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दो सरकारी बैंकों ने ग्राहकों को दिया झटका, अचानक ले लिया ये बड़ा फैसला

किसी भी बैंक के MCLR में बढ़ोतरी से कार, पर्सनल और होम लोन महंगा हो जाता है. MCLR बढ़ने से आपके लोन की ईएमआई बढ़ जाती है. रिजर्व बैंक की ओर से महंगाई पर नियंत्रण के लिए उठाए जाने वाले कदमों से कर्ज की दरों पर असर पड़ रहा है. RBI ने रेपो रेट में इजाफा किया था.

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दो बैंकों ने की MCLR में बढ़ोतरी.
दो बैंकों ने की MCLR में बढ़ोतरी.

देश के दो सरकारी बैंकों ने अपने ग्राहकों को झटका दिया है. बैंक ऑफ बड़ौदा (BOI) और इंडियन ओवरसीज बैंक (Indian Overseas) ने अपनी मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में इजाफा किया है. दोनों ही बैंकों ने अपनी MCLR दरों में 0.10 फीसदी तक की बढ़ोतरी की है. इससे ग्राहकों के लिए ज्यादातर कर्ज महंगा हो जाएगा. MCLR दर में इजाफे का असर कार, पर्सनल और होम लोन पर पड़ेगा. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लगातार रेपो रेट (Repo Rate) में इजाफा कर रहा है. 

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कब से लागू होंगी नई दरें

इंडियन ओवरसीज बैंक की नई ब्याज दरें 10 सितंबर से लागू हो गई हैं. बैंक की वेबसाइट के अनुसार, ओवरनाइट के लिए MCLR 7.05 फीसदी होगा. एक महीने के लिए MCLR को 7.15 फीसदी रखा गया है. तीन और छह महीने के लिए MCLR 7.70 फीसदी रखा गया है. एक साल के लोन पर MCLR को 7.65 फीसदी से बढ़ाकर बैंक ने 7.75 फीसदी कर दिया गया है.

बैंक ऑफ बड़ौदा ने कितना किया इजाफ

बैंक ऑफ बड़ौदा ने एक साल के MCLR रेट को 7.70 फीसदी से बढ़ाकर 7.80 फीसदी कर दिया है. बैंक ने ये जानकारी रेगुलेटरी फाइलिंग के दौरान दी है. छह महीने के लोन के लिए MCLR को 7.55 फीसदी से बढ़कर 7.65 फीसदी कर दिया गया है. तीन महीने के MCLR को 7.45 फीसदी से 7.50 फीसदी कर दिया है. बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर से कहा गया है कि नई दरें 12 सितंबर 2022 से लागू होंगी.

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MCLR बढ़ने का असर

किसी भी बैंक के MCLR में बढ़ोतरी से कार, पर्सनल और होम लोन महंगा हो जाता है. MCLR बढ़ने से आपके लोन की ईएमआई बढ़ जाती है. नए लोन लेने वालों के लिए MCLR का बढ़ना अच्छा नहीं है. इससे उन्हें ज्यादा महंगा कर्ज मिलेगा. मौजूदा ग्राहकों के लिए लोन की ईएमआई तब बढ़ेगी जब लोन रीसेट की डेट आएगी. MCLR वो न्यूनतम दर है जिस पर बैंक ग्राहकों को कर्ज ऑफर करते हैं.

रिजर्व बैंक के फैसले का असर

रिजर्व बैंक की ओर से महंगाई पर नियंत्रण के लिए उठाए जाने वाले कदमों से कर्ज की दरों पर असर पड़ रहा है. दरअसल, मई और जून के  बाद अगस्त महीने मेभी RBI ने पॉलिसी रेपो रेट में वृद्धि की थी. इस तरह पिछले 4 महीने में अब तक रेपो रेट 1.40 फीसदी बढ़कर 5.40 फीसदी हो चुका है.

पहली बार मई में केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को 0.40 फीसदी बढ़ाकर 4.40 फीसदी किया था. इसके बाद जून की बैठक में रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 0.50 फीसदी बढ़ाया गया. अगस्त में फिर से रेपो रेट को 0.50 फीसदी बढ़ाया गया. इस तरह तीन बार में रेपो रेट को 1.40 फीसदी बढ़ाया जा चुका है. 

 

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