये के घर के बजाय खुद ईएमआई भरकर घर लेने का ट्रेंड देखा जा रहा है. इसमें बैंकों की ओर होम लोन की कम ब्याज दरों ने भी मदद की है. (Photos: File)
ऑनलाइन प्रॉपर्टी ब्रोकर 99acres.com की नई रिपोर्ट के मुताबिक देश में अफोर्डेबल हाउस की मांग में वृद्धि देखी जा रही है. इसकी एक बड़ी वजह 45 लाख रुपये तक के मकान पर जीएसटी को 8% से घटाकर 1% किया जाना और कोरोना के चलते राज्यों का स्टाम्प ड्यूटी पर छूट देना है.
रीयल एस्टेट एक्सपर्ट्स का कहना है कि कोरोना काल में वर्क फ्रॉम होम कल्चर की वजह लोगों के बीच अब किराये के घर में रहने का रूझान कम हो रहा है, क्योंकि अब अपने ऑफिस से थोड़ी ज्यादा देर की दूरी पर रह सकते हैं. बड़े शहरों में कई लोग या तो अपने घरों को लौट गए हैं या फिर कई लोगों के बीच ये विचार देखने को मिल रहा है कि जितने रुपये वह किराये में देंगे उतने में ईएमआई पर खुद का घर ले लेंगे. साथ ही सस्ते होम लोन से उन्हें इसमें मदद भी मिल रही है.
लोगों के खुद का घर खरीदने की एक वजह होम लोन की ब्याज दरों का सस्ता होना भी है. एक समय में 8 से 9% सालाना पर रहने वाली बैंकों की होम लोन ब्याज दरें अब 6.5% से लेकर 7% के बीच रह गई हैं. इससे बाजार में घरों की मांग बढ़ी है.
99acres.com की रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी-मार्च 2021 में दिल्ली- एनसीआर में घरों में की सेल 10% बढ़ी है. इस तिमाही में नए प्रोजेक्ट की लॉन्चिंग भी कोरोना से पहले के स्तर पर पहुंच गई है. इस दौरान 16 नए प्रोजेक्ट लॉन्च हुए और अधिकांश प्रोजेक्ट अफोर्डेबल हाउसिंग से जुड़े हैं. घरों की एवरेज कीमत में कोई बदलाव नहीं होने से भी सेल बढ़ी है.
मार्केट में अफोर्डेबल हाउस की डिमांड बढ़ रही है. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि अफोर्डेबल हाउस होते कौन से हैं. गैर-मेट्रो शहरों में 90 वर्ग मीटर और मेट्रो शहरों में 60 वर्ग मीटर तक के घर इस श्रेणी में आते हैं. वहीं जीएसटी काउंसिल ने इन मकानों पर छूट के लिए इनका सीलिंग प्राइस 40 लाख रुपये से बढ़ाकर 45 लाख रुपये तक कर दिया गया है.