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बिसलेरी, किनले, एक्वाफिना और रेल नीर...भारत में बोतलबंद पानी का बड़ा मार्केट है. देश में मिनिरल वाटर सबसे अधिक बिकने वाला पानी है. इसमें बड़ी मात्रा में मिनिरल गैसें घुली होती हैं. ये रेगुलर पानी से अलग होता है, क्योंकि इसमें कैल्शियम कार्बोनेट, मैग्नीशियम सल्फेट, पोटेशियम और सोडियम सल्फेट अधिक होते हैं. भारत में बोतलबंद पानी के बिजनेस में सबसे बड़ी कंपनी बिसलेरी है, जिसके वॉटर बॉटल एयरपोर्ट से लेकर कस्बों के जनरल स्टोर पर तक बिकते हुए नजर आते हैं. देश में बोतलबंद पानी के मार्केट में और भी कई कंपनियां हैं.
भारत में बोतलबंद पानी का बाजार
भारत में बोतलबंद पानी का मार्केट साल 2021 में करीब 20 हजार करोड़ रुपये का था. इसमें बिसलेरी की हिस्सेदारी करीब चार से पांच हजार करोड़ रुपये के आसपास है. बिसलेरी के पास संगठित बाजार का 32 फीसदी हिस्सेदारी है. किनले और एक्वाफिना जैसे ब्रॉन्ड इससे पीछे हैं. जल प्रदूषण और इसे बढ़ती स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं ने भारत में मिनिरल वॉटर के कारोबार के साइज को बड़ा किया है. इसकी वजह से बोतलबंद पानी की खपत बढ़ी है. भारत में मिनिरल वाटर चार अलग-अलग साइज में उपलब्ध है. एक लीटर की बोतल, दो लीटर की बोतल, 500 मिलीलीटर की बोतल और 250 मिलीलीटर की बोतल.
पानी कंपनी नहीं थी बिसलेरी
अब अगर देश के सबसे बड़े पैकेज्ड वाटर बोतल कंपनी बिसलेरी की बात करें, तो इसके पास 122 ऑपरेशनल प्लांट हैं. इसके अलावा कंपनी के पास 4500 डिस्ट्रीब्यूटर और 5000 डिस्ट्रीब्यूशन ट्रक हैं. अगर बिसलेरी के इतिहास पर नजर डालें, तो ये मूल रूप से इटली कंपनी थी और इसका कारोबार पानी बेचने का नहीं बल्कि दवाइयां बेचने का था. ये एक फॉर्मास्युटिकल कंपनी थी, जो मुख्य रूप से मलेरिया की दवा बेचती थी. कंपनी की स्थापना इटली के बिजनेसमैन फेलिस बिसलेरी ने की थी. उनकी मौत के बाद उनके फैमिली डॉक्टर रॉसी ने बिसलेरी के कारोबार को संभाला और भारत में इस कंपनी को लाने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है.
ठाणे में लगा था पहला प्लांट
60 के दशक में जब इसकी भारत में एंट्री हुई थी, उस वक्त पैकेज्ड वाटर बेचने के बारे में सोचना भी पागलपन जैसा ही था. क्योंकि लोगों को उस समय लगता होगा कि आखिर कौन बोतल बंद पानी खरीद कर पीएगा? लेकिन रॉसी अपने प्लान पर कायम रहे और अपना काम जारी रखा. साल 1965 में उन्होंने Mumbai के ठाणे में पहला 'बिसलेरी वॉटर प्लांट' स्थापित किया था. उस समय मुंबई में कांच की बोतलों में पानी बेचना शुरू किया गया था. इन्हें बिसलेरी बब्ली और बिसलेरी स्टिल के तौर पर बाजार में उतारा गया.
रमेश चौहान ने बना दिया सबसे बड़ा ब्रांड
1969 में पारले (Parle) ने बिसलेरी (इंडिया) लिमिटेड को खरीद लिया और 'Bisleri' ब्रांड नाम के अंतर्गत कांच की बोतलों में ही पानी बेचना जारी रखा. कारोबार में बढ़ोतरी के साथ पार्ले ने PVC नॉन-रिटर्न बोतलों की तरफ अपना रुख किया और PET Conteners इस्तेमाल किए. 1995 में रमेश जे चौहान ने बिसलेरी को इस मकसद से खरीद लिया कि इस ब्रांड को वे सोडा ब्रांड में तब्दील करेंगे और उन्होंने ये किया भी, लेकिन बोतलबंद पानी वाले दोनों ब्रांड्स 'बब्ली' और 'स्टिल' को बंद नहीं किया. फिर धीरे-धीरे बिसलेरी भारतीय मार्केट में अपने पैर जमाने शुरू कर दिए और आज वो देश की सबसे बड़ी बोतलबंद पानी की कंपनी है.
सबसे महंगा बोतलबंद पानी ब्रांड
दुनिया का सबसे महंगा बोतलबंद पानी का ब्रांड जापान का फिलिको ज्वेलरी वाटर है. इसके एक लीटर पानी की कीमत 1.10 लाख रुपये है. इसके बाद जर्मनी की कंपनी नेवास (Nevas) है. नेवास के एक लीटर पानी को खरीदने के लिए 93.89 हजार रुपये खर्च करने होंगे. ब्लिंग H20 अमेरिका का ब्रांड है, जिसका एक लीटर पानी 17.72 हजार रुपये में बिकता है. नॉर्वे के बोतलबंद वाटर ब्रांड स्वालबार्डी के एक लीटर पानी की कीमत 14.72 हजार रुपये है. अमेजन, ब्राजील की बोतलबंद पानी ब्रांड है, जिसके एक लीटर पानी को खरीदने के लिए आपको 8.75 हजार रुपये खर्च करने होंगे.
भारत में मिनिरल वाटर ब्रांड