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BNPL: फेस्ट‍िव सीजन में 'Buy Now, Pay Later' ऑफर्स की बहार, जानें-क्या हैं इसके नफे-नुकसान?

Buy Now Pay Later ( BNPL) के ऑफर्स मिलेनियल जनरेशन को काफी पसंद आ रहे हैं, जो आज जीने में यकीन रखती है, कल की बहुत चिंता नहीं करती. कोरोना काल में आर्थ‍िक रूप से परेशान लोगों को भी ऐसी स्कीमें काफी पसंद आ रही हैं.

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फेस्ट‍िव सीजन में बाय नाउ पे लेटर का बढ़ा चलन (फाइल फोटो)
फेस्ट‍िव सीजन में बाय नाउ पे लेटर का बढ़ा चलन (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • फेस्टि‍व सीजन में शॉपिंग हुई आसान
  • BNPL से मिल रहा आसान कर्ज

इस बार त्योहारी सीजन (Festive season Diwali) का सबसे नायाब चलन 'बाय नाउ पे लेटर' (Buy Now, Pay Later-BNPL)  के ऑफर्स को माना जा सकता है. यह एक तरह से कर्ज लेकर घी पीने की संस्कृति ही है, लेकिन मिलेनियल जनरेशन को काफी पसंद आ रहे हैं, जो आज जीने में यकीन रखती है और कल की बहुत चिंता नहीं करती. कोरोना काल में आर्थ‍िक रूप से परेशान लोगों को भी ऐसी स्कीमें काफी पसंद आ रही हैं. आख‍िर क्या है ये स्कीम, इसके क्या हैं नफा और नुकसान? आइए, समझते हैं.

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एमेजॉन, फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों से लेकर फिनटेक कंपनियां, HDFC Bank और  ICICI जैसे बैंक, रिटेल चेन, PayTM, PhonePe, LazyPay, Moneytap, CASHe, Kissht जैसे ऐप तक ऐसे ऑफर्स की झड़ी लग गई है. हाल में भारत पे ने भी ऐसी ही स्कीम का एक अलग ऐप ‘postpe' लॉन्च कर दिया है.

postpe ऐप के माध्यम से ग्राहक 1000 रुपये लेकर 10 लाख तक की शॉपिंग बिना जेब में अठन्नी रहे भी कर सकते हैं और पैसा बाद में  चुका सकते हैं. इस ऐप के द्वारा आप क्यूआर कोड, कार्ड मशीन या ऑनलाइन किसी भी तरह से खरीदारी, खर्च कर सकते हैं. यही नहीं ग्राहक इस खर्च को आसान ईएमआई में कन्वर्ट भी करा सकते हैं.

यह एक तरह का कर्ज ही है, लेकिन किसी तरह के झंझट से मुक्त, बस ऐप में आपको अपना पैन और आधार जैसा केवाईसी डिटेल देना होता है. ईएमआई 3 से 6 महीने की ही होती है और इसके लिए ब्याज 15 से 20 फीसदी की सालाना दर से लिया जाता है, जो कि क्रेडिट कार्ड के मुकाबले काफी कम है. 

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 क्या होता है BNPL 

Buy now, pay later (BNPL) एक ऐसी स्कीम होती है जिसमें ग्राहक को खर्च करने के लिए तत्काल पैसा मुहैया कराया जाता है. ग्राहक उसे अगले महीने बिल आने पर चुका सकता है, या चाहे तो उसे 3 से 6 महीने, साल भर के ईएमआई में कन्वर्ट करा सकता है. एक महीने बाद जो पेमेंट आप करते हैं उस पर कोई ब्याज नहीं देना होता.आमतौर पर ऐसा इंट्रेस्ट फ्री पीरियड 15 से 30  दिन का होता है. इसका टारगेट वर्ग खासकर वह मिलेनियल जनरेशन है जो शॉपिंग की इच्छा तो बहुत रखता है, लेकिन उसके पास इकट्ठा ज्यादा कैश नहीं होता.

इसी तरह कम सैलरी, इनकम वाला देश का बहुत बड़ा मध्यम वर्ग का तबका भी इसे पसंद कर रहा है. कई प्लेटफॉर्म तो 500 रुपये की न्यूनतम शॉपिंग पर भी ऐसी सुविधा देते हैं. तो अध‍िकतम सीमा की बात करें तो यह 10 लाख रुपये तक की शॉपिंग पर भी मिल रहा है, जैसा कि फोन पे के ऑफर में हमने आपको बताया है. इस सुविधा की मदद से आप गैजेट से लेकर सब्जी तक कुछ भी खरीद सकते हैं, क्योंकि कई ऐप पर क्यूआर कोड से शॉपिंग की सुविधा उपलब्ध है.

क्या है क्रेडिट कार्ड से फर्क 

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क्रेडिट कार्ड भी तो आख‍िर उधारी पर शॉपिंग और लोन चुकाने के लिए 45 से 50 दिन का इंट्रेस्ट फ्री पीरियड तो देते ही हैं, फिर आख‍िर इस योजना का फर्क क्या है? क्या हैं बीएनपीएल की सीमाएं और फायदे. आइए जानते हैं. 

