प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दुर्भाग्य से आजादी के बाद हमारी जो टैक्स व्यवस्था रही, उसमें इस छवि को बदलने के लिए जो प्रयास होने चाहिए थे, वो उतने नहीं किए गए. उन्होंने पुराने समय का जिक्र करते हुए कहा कि तब टैक्स देने वाला और टैक्स कलेक्टर दोनों के रिश्तों में बहुत तानातनी थी और इसे शोषित और शोषक के तौर पर देखा गया.
पीएम मोदी ने कहा कि जब आम जन से वो टैक्स ले तो किसी को तकलीफ न हो, लेकिन जब देश का वही पैसा नागरिकों तक पहुंचे, तो लोगों को उसका इस्तेमाल अपने जीवन में महसूस होना चाहिए. उन्होंने ये बातें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बुधवार को ओडिशा के कटक में आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के कार्यालय सह आवासीय परिसर के उद्घाटन के मौके पर कहीं. इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद व ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक भी शामिल हुए.
पीएम की मानें तो आज का टैक्सपेयर पूरी टैक्स व्यवस्था में बहुत बड़े बदलाव और पारदर्शिता का साक्षी बन रहा है. जब उसे रिफंड के लिए महीनों इंतजार नहीं करना पड़ता, कुछ ही हफ्ते में उसे रिफंड मिल जाता है, तो उसे पारदर्शिता का अनुभव होता है. जब वो देखता है कि विभाग ने खुद पुराने विवाद को सुलझा दिया है, तो उसे पारदर्शिता का अनुभव होता है.
जब उसे फेसलेस अपील की सुविधा मिलती है, तब वो टैक्स ट्रांसपेरेंसी को और ज्यादा महसूस करता है. जब वो देखता है कि इनकम टैक्स कम हो रहा है, तब उसे tax transparency अनुभव होती है. पीएम मोदी ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि 'जब बादल बरसते हैं, तो उसका लाभ हम सभी को दिखाई देता है. लेकिन जब बादल बनते हैं, सूर्य पानी को सोखता है, तो उससे किसी को तकलीफ नहीं होती. इसी तरह शासन को भी होना चाहिए'.
पहले की सरकारों के समय Tax Terrorism की शिकायतें होती थीं. आज देश उसे पीछे छोड़कर टैक्स ट्रांसपैरेंसी की तरफ बढ़ रहा है. टैक्स टेरेरिज्म से Tax transparency का ये बदलाव इसलिए आया है, क्योंकि हम रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफोर्म की अप्रोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं.
पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार नियम में रिफॉर्म कर रही है. जिसमें टेक्नोलॉजी की मदद ली जा रही है. साथ ही साथ हम Tax Administration के माइंडसेट को भी ट्रांसफोर्म कर रहे हैं. आज भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में है जहां टैक्सपेयर के अधिकारों और कर्तव्यों दोनों को codify किया गया है, उनको कानूनी मान्यता दी गई है. टैक्सपेयर और टैक्स कलेक्ट करने वाले के बीच विश्वास बहाली के लिए, पारदर्शिता के लिए, ये बहुत बड़ा कदम रहा है.
देश के Wealth क्रिएटर की जब मुश्किलें कम होती हैं, उसे सुरक्षा मिलती है, तो उसका विश्वास देश की व्यवस्थाओं पर और ज्यादा बढ़ता है. इसी बढ़ते विश्वास का परिणाम है कि अब ज्यादा से ज्यादा साथी देश के विकास के लिए टैक्स व्यवस्था से जुड़ने के लिए आगे आ रहे हैं.