फार्मा म्यूचुअल फंड एक तरह के सेक्टर आधारित इक्विटी म्यूचुअल फंड होते हैं. ये ठीक बैंकिंग म्यूचुअल फंड या आईटी म्यूचुअल फंड की तरह ही होते हैं. इनमें निवेश किया गया पैसा फार्मा सेक्टर की कंपनियों के शेयर में ही निवेश किया जाता है.
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कोविड-19 के दौर में फार्मा म्यूचुअल फंड ने 50% से अधिक का रिटर्न दिया. जानकारों के मुताबिक 3 अप्रैल 2021 तक निप्पॉन इंडिया फार्मा फंड ने तो 73% से अधिक का सालाना रिटर्न दिया है. इसके अलावा कई अन्य स्कीम ने भी दहाई अंक का रिटर्न दिया है. लेकिन क्या अब भी इस सेक्टर में इतना दम बचा है अगली स्लाइड में जानें...
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लैडरअप वेल्थ मैनेजमेंट के एमडी राघवेन्द्र नाथ के मुताबिक बीते साल बेशक फार्मा म्यूचुअल फंड रिटर्न देने के मामले में टॉप पर पर रहे. लेकिन किसी एक सेक्टर में निवेश करने वाले फंड आमतौर पर अधिक जोखिम वाले होते हैं क्योंकि इनमें रिटर्न का कर्व ऊपर नीचे चलता रहता है. अब एक निवेशक के तौर पर आप नहीं चाहेंगे कि आप निचले स्तर पर अपने निवेश को समाप्त करें. अब इसके क्या विकल्प हो सकते हैं जानें अगली स्लाइड में.
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अगर आप अपने जोखिम को कम करना चाहते हैं तो राघवेन्द्र नाथ के मुताबिक आप ऐसे म्यूचुअल फंड का चुनाव कर सकते हैं जो डायवर्सिफाइड हो और फार्मा सेक्टर को ज्यादा एलोकेशन देता हो. हालांकि, अगर आपको सेक्टर विशेष में निवेश करने वाले फंड के जोखिम की जानकारी है तो आप फिर किसी भी फार्मा म्यूचुअल फंड का चुनाव कर सकते हैं.
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अब सवाल है कि जब बीते साल इतना अच्छा रिटर्न रहा तो क्या फार्मा म्यूचुअल फंड में निवेश का ये सही समय है. इस बारे में राघवेन्द्र नाथ का कहना है कि निकट अवधि में इस सेक्टर की बढ़त को पहले ही हासिल किया जा चुका है. ऐसे में लंबी अवधि में इसमें निवेश करना मुफीद फैसला होगा, क्योंकि आने वाले समय में फार्मा सेक्टर की मांग अच्छी रहने वाली है और भारत दुनिया के तीन सबसे बड़े दवा बाजारों में से एक भी है. ऐसे में दवा कंपनियों का प्रॉफिट बढ़ेगा और उनमें निवेश पर रिटर्न भी.
www.businesstoday.in के इनपुट पर आधारित
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