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चंदा कोचर की गिरफ्तारी के वक्त क्यों नहीं कोई महिला पुलिसकर्मी? CBI ने कहा- अभियुक्त को छूते नहीं हम!

वीडियोकॉन (Videocon) को लोन मामले में सीबीआई ने दिसंबर 2022 में ICICI बैंक की पूर्व CEO चंदा कोचर को गिरफ्तार किया था. मामले की सुनवाई बॉम्बे हाई कोर्ट में चल रही है. सुनवाई के दौरान चंदा कोचर के वकील ने बड़ा दावा किया है.

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बॉम्बे हाई कोर्ट में चल रही है चंदा कोचर के मामले की सुनवाई.
बॉम्बे हाई कोर्ट में चल रही है चंदा कोचर के मामले की सुनवाई.

वीडियोकॉन (Videocon) लोन मामले में सीबीआई ने दिसंबर 2022 में ICICI बैंक की पूर्व MD और CEO चंदा कोचर (Chanda Kochhar) और उनके पति दीपक कोचर को गिरफ्तार किया था. आरोप है कि जब चंदा कोचर ICICI बैंक की कमान संभाल रही थीं, तब उन्होंने वीडियोकॉन ग्रुप को लोन दिया था. बदले में चंदा के पति दीपक कोचर की कंपनी नू रिन्यूएबल को वीडियोकॉन से निवेश मिला था. बॉम्बे हाई कोर्ट में चंदा कोचर और दीपक कोचर की याचिका पर सुनवाई चल रही है. सुनवाई के दौरान चंदा कोचर के वकील अमित देसाई ने अदालत में बड़ा दावा किया है.

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गिरफ्तारी के दौरान महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं

अमित देसाई ने अदालत में कहा कि अरेस्ट मेमो से पता चलता है कि जब सीबीआई ने चंदा कोचर को गिरफ्तार किया तो कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थीं. इसपर सीबीआई के वकील ने कहा कि व्हाइट कॉलर क्राइम में जिसकी जांच सीबीआई करती है, उसके अभियुक्तों को कोई भी छूता नहीं है. कोई हथकड़ी भी नहीं लगाई जाती है. 

सीबीआई वकील की दलील पर अमित देसाई ने कहा कि गिरफ्तारी छूकर ही होती है और जब महिला को गिरफ्तार किया गया तो उचित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया. गिरफ्तारी मेमो में ये बात सामने नजर आ रही है.

क्या है मामला?

साल 2012 में वीडियोकॉन ग्रुप को ICICI बैंक द्वारा लोन दिया गया था. जो बाद में एनपीए हो गया और बाद में इसे "बैंक फ्रॉड" कहा गया. सितंबर 2020 में प्रवर्तन निदेशालय ने दीपक कोचर को गिरफ्तार किया था. दरअसल, 2012 में, चंदा कोचर के नेतृत्व में आईसीआईसीआई बैंक ने वीडियोकॉन ग्रुप को 3,250 करोड़ का लोन दिया, जिसमें दीपक कोचर की 50 फीसदी हिस्सेदारी है.

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आरोप है कि इस तरह चंदा कोचर ने अपने पति की कंपनी के लिए वेणुगोपाल धूत को लाभ पहुंचाया. साल 2018 में यह खुलासा होने के बाद चंदा कोचर को बैंक से इस्तीफा देना पड़ा था. सीबीआई ने पहले फरवरी, 2018 में इस मामले में प्रारंभिक जांच (पीई) दर्ज की थी.

जांच में दोषी पाई गईं चंदा कोचर

साल 2019 में आईसीआईसीआई की पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक चंदा कोचर के खिलाफ आरोपों की जांच कर रही जस्टिस बी.एन. श्रीकृष्णा समिति की रिपोर्ट आई. समिति ने अपनी जांच में पाया कि वीडियोकोन को कर्ज देने के मामले में कोचर ने बैंक की आचार संहिता का उल्लंघन किया है. कोचर की स्वीकृति पर इस कर्ज का कुछ हिस्सा उनके पति दीपक की मालिकाना हक वाली कंपनी को दिया गया.
 

 

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