  • क्रेडिट कार्ड में ज्वाइनिंग फीस, सालाना रिकरिंग चार्ज जैसे खर्च जुड़े होते हैं. BNPL में ऐसी कोई लागत नहीं होती, लेकिन कुछ फर्म मामूली प्रोसेसिंग फीस चार्ज करते हैं. 
  • क्रेडिट कार्ड में आमतौर पर 30 से 48 फीसदी तक सालाना का भारी ब्याज लिया जाता है. जबकि बीएनपीएल में 15 से 30 फीसदी का ही ब्याज लिया जा रहा है. 
  • क्रेडिट कार्ड सबको आसानी से नहीं मिलता. एक निश्चित सैलरी या इनकम वाले लोगों को ही यह मिल पाते हैं, जबकि BNPL में ऐसी कोई क्राइटेरिया नहीं है, कोई भी इसका फायदा उठा सकता है. 
  • क्रेडिट कार्ड में 45 से 50 दिन तक का इंट्रेस्ट फ्री पीरियड दिया जाता है, जबकि BNPL में आमतौर पर यह 15 से 30 दिन का होता है. 
  • क्रेडिट कार्ड में कुछ खास शॉपिंग पर ही ईएमआई की सुविधा दी जाती है, जबकि BNPL में खासकर ऐप ऐसी सुविधाएं लेकर आए हैं जिससे आप ज्यादातर शॉपिंग खर्च को ईएमआई में कन्वर्ट करा सकते हैं. 
  • BNPL की एक सीमा यह होती है कि अगर स्कैनिंग वाले ऐप के माध्यम से आप शॉपिंग कर रहे है तब तो ठीक है, नहीं तो ज्यादातर बैंक और ई-कॉमर्स साइट सिर्फ अपने पार्टनर मर्चेंट से शॉपिंग पर ही यह सुविधा देते हैं. जबकि क्रेडिट कार्ड को कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकता है. 

कैसे बना सकते हैं बेहतर अनुभव 

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‘buy now, pay later’ कर्ज लेकर घी पीने की ऐसी संस्कृति को बढ़ावा दे रहा है जिसके झांसे में लोग जरूरत से ज्यादा खर्च कर लेते हैं. चूंकि आज बिना पैसे के शॉपिंग कर सकते हैं, चुकाना बाद में है तो खासकर युवा लोग लालच में फंसकर खूब खर्च कर सकते हैं. लेकिन एक-दो महीने बाद ही सही आख‍िर उन्हें पैसा तो देना ही होता है. ऐसे में आपको खास तौर से यह बात ध्यान में रखनी होगी कि जहां वास्तविक जरूरत हो, वैसी शॉपिंग करें नहीं तो आप कर्ज के जाल में फंसकर अपना जीवन दुखमय कर सकते हैं.

बीएनपीएल लोन का इस्तेमाल करने से पहले बैंक या ऐप की बारीक शर्तों को ध्यान से पढ़ लें. अगर आपके पास पहले से क्रेडिट कार्ड या किसी अन्य तरह का कर्ज है तो फिर से कर्ज लेने के लोभ में न आएं. अगर आप इसका फ्रेक्वेंटली इस्तेमाल करते हैं तो समय से कर्ज चुकाएं. इसकी वजह यह है कि आपके पेमेंट रिकॉर्ड के आधार पर आगे फिर ऐसी योजना या किसी अन्य योजना के तहत लोन लेना आसान होगा. आपकी सिबिल रेटिंग खराब हो जाएगी तो आगे फिर किसी तरह का कर्ज लेना भी मुश्किल होगा. 

अगर आपको 1,000 से 10,000 जैसे छोटे अमाउंट में खरीद करनी है तो उसके लिए बाय नाउ पे लेटर स्कीम बेहतर हो सकता है. अगर आप ईएमआई पर कोई सामान खरीदना चाहते हैं तो आपको क्रेडिट कार्ड और बाय नाउ पे लेटर दोनों के टोटल कॉस्ट की तुलना कर लेनी चाहिए. कई बार क्रेडिट कार्ड में बीएनपीएल से बेहतर ऑफर मिल जाता है. 

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क्या है पेच, किन बातों का रखें ध्यान 

इस तरह की सुविधा का लाभ उठाने वाले ग्राहकों को यह बात ध्यान रखनी होगी कि अगर उन्होंने निर्धारित डेट पर पेमेंट नहीं किया या कम पेमेंट किया तो आपके बकाया पेमेंट पर 15 से 20 फीसदी सालाना का ब्याज लग जाएगा. यही नहीं आपके ऊपर भारी लेट पेमेंट पेनाल्टी भी लगाया जा सकता है, जिससे आपका यह कर्ज और महंगा पड़ सकता है. यही नहीं, बार-बार सही समय पर कर्ज न चुका पाने से आपकी सिबिल रेटिंग भी खराब हो सकती है और भविष्य में किसी तरह के लोन मिलने में अड़चन आ सकती है. 

जब कोई ऐप डाउनलोड करें तो यह सुनिश्चित कर लें कि वह किसी ऐसी संस्था का हो जिसे रिजर्व बैंक से लाइसेंस मिला हो. अगर लाइसेंस नहीं है तो उस संस्था की वेबसाइट पर जाकर देखें कि वह कैसी कंपनी है. अगर ऐप किसी स्थापित या रजिस्टर्ड कंपनी का है तो ही ऐप डाउनलोड करें. 

ध्यान रहे कि कुछ प्लेटफॉर्म द्वारा इनमें लेट पेमेंट फीस या प्री-क्लोजर चार्ज लगाया जा सकता है. ज्यादातर  BNPL ऑप्शन में क्रेडिट फ्री पीरियड में जीरो पर्सेंट ब्याज का दावा किया जाता है. लेकिन अगर किसी तरह की प्रोसेसिंग फीस या अन्य चार्ज लिया जाता है तो यह दावा बेकार साबित हो जाता है, क्योंकि आपके कर्ज की लागत बढ़ जाती है. 

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