अलग-अलग लोगों के निवेश और बचत के लक्ष्य अलग होते हैं. इस कारण इन्वेस्टमेंट करने और सेविंग्स के तरीके भी बदल जाते हैं. कई लोगों को ज्यादा से ज्यादा रिटर्न की चाह होती है और वे रिस्क की परवाह नहीं करते हैं. वहीं कुछ ऐसे भी लोग होते हैं, जिनके लिए रिस्क बड़ा फैक्टर है और इस तरह के लोग कम रिटर्न के बाद भी सुरक्षित माध्यमों को तरजीह देते हैं. दोनों तरीकों के एक-एक उदाहरण की बात करें तो अधिक रिटर्न देने के मामले में म्यूचुअल फंड लोगों के लिए पसंदीदा है, तो सुरक्षित माध्यमों में पीपीएफ सबसे बेहतर विकल्पों में से एक है. आइए जानते हैं कि इन दोनों में क्या फर्क है, दोनों में कौन ज्यादा फायदेमंद हैं और किस स्कीम से आप जल्दी करोड़पति बन सकते हैं...
पब्लिक प्रोविडेंट फंड: यह एक ऐसा स्कीम है जो फ्यूचर के लिए सेविंग करने में तो मदद करता ही है, साथ ही टैक्स की भी बचत कराता है. पीपीएफ के इन्वेस्टर्स को डिपॉजिट पर ब्याज मिलता है और ब्याज से होने वाली इस इनकम पर कोई टैक्स नहीं लगता है. पीपीएफ स्कीम के कुछ फायदे इस प्रकार हैं:
म्यूचुअल फंड: इसमें इन्वेस्टर अपना पैसा डालता है, जिसे प्रोफेशनल लोग मैनेज करते हैं. स्कीम के सभी इन्वेस्टर्स के पैसे को प्रोफेशनल लोग अपने हिसाब से कई जगहों पर लगाते हैं. म्यूचुअल फंड में पैसे लगाने के ये फायदे हैं:
अब एक बात मान लीजिए कि आप हर महीने 10,000 रुपये इन्वेस्ट कर करोड़पति बनना चाहते हैं. पहले पीपीएफ के मामले में इसे समझ लेते हैं. पीपीएफ पर अभी 7.1 फीसदी की दर से ब्याज मिल रहा है. पीपीएफ पर रिटर्न घटता-बढ़ता रहता है. फिर भी मान लेते हैं कि औसत ब्याज 7.5 फीसदी रहता है. इस स्थिति में आपको करेाड़पति बनने में 27 साल लग जाएंगे.
म्यूचुअल फंड के मामले में बड़े आराम से 10-12 फीसदी का रिटर्न मिल जाता है. यह कम्पाउंडिंग का भी फायदा देता है. इस साधन में अगर आप हर महीने 10,000 रुपये लगाते हैं और रिटर्न 12 फीसदी मान लेते हैं तो आप 20-21 साल में करोड़पति बन जाएंगे. ध्यान देने वाली बात है कि यह न सिर्फ पीपीएफ से पहले करोड़पति बना सकता है, बल्कि इसमें इन्वेस्टमेंट की मूल राशि भी कम रहती है.