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नोएडा का समाधान बनेगा देश के लिए मिसाल, सरकार का फैसला- वर्षों से अटके 5 लाख खरीदारों को मिलेगा घर

साल 2022 की शुरुआत में 37 हजार फ्लैट्स का पजेशन देने के बावजूद 1 साल पहले तक 4.8 लाख ग्राहकों को गृह प्रवेश का इंतजार था. इनमें से 2.4 लाख घर अकेले NCR में हैं. ये कुल फंसे घरों का 77 फीसदी है.

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नोएडा का समाधान बनेगा देश के लिए मिसाल
नोएडा का समाधान बनेगा देश के लिए मिसाल

प्रॉपर्टी कंसलटेंट फर्म एनारॉक की पिछले साल जून में जारी हुई रिपोर्ट में दावा किया गया था कि देश के 7 प्रमुख शहरों में करीब 4.8 लाख घरों के निर्माण में या तो देरी हो रही है या फिर ये प्रोजेक्ट्स फंस गए हैं. इस रिपोर्ट में भी उन प्रोजेक्ट्स को ही शामिल किया गया था जो 2014 के पहले शुरू हुए थे. इस रिपोर्ट के मुताबिक इन घरों की कीमत लगभग 4.48 लाख करोड़ रुपये है. लेकिन अब अगर केंद्र सरकार के वादे पर भरोसा करें तो इन फंसे फ्लैट्स का समाधान होने वाला है. 

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हरदीप पुरी ने दिया भरोसा

रियल एस्टेट रेगुलेटर रेरा से जुड़ी राष्ट्रीय सलाहकार परिषद् की बैठक में केंद्रीय आवास और शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी ने कहा कि इन प्रोजेक्ट्स की समीक्षा और उनके समाधान के लिए बनी अमिताभ कांत समिति की रिपोर्ट मिलते ही इन प्रोजेक्ट्स को एक तय डेडलाइन के भीतर पूरा किया जाएगा. पुरी के अनुसार समिति को अपनी रिपोर्ट देने के लिए 6 महीने दिए गए थे, लेकिन समिति जितनी जल्दी रिपोर्ट सौंप देगी उतना ही शीघ्र अटके प्रोजेक्ट्स को पूरा करने का काम शुरू हो जाएगा. अमिताभ कांत के G-20 का शेरपा बन जाने के बावजूद इस समिति की 2 मीटिंग्स हो चुकी हैं. पुरी का कहना है कि व्यस्तता के बाद भी इस समिति ने घर खरीदारों के लिहाज से इस बेहद महत्वपूर्ण मामले में काफी प्रगति की है. 

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NCR में फंसे फ्लैट्स का अंबार!
देश में 2021 के आखिर तक 5.17 लाख फ्लैट्स फंसे हुए थे. 2022 की शुरुआत में 37 हज़ार फ्लैट्स का पजेशन देने के बावजूद 1 साल पहले तक 4.8 लाख ग्राहकों को गृह प्रवेश का इंतजार था. इनमें से 2.4 लाख घर अकेले NCR में हैं. ये कुल फंसे घरों का 77 फीसदी है. वहीं देश के जिन 7 बड़े शहरों का जिक्र इस रिपोर्ट में किया गया था उनमें बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद की हिस्सेदारी इन फंसे फ्लैट्स में महज 9 परसेंट है. वहीं पुणे की हिस्सेदारी 9 फीसदी और कोलकाता का योगदान 5 प्रतिशत है. 

केंद्रशासित क्षेत्रों की ओर से बनाए गए नियम
रियल इस्टेट क्षेत्र की नियामक संस्था रेरा से जुड़े मसलों पर चर्चा के लिए आयोजित इस बैठक में पुरी ने कहा कि इतने विरोध और असहमति के बाद बनी इस संस्था के महत्व को किसी तरह कम नहीं होने दिया जाएगा। परिषद की पिछली बैठक में दिल्ली-एनसीआर समेत देश के दूसरे हिस्सों में लंबे समय से लंबित परियोजनाओं के निस्तारण के लिए समिति बनाने का फैसला किया गया था। गत मार्च में नीति आयोग के पूर्व सीईओ तथा जी-20 के शेरपा अमिताभ कांत की अध्यक्षता में 14 सदस्यीय समिति का गठन किया गया था।

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नोएडा का समाधान बनेगा देश के लिए मिसाल

आम्रपाली, जेपी इंफ्रा और यूनिटेक के अटके प्रोजेक्ट्स की वजह से नोएडा में फंसे फ्लैट्स की तादाद सबसे ज्यादा है. यहां पर 1 लाख से ज्यादा फ्लैट्स फंसे हुए हैं. आम्रपाली ग्रुप का समाधान काफी हद तक सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हो चुका है. यहां पर NBCC काम कर रही है और प्रोजेक्ट्स को पूरा किया जा रहा है. लेकिन इस सबमें विकास प्राधिकरणों को मिलने वाला जमीन का पैसा अटक गया है. ऐसे में नोएडा के समाधान को लेकर सबसे ज्यादा माथापच्ची की जा रही है. माना जा रहा है कि नोएडा का समाधान देशभर में लागू किया जाएगा. इसके लिए रेरा के साथ साथ राज्यों और केंद्रशासित क्षेत्रों के नियमों को लेकर मंथन जारी है. 

रेरा के आने के बावजूद समाधान में देरी

अभी तक 32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में बतौर रेगुलेटर रेरा का गठन हो चुका है. 28 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने अपीलीय ट्रिब्यूनल बना लिए हैं. वहां 30 राज्यों और यूटी ने एक्ट के तहत वेबसाइट का संचालन करना शुरू कर दिया है. 1 लाख से ज्यादा प्रोजेक्ट पंजीकृत हैं और 72 रियल एस्टेट एजेंटों ने इसके तहत अपना रजिस्ट्रेशन कराया है. हालांकि रेरा के आने के बाद जिस तेजी से फंसे फ्लैट्स के समाधान की उम्मीद थी वैसा कुछ नजर नहीं आया है. लेकिन इसकी एक बड़ी वजह है कि फंसे प्रोजेक्ट्स रेरा के गठन से पहले के हैं और उनमें पैसों को जमकर इधर से उधर किया गया था. रेरा के आने के बाद से इस तरह की धोखाधड़ी कम हुई हैं और प्रोजेक्ट्स के फंसने का जोखिम भी कम हो गया है.

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