
वित्त मंत्री ने निर्मला सीतारमण (Nirmla Sitharaman) ने आम बजट (Budget 2023) में नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regimes) के टैक्स स्लैब में बदलाव करने का ऐलान किया है. इसके बाद से लोग नई टैक्स रिजीम और पुरानी में तुलना कर रहे हैं और ये देख रहे हैं कि उनके लिए कौन सी व्यवस्था फायदेमंद साबित होगी. जाहिर है सात लाख रुपये तक की सालाना इनकम टैक्स फ्री है. लेकिन एक स्तर पर सालाना कमाई पहुंचने के बाद क्या नई टैक्स व्यवस्था और क्या पुरानी दोनों पर ही बराबर टैक्स लगेगा. इस पूरा गुणा गणित को आइए आसान भाषा में समझ लेते हैं.
दोनों में अंतर
नई टैक्स व्यवस्था में सालाना सात लाख रुपये तक की इनकम टैक्स फ्री है, लेकिन किसी भी तरह के डिडक्शन का लाभ इसमें नहीं मिलेगा. पुराने टैक्स रिजीम पर 80C के तहत 1,50,000 रुपये तक का डिडक्शन मिलता है.
ऐसे में नई टैक्स व्यवस्था उनके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है, जिनके पास किसी भी तरह का निवेश या होम लोन नहीं है. अगर किसी ने सेविंग स्कीम में निवेश किया है और उसपर होम लोन भी है, तो उसके लिए पुरानी टैक्स रिजीम ही फायदेमंद है.
पुरानी टैक्स रिजीम के तहत 4,25,000 रुपये के डिडक्शन का लाभ उठा सकते हैं. इस स्थिति में अगर आपकी सालाना आय 16,00,000 रुपये है, तो आप पुरानी टैक्स रिजीम चुनें या नई... टैक्स एक बराबर देना होगा.
16 लाख की कमाई पर एक बराबर टैक्स
अब इसे और आसान भाषा में समझ लेते हैं.... एनवलप कैलकुलेशन के अनुसार, अगर किसी टैक्सपेयर की सालाना इनकम 16 लाख रुपये है. वो 4.25 लाख रुपये के डिडक्शन के लिए पुरानी टैक्स रिजीम को चुनता है ( 50,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन, 2 लाख होम लोन ब्याज, 80C के तहत 1.5 लाख, हेल्थ इंश्योरेंस के लिए 80D के 25,000 रुपये) तो उसे भी उतना ही इनकम टैक्स देना होगा, जितना इतनी ही कमाई पर नई टैक्स रिजीम के तहत भुगतान करना होगा.
कितनी इनकम पर लगेगा एक बराबर टैक्स
इनकम | ओल्ड टैक्स रिजीम | न्यू टैक्स रिजीम | बचत | बेहतर कौन? |
10,00,000 | 28,600 | 54,600 | 26,000 | ओल्ड |
11,00,000 | 49,400 | 70,200 | 20,800 | ओल्ड |
12,00,000 | 70,200 | 85,800 | 15,600 | ओल्ड |
15,00,000 | 1,40,400 | 1,45,600 | 5,200 | ओल्ड |
16,00,000 | 1,71,600 | 1,71,600 | 00 | दोनों |
20,00,000 | 2,96,400 | 2,96,400 | 00 | दोनों |
25,00,000 | 4,52,400 | 4,52,400 | 00 | दोनों |
30,00,000 | 6,08,400 | 6,08,400 | 00 | दोनों |
35,00,000 | 7,64,400 | 7,64,400 | 00 | दोनों |
40,00,000 | 9,20,400 | 9,20,400 | 00 | दोनों |
45,00,000 | 10,76,400 | 10,76,400 | 00 | दोनों |
50,00,000 | 12,32,400 | 12,32,400 | 00 | दोनों |
पुरानी और नई टैक्स व्यवस्थाओं के बीच मुख्य अंतर यह है कि नई टैक्स रिजीम के तहत आप 80C, 80D और 24B जैसी कटौती का लाभ नहीं उठा सकते हैं. जबकि आप डिडक्शन और छूटों को शामिल कर पुरानी व्यवस्था के तहत ये सभी लाभ ले सकते हैं.
ऐसे लोगों के लिए बेहतर नई टैक्स रिजीम
आमतौर पर, यदि आपके पास डिडक्शन के रूप में क्लेम करने के लिए निवेश नहीं है तो नई व्यवस्था अधिक मुफीद बैठती है. हालांकि, 16 लाख तक की आय वाले और होम लोन, स्वास्थ्य बीमा और पीपीएफ जैसी सेविंग स्कीम पर डिडक्शन का लाभ उठाने वाले लोगों को वैल्यूएशन करने की जरूरत होगी. क्योंकि उनके लिए पुरानी व्यवस्था अभी भी अधिक बेहतर साबित हो सकती है. हालांकि, यह अलग-अलग मामलों में अलग-अलग होगा.
(नोट: टैक्स संबंधित फैसले लेने से पहले एक बार एक्सपर्ट्स से जरूर सलाह लें)