कोरोना संकट और ऊपर से फिजूलखर्ची, हर किसी को परेशान कर सकता है. क्योंकि कोरोना संकट में हर आदमी की आमदनी घटी है. ऐसे में अगर आपके बच्चे खर्चीले हैं और आप लगाम नहीं लगा पा रहे हैं तो इस आइडिया को एक बार ट्राय कर सकते हैं. बच्चे उत्साह से खर्च के बदले निवेश करने लगेंगे.
वैसे 10 साल से कम उम्र के बच्चे पर बचत को लेकर दबाव नहीं डालना चाहिए. लेकिन अगर आपका बच्चा 10 से 20 साल के बीच का है तो उसे धीरे-धीरे बचत के बारे में जानकारी देकर फिजूलखर्च पर लगाम के साथ भविष्य के बारे में बता सकते हैं. (Photo: Getty Images)
आप बच्चों को सरल शब्दों में निवेश के बारे में बता सकते हैं. पॉकेटमनी के रूप में रोज मिलनी वाली रकम के बारे में बच्चे को प्यार से बताइए. फिर उन्हें उनके रोज के खर्चे को जोड़कर महीने में बताएं, ताकि उन्हें लगे कि वे महीनेभर में कितने रुपये खर्च कर रहे हैं. (Photo: Getty Images)
दूसरा रास्ता ये है कि आप महीनेभर की पॉकेटमनी अपने बच्चे को एक बार ही सौंप दें, फिर उन्हें इनमें से बचत की सलाह दें. जिससे वो हर दिन अपनी जमापूंजी में से छोटी रकम खर्च करेंगे. शायद इस कदम से निवेश के प्रति बच्चे का झुकाव बढ़ जाएगा. (Photo: Getty Images)
बच्चे को सीधे तौर ये नहीं कहना चाहिए कि तुम ये मत खरीदो, यहां घूमने मत जाओ, बाहर की चीजों को मत खाओ. ऐसे कहने से शायद वो दबाव में आ जाए और उनपर इसका बुरा असर पड़ सकता है. आजकल तमाम ऐसे वीडियो हैं, जिसमें बच्चों को खेल-खेल में बचत से जुड़ी जानकारी दी जाती है. (Photo: Getty Images)
बच्चे से पूछिए कि महीनेभर में आपने जो पैसे खर्च किए, उसमें से आप आराम से कितना बचा सकते हैं. इससे बच्चे उत्साहित हो जाएंगे और रोज की फिजूलखर्ची पर वो लगाम लगाने की कोशिश करेंगे और इससे उनका बचत के प्रति लगाव भी बढ़ेगा.
इसके अलावा एक और आसान तरीका है, जो हर माता-पिता अपने बच्चे पर आजमा सकते हैं, जब उन्हें लगे कि बच्चा फिजूलखर्च कर रहा है और वो दिनो-दिन बढ़ता जा रहा है. ऐसे में माता-पिता बच्चों से ऐसी चीज को खरीदने की बात करनी चाहिए, जिसमें बच्चों का ज्यादा लगाव रहता है.