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Israel-Palestine Conflict: इजराइल और हमास में जंग... दुनिया दंग, अब फिर सोना बनेगा सहारा

इजरायल और फिलिस्तीन के बीच जारी संघर्ष से Gold में निवेश बढ़ सकता है और इसकी कीमत में इजाफा हो सकता है. दरअसल, दुनिया भर के शेयर बाजारों में भूचाल आता है या फिर कोई अन्य संकट या आपदा आती है, तो सोने की मांग (Gold Demand) बढ़ जाती है.

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दुनियाभर में सोने को निवेश के सबसे सुरक्षित विकल्पों में से एक माना जाता है
दुनियाभर में सोने को निवेश के सबसे सुरक्षित विकल्पों में से एक माना जाता है

इजराइल और फिलिस्तीन के बीच संघर्ष (Israel-Palestine Conflict) लगातार बढ़ रहा है, दोनों ओर से बमबारी और जानमाल का नुकसान सुर्खियां बना हुआ है. इस संघर्ष ने एक और संकट बढ़ा दिया है. जी हां, एक्सर्ट्स ने संभावना जताई है कि इस युद्ध के चलते सोना की कीमतों (Gold Price) में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है. बता दें कि सोने को न केवल आभूषण के तौर पर पसंद किया जाता है, बल्कि इसे निवेश के तौर पर भी खासी अहमियत दी जाती है. किसी आपदा और संकट की स्थिति में इसे निवेश के लिए सुरक्षित ठिकाने के तौर पर देखा जाता है और फिलहाल जो संकट पैदा हुआ है, उसके बाद भी इसमें तेजी की आशंका है. 

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सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ेगी दिलचस्पी
दरअसल, फिलिस्तीनी ग्रुप हमास (Hamas) ने शनिवार को 5000 रॉकेट दागते हुए इजराइल में एंट्री की और कत्लेआम मचाया. इसके जवाब में इजराइल (Israel) की ओर से जवाबी हमला किया जा रहा है और दोनों के बीच जारी इस संघर्ष में अभी तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है और करीब 4,000 लोग घायल बताए जा रहे हैं. दूसरी ओर अमेरिका के नेतृत्व में पश्चिमी देशों ने हमास के हमले की कड़ी निंदा करते हुए इजराइल को समर्थन देने का वादा किया है.

इजराइल में ये हिंसा संभवतः सुरक्षित-निवेश की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी, क्योंकि निवेशक बाजारों (Share Markets) में भू-राजनीतिक असर की संभावना से मचने वाली उथल-पुथल और मिडिल ईस्ट की घटनाओं पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं. 

सोना-डॉलर में होगी जमकर खरीदारी
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सपर्ट्स का कहना है कि बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिम से सोने में जमकर खरीदारी (Gold Demand) देखी जा सकती है और संभावित रूप से अमेरिकी ट्रेजरी की मांग में इजाफा हो सकता है, जिसमें तेज बिक्री देखने को मिली है. यह इस बात का बड़ा उदाहरण है कि लोगों को अपने पोर्टफोलियो में Gold की जरूरत क्यों है? स्पार्टन कैपिटल सिक्योरिटीज के मुख्य मार्केट इकोनॉमिस्ट पीटर कार्डिलो ने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल के खिलाफ एक आदर्श बचाव है. हालांकि, उन्होंने डॉलर (Dollar) को फायदा होने की बात भी कही है. कार्डिलो के मुताबिक, जब भी अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल होती है, तो डॉलर मजबूत होता है.

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त्योहारी सीजन में भारत पर दिख सकता है असर
भारत में सोने को बड़ा महत्व दिया जाता है. जहां लोग इसे ज्वैलरी के रूप में पसंद करते हैं, तो दूसरी ओर इसे निवेश का भी सबसे अच्छा विकल्प मानते हैं. आमतौर पर देखने को मिलता रहा है, जब भी दुनिया भर के शेयर बाजारों (Stock Markets) में भूचाल आता है या फिर कोई अन्य आर्थिक संकट आता है, तो सोने की मांग (Gold Demand) बढ़ जाती है.

अब जबकि भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा आयातक देश है. यह अपनी जरूरत का करीब आधा हिस्सा आयात करता है, मात्रा के लिहाज से देखें तो सालाना करीब 800-900 टन सोने का आयात किया जाता है. ऐसे में देश में इसकी कीमतों पर भी असर देखने को मिल सकता है. रिपोर्ट की मानें तो इजराइल में युद्ध के बाद सोने-चांदी की मांग तेजी से बढ़ती हुई नजर आ रही है. वहीं दूसरी ओर भारत में त्योहारी सीजन शुरू होने वाला है और मांग में तेजी के साथ ही इन इनकी कीमत में भी उछाल दिखाई दे सकता है. 

युद्ध में दूसरे देशों की शिरकत से बढ़ेगी टेंशन?
इजराइल की स्थिति के बारे में एनेक्स वेल्थ मैनेजमेंट के मुख्य अर्थशास्त्री ब्रायन जैकबसेन का कहना है कि यह एक बड़ा मार्केट मूमेंट है या फिर नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि यह संघर्ष कितने समय तक चलता है और क्या दूसरे देश भी इसमें शामिल होते हैं. उन्होंने कहा कि हमास के हमले की ईरान और ईरान के लेबनानी सहयोगियों हिजबुल्लाह ने खुले तौर पर प्रशंसा की है.

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उन्होंने कहा भले ही ईरान द्वारा तेल उत्पादन बढ़ाया जा रहा है, इसके बावजूद तेल की कीमतों पर असर देखने को मिल सकता है. जैकबसेन के मुताबिक, ईरानी तेल उत्पादन बढ़ रहा है, लेकिन अमेरिका के साथ पर्दे के पीछे वे जो प्रगति कर रहे हैं, वह ईरान द्वारा हमास के हमले की प्रशंसा करने और जश्न मनाने से कम हो सकती है. यहां यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सऊदी अरब कैसी प्रतिक्रिया देता है.

ईरान का एक कदम बढ़ा सकता है तेल के दाम
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका एक ऐसा समझौता करने की कोशिश कर रहा है, जिससे इजराइल और सऊदी अरब के बीच संबंध सामान्य हो जाएंगे. वहीं ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में रैपिडन एनर्जी ग्रुप के प्रेजीडेंट और व्हाइट हाउस के पूर्व अधिकारी बॉब मैकनेली ने कहा है कि अगर ये संघर्ष ईरान तक फैलता है, तो फिर तेल की कीमतों पर असर दिखेगा. हालांकि, इसकी संभावना कम है, लेकिन अगर इजराइल किसी भी ईरानी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला करके जवाब देता है, तो कच्चे तेल की कीमतें तुरंत बढ़ जाएंगी.

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