भारतीय रिजर्व बैंक ने 17 नवंबर को दक्षिण भारत केंद्रित लक्ष्मी विलास बैंक को एक महीने के मोरेटोरियम पर डाल दिया था. आरबीआई ने बैंक को आदेश दिया था कि अगले एक महीने तक बैंक से कोई भी ग्राहक 25 हजार रुपये से ज्यादा नहीं निकाल पाएगा. RBI के इस फैसले का असर बैंक के शेयरों पर दिख रहा है.
दरअसल, संकट में फंसे लक्ष्मी विलास बैंक (LVB) पर RBI का शिकंजा कसते ही इसके शेयर में गिरावट का सिलसिला जारी है. सोमवार को लगातार 5वें कारोबारी सत्र में बैंक के शेयरों में गिरावट देखी गई. पिछले 5 दिनों से निवेशक इसके शेयरों की बिकवाली कर रहे हैं.
पांच कारोबारी सत्रों में एलवीबी के शेयर में 48.24 फीसदी की गिरावट आ चुकी है. सोमवार को बीएसई में बैंक का शेयर 10 फीसद टूटकर 8.10 रुपये पर आ गया और इसने निचले सर्किट को छू लिया. बैंक का शेयर अपने एक साल के निचले स्तर पर आ चुका है.
यही नहीं, लक्ष्मी विलास बैंक का शेयर अपनी फेस वैल्यू से भी नीचे लुढ़क गया है. इस बैंक की शेयर बाजार में फेस वैल्यू 10 रुपये है. सोमवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में भी बैंक का शेयर 10 फीसदी टूटकर 8.10 रुपये पर आ गया और लोअर सर्किट लग गया.
बता दें, पिछले मंगलवार को सरकार ने एलवीबी पर कई तरह के अंकुश लगाते हुए निकासी की सीमा तय की थी. साथ ही बैंक के बोर्ड को भी भंग कर दिया गया था. बैंक से निकासी की सीमा प्रति जमाकर्ता 25,000 रुपये तय की गई है.
आपात स्थिति में 5 लाख तक निकालने की छूट
आपात स्थिति में बैंक से 5 लाख रुपये निकाले जा सकते हैं. इलाज, शादी, शिक्षा और अन्य जरूरी कामों के लिए यह रकम निकाली जा सकती है, लेकिन इसके लिए ग्राहकों को सबूत भी देना होगा. गौरतलब है कि रिजर्व बैंक ने लक्ष्मी विलास बैंक के DBS बैंक में विलय के आदेश दिए हैं, जिसकी प्रक्रिया चल रही है.
तीन साल से हालत खराब
लक्ष्मी विलास बैंक की वित्तीय हालत पिछले तीन साल से खराब थी. जून 2020 में बैंक का पूंजी पर्याप्तता अनुपात (capital adequacy ratio) 0.17 फीसदी तक पहुंच गया था, जबकि इसे कम से कम 9 फीसदी होना चाहिए था. वित्त वर्ष 2020 तक बैंक का लोन बकाया 13,827 करोड़ रुपये और जमा 21,443 करोड़ रुपये था.