पाकिस्तान इस वक्त अब तक सबसे बुरे आर्थिक संकट (Economic Crisis) से जूझ रहा है. हर दिन उसका विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) घट रहा है. इस वजह से वो तमाम जरूरत की वस्तुओं का आयात नहीं कर पा रहा है. स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) के अनुसार, पाकिस्तान विदेशी मुद्रा भंडार 20 जनवरी को समाप्त सप्ताह के दौरान नौ साल के निचले स्तर 3.678 अरब डॉलर पर पहुंच गया था. बाहरी कर्ज अदा करने कारण सप्ताह के दौरान पाकिस्तान विदेशी मुद्रा भंडार 923 मिलियन डॉलर की कमी आई.
9 हजार कंटेनर फंसे
पाकिस्तान की न्यूज वेबसाइट 'द डॉन' में छपी एक खबर के अनुसार, तेजी से घटता भंडार तीन सप्ताह के आयात को कवर करने के लिए भी पर्याप्त नहीं है. पाकिस्तान के बंदरगाहों पर पेमेंट के इंतजार में करीब 9,000 कंटेनर फंसे हुए हैं. साथ ही, पेट्रोलियम प्रोडक्ट, एलएनजी और सोयाबीन सहित आवश्यक वस्तुओं को ले जाने वाले जहाजों को भुगतान का इंतजार है, लेकिन खाली हाथ सरकार इनफ्लो की तलाश में है.
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार
अगर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार की बात करें, तो 21 जनवरी 2023 को खत्म हुए सप्ताह के आंकड़े के अनुसार, 634.287 अरब डॉलर है. पिछले साल इसी तारीख को देश का फॉरेक्स रिजर्व 573.727 अरब डॉलर पर था. भारत के मुकाबले पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार सिर्फ 3.67 अरब डॉलर था. पाकिस्तान इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) के सामने हाथ फैलाए खड़ा है. लेकिन अभी तक बात नहीं बन पाई है. हालांकि, पाकिस्तान की सरकार ने IMF की सभी शर्तों को मानने की हामी भर दी है.
बंदरगाहों पर खड़े सामान लदे जहाज
इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) कठिन शर्तों पर फंड देने के लिए तैयार हुआ है, जिसे पाकिस्तान मानने के लिए तैयार हो गया है. इसकी वजह से भी पाकिस्तानी रुपया भी कमजोर हो रहा है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा था कि उनका देश IMF की सभी मांगों पर बातचीत के लिए तैयार है. आयात ठप हो जाने से वहां के लोगों को आटा, चावल और रसोई गैस जैसी जरूरत की वस्तुएं नहीं मिल पा रही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, देश में महंगाई दर 25 फीसदी के करीब है.
पाकिस्तानी बंदरगाहों पर विदेशी कंटेनर भरे पड़े हैं. मगर पेमेंट करने के लाले हैं. इतिहास का सबसे बड़ा आर्थिक संकट झेल रहे पाकिस्तान में जो हालात बनते जा रहे हैं, वो श्रीलंका (Sri Lanka) की तरह ही नजर आ रहे हैं.