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Bulldozer Power: बुलडोजर इतना वजन कैसे उठा लेता है? केवल एक नट में छिपी है पूरी ताकत!

How to Work Bulldozer: जेसीबी एक अर्थमूविंग मशीन है. खासकर इसका काम सतह की लेवलिंग करने और इमारतों को गिराने में आता है. 'जेसीबी की खुदाई' जैसे वाक्य भी बहुत फेमस है. बुलडोजर एक ताकतवर ट्रैक्टर का रूप है,

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Bulldozer की कहानी
Bulldozer की कहानी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • हाइड्रोलिक प्रेशर सिस्टम पर चलता है बुलडोजर
  • भारत में लगातार बढ़ रही है बुलडोजर की बिक्री

बुलडोजर (Bulldozer) चल रहा है, और देखने वाली की भीड़ लगी है. शहर हो या गांव, बुलडोजर मजमा लगाने में पीछे नहीं रहता है. अब तो इस पर राजनीति का रंग भी चढ़ गया है. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बुलडोजर भी एक किरदार बन गया था. चुनावी सभाओं में बुलडोजरों को सजा-धजा कर खड़ा किया जाने लगा था.

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अब जब उत्तर प्रदेश में अवैध कब्जों पर बुलडोजर (Bulldozer) चल रहा है, तो फिर यह सुर्खियां बटोर रहा है. इसी कड़ी में आज हम आपको बुलडोजर से जुड़ी कुछ खास बातें बताते हैं. आखिर बड़ी-बड़ी इमारतों को जमींदोज करने वाले बुलडोजर में कितनी ताकत होती है? यह कितना वजन उठा सकता है? और क्या इसे रखने में हाथी पालने जैसा खर्च आता है?

जब बुलडोजर पर चढ़ा चुनावी रंग

बुलडोजर बाजार पर JCB का कब्जा

जब भी ताकत (Power) की बात होती है, तो शक्तिशाली भीम (Bhima) का उदाहरण दिया जाता है. कहा जाता है कि उनमें 10 हजार हाथियों के बराबर शक्ति थी. इसी शक्ति की बदौलत भीम ने एक बार नर्मदा नदी का प्रवाह रोक दिया था. वहीं ये भी उदाहरण दिया जाता है कि चींटी अपने से 50 गुना ज्यादा भार उठा सकती है.

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अब मुद्दे पर लौटते हैं, आखिर बुलडोजर अधिकतम कितना वजन (Weighing Capacity) उठा सकता है. भारत में सबसे ज्यादा बुलडोजर जेसीबी (JCB) कंपनी की बिकती है, और सबसे ज्यादा बनाती भी यही कंपनी है. भारत में जेसीबी कंपनी 130 बुलडोजर मशीनें प्रतिदिन तैयार कर रही हैं.

बुलडोजर का काम (How to Work Bulldozer)
जेसीबी एक अर्थमूविंग मशीन (Earthmoving Machine) है. खासकर इसका काम सतह की लेवलिंग करने और इमारतों को गिराने में आता है. 'जेसीबी की खुदाई' जैसे वाक्य भी बहुत फेमस है. बुलडोजर एक ताकतवर ट्रैक्टर का रूप है, जो ब्लेड या रिपर लगाकर भारी वस्तुओं को खिसकाने या एक जगह से दूसरे जगह ले जाने के काम आता है.

भारत में कई तरह के बुलडोजर मिलते हैं, सबसे छोटा बुलडोजर JCB 1CX (Backhoe) है, जिसका वजन करीब 1530 किलो ग्राम होता है. लेकिन अब डिमांड तेजी से बढ़ने के साथ कंपनियां हाईटेक फीचर्स से लैस बुलडोजर बना रही हैं. वैसे अब सबसे ज्यादा JCB 3DX ECO Excellence और JCB 3DX ECO Xpert बुलडोजर बिक रहे हैं. इस बुलडोजर का वजन 7460 किलो है. मुख्यतौर पर बुलडोजर दो प्रकार के होते हैं- Loder और Buket. 

