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अमित शाह बोले- इकोनॉमी में V- शेप रिकवरी, जानें- K,L,U,W आकार के बारे में भी

भारतीय अर्थव्यवस्था और Recession को लेकर बातचीत करने के साथ ही केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah ने गुजरात में होने वाले चुनावों (Gujarat Election) में शानदार जीत का भरोसा भी जताया. उन्होंने कहा कि इस बार बीजेपी सबसे ज्यादा सीट प्राप्त करने का रिकॉर्ड बनाएगी.

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भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर बोले गृहमंत्री अमित शाह
भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर बोले गृहमंत्री अमित शाह

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने गुजरात के अहमदाबाद में आजतक के मंच पर भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) को लेकर बात की. उन्होंने कहा, 'चश्मा बदलने की जरूरत है, ये V शेप ग्रोथ है.' इस दौरान उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार के 8 सालों का जिक्र करते हुए कहा कि हमने देश की इकोनॉमी को 11वें नंबर से 5 नंबर पर लाने का काम किया है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि आखिर ये वी-शेप रिकवरी होती क्या है? आइए बताते हैं V के साथ ही  K,L,U,W ग्रोथ के बारे में सब कुछ.

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मंदी को लेकर किया ये दावा
आर्थिक सुधार कई रूप ले सकता है, जिसे अल्फाबेटिक नोटेशन का उपयोग करके दर्शाया जाता है. जैसे V- शेप्ड  रिकवरी, U- शेप्ड  रिकवरी,  W- शेप्ड  रिकवरी, L- शेप्ड  रिकवरी और K- शेप्ड  रिकवरी. पंचायत आजतक के मंच पर बात करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि कोरोना महामारी के संकट काल में दुनियाभर में मंदी का असर देखा गया, लेकिन इस दौरान सबसे कम असर भारत में देखने को मिला है. उन्होंने कहा कि हम भारतीय अर्थतंत्र को कम से कम मंदी के साथ मैनेज करेंगे. इसके साथ ही गरीबी रेखा के मामले में अमित शाह ने कहा कि हम तेजी से इससे उबर रहे हैं और भारत का अर्थतंत्र तेजी से आगे की ओर बढ़ता जा रहा है. 

V शेप रिकवरी क्या है?
अर्थव्यवस्था में V शेप में रिकवरी उसे कहते हैं, जिसमें इकोनॉमी तेजी से गिरने के बाद उतनी ही तेज रफ्तार से ऊपर भी उठती है. यानी अर्थव्यवस्था एकदम से किसी आपदा या घटनाक्रम के कारण नीचे आने के बाद तेजी से वापसी करे. इसके अलावा V शेप को विक्ट्री साइन के तौर पर भी देखा जाता है. इकोनॉमिस्ट्स की मानें तो वी-शेप की रिकवरी के लिए कई चीजों का अनुकूल होना जरूरी होता है. खासकर तब जब वैश्विक मंदी समेत अन्य वित्तीय संकट सामने हों. 

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क्या होती है W आकार ग्रोथ?
इकोनॉमी में रिकवरी के लिए V के अलावा W शेप ग्रोथ शब्द का भी इस्तेमाल किया जाता है. जब इकोनॉमी में तेज गिरावट के बाद तेज रिकवरी होती है और अचानक से फिर दोबारा से तेज गिरावट के बाद फिर तेजी से सुधार देखने को मिलता है, तो इस तरह कि ग्रोथ को W-शेप रिकवरी कहा जाता है. मतलब, इकोनॉमी को लगातार दो बार गिरावट का सामना करना पड़े और दोहरे झटके से अर्थव्यवस्था तेजी से उबरे. 

K शेप्ड रिकवरी को ऐसे समझें
अब बात करते हैं K शेप रिकवरी की, तो बता दें ये तब होती है, जब मंदी के बाद अर्थव्यवस्था के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग दर, समय या परिमाण में रिकवरी देखने को मिलती है. यह विभिन्न क्षेत्रों, उद्योगों या लोगों के समूहों में समान ग्रोथ के सिद्धांत से अलग है. K शेप्ड रिकवरी से इकोनॉमी की शेप में बड़ा परिवर्तन देखने को मिलता है और वित्तीय परिणाम मंदी के पहले और बाद में मौलिक रूप से बदल जाते हैं.

इकोनॉमी में L और U शेप
यू-शेप की रिकवरी में इकोनॉमी में वापस तेजी तो आती है, जिसमें सरकारों और केंद्रीय बैंकों के राहत पैकेज के कारण मांग में तेजी का असर दिखता है. लेकिन, ग्रोथ की रफ्तार बेहद धीमी रहती है. इसके अलावा कभी-कभी मंदी L-आकार की होती है, जहां अर्थव्यवस्था नीचे जाती है और फिर वहीं ठहर सी जाती है. जब मंदी गंभीर और लंबी अवधि तक चलती है, तो यह एक प्रकार से डिप्रेशन में तब्दील हो जाती है. एल शेप ग्रोथ में लोग सेवा गितिविधियों पर खर्च करने से बचते हैं, संकट काल में लिए गए कर्ज का भुगतान करने में लोगों को कठिनाई होती है. कई कंपनियां दिवालिया होने लगती हैं और शेयर बाजार भी स्थिर हो जाता है. 

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