भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने स्टॉक एक्सचेंज को इस बात की इजाजत दे दी है कि वे कम अवधि में निपटान वाले T+1 settlement चक्र को अपनाएं. यह व्यवस्था 1 जनवरी, 2022 से लागू होगी. आइए जानते हैं कि क्या है यह सिस्टम और इससे शेयर कारोबारियों, निवेशकों को क्या फायदे होंगे? (फाइल फोटो)
क्या होता है सेटलमेंट चक्र: शेयर बाजार में लेनदेन की व्यवस्था बैंक या अन्य जगहों से अलग होती है. बैंक या अन्य पेमेंट सिस्टम से पैसा ट्रांसफर या लेनेदेन होते ही आपके खाते में पहुंच जाता है. लेकिन शेयर बाजार में ऐसा नहीं होता. फिलहाल शेयर बाजार T+2 निपटान चक्र (settlement cycle) पर काम करता है. (फाइल फोटो)
इसका मतलब यह है कि अगर आपने आज कोई शेयर खरीदा तो शेयर वास्तव में आपके डीमैट अकाउंट में ट्रेड डे ‘T’ day के तीसरे दिन यानी आज के दो दिन बाद T+2 में पहुंचता है. इसी तरह आपने कोई शेयर बेचा तो उसका पैसा खाते में तीसरे दिन पहुंचता है. इससे सेटलमेंट या निपटान चक्र कहते हैं. (फाइल फोटो: Getty Images)
क्या होगा T+1 सेटलमेंट से: T+1 सेटलमेंट सिस्टम लागू होने से निवेशकों, ट्रेडर्स को काफी राहत मिलेगी. इसकी वजह यह है कि आज अगर किसी ने शेयरों की खरीद की तो इसके दूसरे दिन यानी एक दिन बाद ही उसके डीमैट खाते में शेयर पहुंच जाएंगे. इसी तरह अगर आज कोई शेयर बेचता है तो कल तक उसके खाते में पैसे पहुंच जाएंगे. (फाइल फोटो)
और क्या होंगे फायदे: इस तरह के तेज निपटान चक्र से शेयर कारोबार की मात्रा बढ़ेगी, क्योंकि लोगों को जल्दी पैसा मिलेगा जिससे वे नए शेयरों में निवेश कर पाएंगे. इससे तेज निपटान होगा और एक्सचेंजोंं की कार्यक्षमता बढ़ेगी. (फाइल फोटो)
हालांकि, सेबी ने इसे अनिवार्य नहीं किया है. यानी यह एक्सचेंज पर निर्भर है कि वे T+2 सिस्टम अपनाते हैं या T+1 सिस्टम. लेकिन कोई भी नई व्यवस्था अपनाने से पहले एक्सचेंज को एक महीने पूर्व निवेशकों को जानकारी देनी होगी. इसी तरह एक बार कोई निपटान व्यवस्था शुरू करने के बाद उसे कम से कम अगले छह माह तक जारी रखना होगा. (फाइल फोटो: Getty Images)