कितना वजन उठा सकता है बुलडोजर
अब बताते हैं, कि आखिर कितना वजन उठा सकता है, एक बुलडोजर? एक्सपर्ट और कंपनी की मानें तो किसी बिल्डिंग को गिराना और उसके मलबे को उठाने में अलग-अलग तकनीक और ताकत का प्रयोग होता है. भारत में मौजूद JCB अधिकतम 100 क्विंटल तक का वजन उठाने में सक्षम हैं. वहीं छोटे बुलडोजर से 20 क्विंटल तक वजन उठाए जा सकते हैं. 

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एक उदाहरण में समझते हैं, JCB 3DX ECO Excellence बुलडोजर में 92 HP की ताकत है, और इस बुलडोजर का वजन करीब 7460 किलो है, जबकि यह 8010 किलो तक वजन (Weight Operating) उठा सकता है. यानी यह अपने वजन से भी ज्यादा भार उठा सकता है. इस हिसाब से आप जितना ज्यादा HP का बुलडोजर लेंगे, वो उतना ज्यादा भार उठाने में सक्षम रहेगा. वैसे दुनियाभर में 600 से 850 HP तक के बुलडोजर उपलब्ध हैं.  

कैसे काम करता है बुलडोजर?

कैसे उठाता है इतना वजन? 
बुलडोजर से वजन उठाने का काम तकनीक पर आधारित है. हाइड्रोलिक प्रेशर (Hydraulic Pressure) से इसे ऑपरेट किया जाता है, और एक नट की मदद से ड्राइवर उसे ऑपरेट करता है. उसी एक नट पर पूरा हाइड्रोलिक सिस्टम (Hydraulic Capacity) काम करता है. इसे ऑपरेट करने के लिए बकायदा ट्रेनिंग दी जाती है, और वजन उठाते वक्त इंडिकेटर बताता है कि अधिक वजन है या फिर क्षमता के अनुरूप. क्षमता से ज्यादा वजन उठाने पर Horse Pipes डैमेज हो सकता है और पंप भी खराब हो सकता है, जिससे भारी खर्च का सामना करना पड़ सकता है. 

अगर कीमत की बात करें तो भारत में 10 लाख रुपये में भी बुलडोजर मिल जाते हैं. वैसे सबसे ज्यादा 15 से 30 लाख रुपये वाले बुलडोजर बिकते हैं. JCB 3DX ECO Excellence की ऑन रोड प्राइस करीब 30 लाख रुपये है. इससे अधिक दाम के भी बुलडोजर मिलते हैं. 
 
बुलडोजर में माइलेज?
बुलडोजर को रखने में क्या हाथी पालने जैसा खर्च आता है. JCB 3DX ECO Excellence अधिकतम एक घंटे में 4 लीटर डीजल पीता है. खुदाई के दौरान अधिकतम डीजल की खपत होती है. 

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बुलडोजर का इतिहास
बुलडोजर को अमेरिका के पेन्सिलवेनिया के दो किसानों (James Cummings और J. Earl McLeod) ने 18 दिसंबर 1923 में बनाया किया था. शुरुआत में बुलडोजर का इस्तेमाल सिर्फ खेती में होता था. बाद में फिर बिल्डिंग बनाने, गिराने, सड़क बनाने, जमीन समतल करने, खुदाई करने और मिट्टी-रेता-बजरी जैसी चीजें कंटेनरों में भरने में होने लगा. साल 1940 तक यह एक खुदाई मशीन बन गई. 

आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल करीब 40 हजार बुलडोजर बनते हैं. यहां हर महीने औसतन 3500 बुलडोजर बनते हैं, जो जेसीबी, टाटा हिटाची, महिंद्रा, एस्कॉर्ट्स, एसीई जैसी कंपनियां बनाती हैं. भारत में बने कुल बुलडोजर का करीब 70-75 फीसदी उत्पादन तो अकेली जेसीबी ही करती है.

 

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