देश का सबसे बड़ा आईपीओ LIC IPO रिटेल निवेशकों (Retail Investor) के लिए खुल गया है. निवेशक आज से 9 मई तक इस सरकारी कंपनी के आईपीओ में निवेश कर पाएंगे. शेयरों का आवंटन 12 मई को होगा और शेयर बाजार में LIC आईपीओ की लिस्टिंग 17 मई को होगी.
LIC IPO से जुड़ीं अहम जानकारियां-
- Public offering (यानी रिटेल निवेशकों के लिए आवेदन)- 4 से 9 मई तक
- प्राइस बैंड (LIC IPO Price band): 902 रुपये से 949 रुपये.
- लॉट साइज (LIC IPO Bid lot size): एक लॉट में 15 शेयर.
- इश्यू साइज (LIC IPO Issue size)- 22.13 करोड़ शेयर (कुल शेयरों का 3.5%)
रिजर्वेशन (LIC IPO Reservations)-
- पॉलिसी होल्डर्स के लिए (Policy holders) - इश्यू का 10% यानी 2.21 करोड़ शेयर रिजर्व.
- कर्मचारियों के लिए 0.15 करोड़ शेयर रिजर्व
- पॉलिसी होल्डर्स के लिए डिस्काउंट (LIC IPO Discount for Policy Holders)- 60 रुपये प्रति शेयर
- LIC कर्मचारियों के लिए डिस्काउंट (LIC IPO Discount for Retail and Employees)- 45 रुपये प्रति शेयर.
कितना लगाना होगा पैसा?
खुदरा निवेशकों के लिए LIC के आईपीओ में तीन कैटेगरी निर्धारित किए गए हैं, पॉलिसी धारक, एलआईसी कर्मचारी और आम निवेशक. एलआईसी बीमा धारकों (Policyholders) को एक लॉट IPO करने पर 60 रुपये प्रति शेयर डिस्काउंट के साथ कुल 13,335 रुपये लगाने होंगे.
वहीं LIC कर्मचारियों को इस आईपीओ में अप्लाई करने पर 45 रुपये प्रति शेयर का डिस्काउंट मिलेगा. यानी अपर प्राइस बैंड के हिसाब से उन्हें एक लॉट के अप्लीकेशन पर 13560 रुपये देने होंगे. जो किसी कैटेगरी में नहीं आते हैं, उन्हें एक लॉट के लिए कुल 14,235 रुपये देने होंगे.
LIC IPO के GMP में गिरावट
इस बीच अनलिस्टेड मार्केट में LIC आईपीओ के ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) में गिरावट देखने को मिल रही है. Ipowatch.in के मुताबिक 4 मई को LIC आईपीओ का GMP करीब 65 रुपये पर ट्रेड कर रहा है, जो कि 3 मई को 85 रुपये था. वहीं 30 अप्रैल को GMP सबसे ज्यादा 90 रुपये था, ऐसे में पब्लिक इश्यू खुलने के साथ GMP में गिरावट देखी जा रही है.
आईपीओ का इश्यू साइज 21,000 करोड़ रुपये का है, और IPO के जरिये करीब 22.14 करोड़ शेयर बेचे जाएंगे. इस आईपीओ (LIC IPO) के जरिए सरकार अपनी 3.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचने वाली है और 21 हजार करोड़ रुपये जुटाने वाली है. इस तरह यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ (Biggest IPO of India) होने वाला है. बता दें, सरकार ने वित्त वर्ष 2022-23 में विनिवेश से 65 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है.