कोरोना संकट के बीच एक के बाद एक आईपीओ ओपन हो रहा है. आज तीन कंपनियों के आईपीओ ओपन होने जा रहे हैं. इनमें यूटीआई AMC, रक्षा क्षेत्र की सरकारी कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स और लिखिता इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड शामिल हैं. इन तीनों कंपनियों के आईपीओ 29 सितंबर को खुलेंगे और गुरुवार यानी 1 अक्टूबर को बंद होंगे.
दरअसल अगर आप आईपीओ में निवेश करना चाहते हैं तो इनपर दांव लगा सकते हैं. पिछले दिनों जितने भी आईपीओ आए, सभी ने शानदार रिटर्न दिया है. UTI AMC (यूटीआई एसेट मैनेजमेंट कंपनी) के आईपीओ में आप 1 अक्टूबर तक निवेश कर सकते हैं.
यूटीआई एएमसी आईपीओ के लिए प्राइस बैंड 552-554 रुपये तय किया गया है. कंपनी इस इश्यू में 3,89,87,081 शेयर ऑफर फॉर सेल के तहत पेश करने वाली है. UTI AMC ने आईपीओ से 2,160 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है. इसमें 27 शेयरों का एक लॉट होगा.
यूटीआई एएमसी देश की सबसे पुरानी म्यूचुअल फंड कंपनी है. निप्पॉन लाइफ इंडिया एसेट मैनेजमेंट और एचडीएफसी एएमसी के बाद यूटीआई एएमसी शेयर बाजारों में लिस्ट होने वाली तीसरी एएमसी होगी. हालांकि आईपीओ में निवेश से पहले किसी वित्तीय जानकार से जरूर सलाह लें.
मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स का आईपीओ
डिफेंस सेक्टर की सरकारी कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स (MAZAGAON DOCK) के आईपीओ के लिए प्राइस बैंड 135-145 प्रति शेयर तय किया है. कंपनी ने कहा कि इस आईपीओ के तहत 3,05,99,017 शेयरों की बिक्री (OFS) की जाएगी. इस आईपीओ में भी 1 अक्टूबर तक निवेश कर सकते हैं. इस IPO की लॉट साइज 103 शेयरों की है.
कंपनी ने आईपीओ के जरिये 444 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है. यस सिक्योरिटीज, एक्सिस कैपिटल, एडलवाइस फाइनेंशियल, आईडीएफसी सिक्योरिटीज और जेएम फाइनेंशियल IPO का प्रबंधन करेंगी. मझगांव डॉक सरकारी क्षेत्र की शिपयार्ड कंपनी है. ये नौ-सेना और कोस्टगार्ड के लिए जंगी जहाज और पनडुब्बी बनाने का काम करती है.
लिखिता इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड
हैदराबाद की तेल एवं गैस पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विस प्रोवाइडर कंपनी लिखिता इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड का आईपीओ भी आज से ओपन होने जा रहा है और 1 अक्टूबर को बंद होगा. कंपनी का लक्ष्य इस आईपीओ के जरिए 61.20 करोड़ रुपये जुटाना है. इस आईपीओ के लिए प्रति शेयर प्राइस बैंड 117 से 120 रुपये तय किया गया है. आईपीओ से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल कंपनी अपनी वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने में करेगी, जिससे तेल व गैस क्षेत्र की बढ़ती मांग का फायदा लिया जा सके.