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Explainer: पेट भरने से ज्यादा अब पोषण पर ध्यान, PM Poshan Scheme की ये 7 बातें हैं जानने लायक

मोदी सरकार ने मिड-डे मील (Mid-Day Meal) से जानी जाने वाली योजना का नाम बदलकर इसे ‘प्रधानमंत्री पोषण योजना’ (PM Poshan Scheme) कर दिया है. लेकिन इस योजना का सिर्फ नाम नहीं बदला गया है, बल्कि इसे पहले से ज्यादा यूनिवर्सल बनाने की कोशिश की गई है. जानते हैं इससे जुड़ी वो 7 बातें जो इसे नया रूप देती हैं...

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मिड-डे मील योजना अब कहलाएगी प्रधानमंत्री पोषण योजना (Photo : PTI)
मिड-डे मील योजना अब कहलाएगी प्रधानमंत्री पोषण योजना (Photo : PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 3 लाख से ज्यादा स्कूलों में बनेंगे पोषण बाग
  • बच्चों को पाक कला में आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश
  • बढ़ेगी महिलाओं और किसानों की आय

सरकार ने मध्याह्न भोजन (Mid Day Meal) योजना में कई बदलाव करते हुए नई ’प्रधानमंत्री पोषण योजना’ शुरू की है. नई योजना में कई ऐसी बातें जोड़ी गई हैं जो ‘देश के बच्चों’ का पेट भरने से ज्यादा अब उनके ‘पोषण’, स्थानीय संस्कृति को बचाने और किसानों की आय बढ़ाने पर जोर देती हैं. 

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1.करोड़ों बच्चों को फायदा

नई पीएम पोषण स्कीम में सबसे बड़ा बदलाव, इसमें सरकारी बाल वाटिका यानी प्री-प्राइमरी स्कूल और सरकार से सहायता प्राप्त प्राइमरी स्कूल के बच्चों के शामिल करना है. इसका फायदा ये होगा कि देश के 11.20 लाख से अधिक सरकारी स्कूलों के 11.80 करोड़ बच्चों को सही पोषण मिलेगा.

2. पेट भरने से ज्यादा पोषण पर जोर

नई योजना के माध्यम से सरकार बच्चों का पेट भरने से ज्यादा पोषण मिलने पर जोर दे रही है. तभी तो इस योजना में ‘एनीमिया’ (रक्त की कमी) की बीमारी से ज्यादा प्रभावित जिलों और आकांक्षी जिलों (एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक) में बच्चों को पोषक तत्वों से भरपूर अतिरिक्त खाने की चीजें उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है.

3. स्कूलों में बनेंगे पोषण बाग

प्रधानमंत्री पोषण योजना में सरकार ने स्कूलों में ‘स्कूल न्यूट्रिशन गार्डन’ विकसित किए जाने का भी प्रावधान किया है. इसे करीब 3 लाख सरकारी स्कूलों में बनाया जाना है और इसके लिए बच्चों की ही मदद ली जानी है. इस प्रावधान से दो फायदे होने की उम्मीद है, एक तो बच्चों को स्थानीय स्तर पर ताज़ी साग-सब्जियां इत्यादि मिल सकेगी जिनमें अधिक पोषण होगा, दूसरा बच्चों के अंदर बागबानी और पोषण की समझ भी बढ़ेगी जो बड़े होने पर उनके काम आएगी.

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4. ‘तिथि भोजन’ का प्रावधान

सरकार ने नई योजना में 15 अगस्त, 26 जनवरी जैसे दिनों पर ‘तिथि भोजन’ का प्रावधान किया है. इसे आसान भाषा में समझें तो ये गुरुद्वारों में होने वाले ‘लंगर’ की तरह होगा जो रोज की बजाय किसी स्पेशल दिन होगा. दरअसल इसके माध्यम से सरकार बच्चों को खाना खिलाने की इस योजना से समाज को जोड़ना चाहती है. ‘तिथि भोजन’ के दिन समाज, स्थानीय समाज के गणमान्य लोग, सामाजिक संस्थाएं इत्यादि बच्चों को स्कूल में ‘विशेष भोजन’ कराने में अपनी भूमिका अदा कर सकेंगे.

5. बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश

नई पीएम पोषण योजना में पाक कला प्रतियोगिता यानी कुकिंग कॉम्पिटिशन को बढ़ावा देने की बात भी की गई है. ये प्रतियोगिता गांव स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक होगी. इससे बच्चों (लड़का-लड़की दोनों) के खाना पकाने का कौशल पनपने और समय के साथ उनके ‘आत्मनिर्भर’ बनने की उम्मीद है.

6. होगी स्थानीय खान-पान की रक्षा

सरकार देश में बच्चों के बीच ‘जंक फूड’ (बिना पोषण का खाना) के बढ़ते प्रचलन से चिंतित है. खाद्य नियामक FSSAI ने इसके उपभोग को कम करने के लिए कई नियम भी बनाए हैं. लेकिन इस योजना में भी इसका ख्याल रखा गया है. पीएम पोषण योजना के तहत जो कुकिंग कॉम्पिटिशन होगा उसमें स्थानीय खान-पान, वहां उपलब्ध सामग्री के उपयोग और स्थानीय संस्कृति के मेन्यू पर जोर दिया जाएगा, ताकि स्थानीय खान-पान संस्कृति की रक्षा हो सके. हालांकि जंक फूड का सीधा संबंध संपन्नता से है और ग्रामीण स्तर पर इसका प्रचलन कम है.

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7. बढ़ेगी महिलाओं और किसानों की आय

नई पीएम पोषण योजना में ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल 4 लोकल’ का भी ध्यान रखा गया है. स्कूलों में इस योजना को लागू करने में ‘महिला स्वयं सहायता समूह’ (SHG) और ‘किसान उत्पादन संगठन’ (FPO) को प्रोत्साहित किया जाएगा. इससे किसानों और महिलाओं दोनों की आय में बढ़ोत्तरी रहेगी.

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