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यूटिलिटी

कई स्टॉक की पोजिशन बदली, ऐसे मिड कैप से लार्ज कैप में शामिल होते हैं शेयर

शेयरों का री-क्लासिफिकेशन
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शेयर बाजार में तेजी के बीच 7 मिडकैप शेयर अब लॉर्ज कैप की लिस्ट में शामिल हो गए हैं. इसमें अडानी टोटल गैस भी है, जो लार्ज कैप कैटेगरी में एंट्री मारी है. इसके अलावा लॉर्ज कैप में शामिल होने वाले शेयरों में सरकारी कंपनी NMDC, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAIL), बैंक ऑफ बड़ौदा, अपोलो अस्पताल, हनीवेल ऑटोमेशन और चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट शामिल हैं.

ये कंपनियां लार्ज कैप से बाहर
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मिड कैप से लार्ज कैप में शामिल होने वाली कंपनियों ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, पीआई इंडस्ट्रीज, इंद्रप्रस्थ गैस, पेट्रोनेट एलएनजी, हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स और एबॉट इंडिया की जगह ली है. एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड इन इंडिया (एंफी) ने हाल में लिस्टेड कंपनियों के शेयरों का री-क्लासिफिकेशन किया है. 

लार्ज कैप की परिभाषा
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दरअसल, जिन मिड कैप कंपनियों का मार्केट कैप 37,746 करोड़ रुपये से ज्यादा है, उसे लार्ज कैप कैटेगरी में एंट्री मिली है. यानी जो 7 मिड कैप शेयर से लार्ज कैप में शामिल हुए हैं, उन सभी का मार्केट कैप 37,746 करोड़ रुपये से ज्यादा है. इस साल जनवरी में यह कट ऑफ 28,900 करोड़ रुपये था.

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11 शेयर स्मॉल कैप से मिड कैप में शामिल
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वहीं कुल 11 शेयर स्मॉल कैप से मिड कैप की कैटेगरी में शामिल हुए हैं. मिड कैप कंपनियों का मार्केट कैप कट ऑफ 11,820 करोड़ रुपये है, जबकि पहले यह 8,389 करोड़ रुपये था. स्मॉल कैप से मिड कैप में शामिल होने वाले शेयरों में टाटा एलेक्सी, एपीएल अपोलो, कजारिया सेरामिक्स, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, अपोलो टायर्स, इंडियन बैंक, अलकाइल अमाइंस, लिंडे इंडिया, एफल इंडिया, ब्लू डार्ट और वैभव ग्लोबल हैं. 

मिड कैप की परिभाषा
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लार्ज कैप -  37,746 करोड़ रुपये
मिड कैप- 11,820 करोड़ रुपये 
इससे कम मार्केट कैप वाली कंपनियां स्मॉल कैप कैटेगरी में होती है.

इन कंपनियों को झटका
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जबकि कुछ शेयर के मार्केट कैप घटने से मिड कैप से वे स्मॉल कैप में कैटेगरी में शामिल हो गए हैं. मिड कैप से स्मॉल कैप में जाने वाले शेयर  मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर, आईटीआई, प्रेस्टिज इस्टेट, महानगर गैस, पीएंडजी हेल्थ, क्रेडिट एक्सेस, मोतीलाल ओसवाल, बांबे बुमराह, अस्ट्राजेनेका, गोदरेज एग्रोवेट, आईआईएफएल वेल्थ, एसजेवीएन और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया हैं. 

साल में दो बार बदलाव
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साल में दो बार बदलाव

गौरतलब है कि साल में दो बार एंफी की ओर से शेयरों की री-क्लासिफेकशन की जाती है. अब अगला री-क्लासिफिकेशन जनवरी-2022 में होगा. म्यूचुअल फंड के फंड मैनेजर्स को एंफी के इसी क्लासिफिकेशन के आधार पर पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करना होता है. इस नए बदलाव के लिए फंड मैनेजर्स के पास एक महीने का समय होता है. 

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