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नहीं बिक पाई ये सरकारी कंपनी, डील रद्द... सरकार ने कहा- अब बेचने का भी प्लान कैंसिल

सरकार ने पवन हंस को खरीदने के लिए सबसे बड़ी बोली स्टार9 मोबिलिटी ने लगाई थी. लेकिन, हाल ही में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की कोलकाता पीठ ने अल्मास ग्लोबल के खिलाफ पावर कंपनी ईएमसी लिमिटेड के अधिग्रहण पर एक आदेश दिया.

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पवन हंस कंपनी का विनिवेश रद्द
पवन हंस कंपनी का विनिवेश रद्द

कर्ज में डूबी सरकारी कंपनी पवन हंस (Pawan Hans) चौथी कोशिश में भी नहीं बिक पाई, जिसके बाद अब सरकार ने पवन हंस के विनिवेश के फैसले को ही रद्द कर दिया है. यानी अब आने वाले दिनों से इस कंपनी में ताला लटक जाएगा. 

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दरअसल, सरकार ने पवन हंस को खरीदने के लिए सबसे बड़ी बोली स्टार9 मोबिलिटी ने लगाई थी. लेकिन, हाल ही में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की कोलकाता पीठ ने अल्मास ग्लोबल के खिलाफ पावर कंपनी ईएमसी लिमिटेड के अधिग्रहण पर एक आदेश दिया. जिससे बिक्री प्रक्रिया की पारदर्शिता पर असर पड़ा और सरकार को बिक्री प्रक्रिया को रद्द करना पड़ा और स्टार9 मोबिलिटी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है. 

खरीदार पर गंभीर आरोप 

बता दें, अल्मास ग्लोबल ऑपर्च्युनिटी फंड के नेतृत्व वाली Star-9 Mobility ने घाटे में चल रही हेलीकॉप्टर फर्म में सरकार की 51 फीसदी हिस्सेदारी के लिए 211 करोड़ रुपये से ज्यादा की बोली लगाई थी. लेकिन अब सरकार ने पवन हंस के रणनीतिक विनिवेश में मौजूदा ईओआई प्रक्रिया को रद्द करने की भी घोषणा की है. 

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सरकार ने 29 अप्रैल, 2022 को पवन हंस में सरकार की 100 फीसदी इक्विटी शेयरधारिता की बिक्री के लिए सफल बोलीदाता के रूप में महाराजा एविएशन, बिग चार्टर और अल्मास ग्लोबल अपॉर्चुनिटी फंड के स्टार9 मोबिलिटी को मंजूरी दे दी थी. 

सरकार की 51 फीसदी हिस्सेदारी
पवनहंस (Pawan Hans) में केंद्र सरकार की 51 फीसदी हिस्सेदारी है, वहीं ONGC का 49 फीसदी हिस्सा है. लंबे समय से घाटे में चल रही इस कंपनी को बेचने के फैसले के बाद साल 2016 से अब तक इसकी बिक्री की चार कोशिशें की जा चुकी हैं. लेकिन हर बार कोई न कोई पेच अटक जा रहा है. गौरतलब है कि आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने अक्टूबर 2016 में पवन हंस के रणनीतिक विनिवेश (Pawan Hans Divestment) को मंजूरी दी थी. 

सरकार को मिली थीं तीन बोलियां
सरकार ने पवन हंस में अपनी 51 फीसदी की हिस्सेदारी बेचने के लिए 199.92 करोड़ रुपये का बेस प्राइस तय किया था. इसके लिए तीन कंपनियों ने बोली लगाई थी और स्टार 9 मोबिलिटी ग्रुप ने 211.14 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी. बाकी दो बोलियां 181.05 करोड़ रुपये और 153.15 करोड़ रुपये की मिली थी. ऐसे में सबसे ज्यादा बोली लगाकर इस बोली प्रक्रिया को स्टार-9 ने जीता था, लेकिन चौथी बार भी ये बिक्री पूरी नहीं हो सकी. 

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