कोरोना टाइम में सरकार ने पिछले हफ्ते लोगों को कोविड के इलाज के लिए 2 लाख रुपये से अधिक का भी कैश पेमेंट करने की छूट दी थी. इसके लिए उसने अस्पतालों और अन्य मेडिकल सेंटरों को आयकर कानून की धारा-269ST से राहत प्रदान कर दी थी. लेकिन अब आयकर कानून की ही एक और धारा लोगों के लिए परेशानी का सबब बन रही है जो उन्हें कानूनी पचड़े में उलझा सकती है.
धारा-269ST से छूट कइयों के लिए राहत
सरकार ने अस्पतालों को जब 2 लाख से अधिक का कैश पेमेंट लेने की छूट दी तो ये कई लोगों के लिए राहतभरा फैसला रहा, क्योंकि इससे उन लोगों को सहूलियत मिली जिनके पास अस्पताल को देने के लिए नकद पैसे ही थे. इनमें से कई ने ये पैसे अपनी जमा पूंजी बेचकर जुटाए या कोरोना के इलाज के लिए दोस्तों और रिश्तेदारों से उधार लिया.
हालांकि अब कोविड प्रभावित परिवारों द्वारा जुटाई गई ये नकद मदद या उधार ही आयकर कानून की धारा-269SS के चलते उन्हें कानूनी उलझन में डाल सकता है.
क्या कहती है धारा-269SS
आयकर कानून-1961 की धारा-269SS किसी भी व्यक्ति को अपने खाते में अन्य व्यक्ति से कुल 20,000 रुपये से अधिक की नकद जमा या लोन के तौर पर लेने से रोकती है. इसके लिए या तो चेक से इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर ही किया जा सकता है. वहीं कानून की धारा-271D कहती है कि धारा-269SS का उल्लंघन करना दंडनीय अपराध है. यदि किसी व्यक्ति को इस धारा के उल्लंघन का दोषी पाया जाता है तो उसे जुर्माने में उतनी ही रकम देनी होगी जितनी उसने नकद लोन के तौर पर ली है.
इसे अब एक उदाहरण से समझें तो मुंबई के विशाल गुप्ता (बदला हुआ नाम) के पिता की पिछले साल मई में कोरोना से मौत हो गई. उनके परिवार ने पिता के इलाज के लिए 9 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया. इसमें एक बड़ी राशि उन्हें दोस्तों और रिश्तेदारों से नकद मदद या उधार के रूप में मिली.
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अब आयकर कानून के तहत जब वह अपना रिटर्न फाइल करेंगे तो उन्हें इस 9 लाख रुपये की राशि का हिसाब-किताब दिखाना होगा. उनके पिता को अस्पताल में भर्ती कराने में मदद करने वाले एक एनजीओ ने अब उन्हें बताया कि आयकर कानून की धारा-269SS एक निश्चित सीमा के बाद आपस में नकद लेन-देन या लोन लेने से रोकती है. अब विशाल गुप्ता को कर अधिकारियों द्वारा परेशान किए जाने का डर है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
बिजनेस टुडे से बातचीत में चार्टर्ड एकाउंटेंट की संस्था ICAI के पूर्व अध्यक्ष वेद जैन ने कहा कि सरकार अस्पतालों में 2 लाख से अधिक का नकद पेमेंट करने की छूट पहले ही दे चुकी है. अब सरकार को कोविड के इलाज के मकसद से जुटाए गए नकद लोन या पैसों को भी धारा-269SS और 271D से छूट देनी चाहिए. आयकर कानून की धारा-269ST और 269SS दोनों एक साथ काम करती हैं. अन्यथा इससे पहले से अपनों के जाने गम या कोरोना की परेशानियां झेल रहे परिवारों को कानूनी उलझन का सामना और करना होगा.
हालांकि आयकर विभाग से जुड़े सूत्रों ने जानकारी दी कि कानून की इस धारा के तहत ना तो कोई डिमांड जेनरेट की गई है और ना ही किसी को कोई नोटिस भेजा गया गया है.
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