घरेलू शेयर मार्केट (Share Market) के डेढ़ साल के बुल रन (Bull Run) पर लगाम लग चुकी है. पिछले दो महीने से बाजार पर बीयरिश ट्रेंड (Bearish Trend) हावी है. इस दौरान स्टॉक मार्केट (Stock Market) ने लगातार झटका दिया है और करीब आठ फीसदी करेक्शन (Correction) कर चुका है. इस दौरान सबसे ज्यादा निराशा रिटेल इन्वेस्टर्स (Retail Investors) के हाथ लगी है, जो कोरोना (Corona) के बाद तेजी से शेयर बाजार की ओर भाग रहे थे.
अब नुकसान उठा रहे रिटेल इन्वेस्टर
घरेलू स्टॉक मार्केट का यह बुल रन पिछले साल अप्रैल से शुरू हुआ. जब इकोनॉमी महामारी के प्रेशर में गिर रही थी, शेयर बाजार एक दम उलट ट्रेंड पर दौड़ रहा था. शेयर बाजार की यह दौड़ इस साल अक्टूबर तक जारी रही, जब बाजार ने अपना ऑल टाइम हाई (All Time High) अचीव किया था. उसके बाद से बाजार लगभग हर सप्ताह गिरकर बंद हुआ है. इसके चलते बुल रन के दौर में हर महीने पैसे बना रहे रिटेल इन्वेस्टर्स घाटे में जाने लगे हैं.
डेढ़ साल के बुल रन में बाजार ने दिया इतना रिटर्न
बाजार को देखें तो तीन अप्रैल 2020 को निफ्टी (Nifty) 8083.80 अंक के स्तर पर था. इस साल 18 अक्टूबर को यह 18477.05 अंक पर बंद हुआ. इस दौरान निफ्टी ने 18604.45 अंक के ऑल टाइम हाई को भी छुआ. इस तरह करीब डेढ़ साल के बुल रन में मार्केट ने इन्वेस्टर्स (Investors) को 130 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिया. मार्केट के इसी शानदार रिटर्न के चलते रिटेल इन्वेस्टर्स (Retail Investors) तेजी से बढ़ने लगे.
हर महीने खुल रहे 27 लाख डीमैट अकाउंट
चालू वित्त वर्ष (FY22) में अक्टूबर महीने के अंत तक डीमैट अकाउंट (Demat Account) होल्डर्स की संख्या बढ़कर 7.38 करोड़ पर पहुंच गई. पिछले वित्त वर्ष (FY21) के अंत में कुल डीमैट अकाउंट की संख्या 5.51 करोड़ थी. इस तरह चालू वित्त वर्ष के पहले सात महीने के दौरान रिकॉर्ड 1.87 करोड़ डीमैट अकाउंट खोले गए. यह हर महीने 26.71 लाख नए अकाउंट खोले जाने का औसत है.
इन कारणों से गिर रहा है बाजार
अब अक्टूबर के बाद शुरू गिरावट के दौर को देखें तो बाजार करीब आठ फीसदी गिर चुका है. ओमिक्रॉन के रिस्क, ब्याज दर बढ़ाने की राह पर लौटते सेंट्रल बैंक, एफपीआई की लगातार बिकवाली, बड़े इन्वेस्टर्स की मुनाफावसूली जैसे फैक्टर बाजार की इस गिरावट के कारण बने हैं. हाल-फिलहाल बाजार में यही ट्रेंड बने रहने के अनुमान हैं. इसमें सबसे अधिक नुकसान रिटेल इन्वेस्टर्स उठा रहे हैं, जो बिना प्रॉपर स्टडी या रिसर्च के बाजार में उतर रहे हैं.