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Japan Hike Interest Rate: 17 साल में पहली बार... जापान को उठाना पड़ा ये कदम, क्या मिल पाएगा वापस ताज?

Japan से हाल ही में दुनिया की तीसरी बड़ी इकोनॉमी का ताज छिना था और ये जर्मनी के सिर पर सजा था. अब जापान में अर्थव्यवस्था (Japan Economy) को बढ़ावा देने के लिए साल 2007 के बाद पहली बार अपनी ब्याज दरों को बढ़ाने का ऐलान किया है.

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जापान में 2007 के बाद पहली बार ब्याज दरों में इजाफा
जापान में 2007 के बाद पहली बार ब्याज दरों में इजाफा

जापान की अर्थव्यवस्था (Japan Economy) का हाल ठीक नहीं है, इसका उदाहरण हाल में देखने को मिला था जबकि देश ने दुनिया में तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी का अपना ताज खो दिया था. Top-3 Economy से बाहर निकलने के बाद अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए जापान ने 17 सालों में पहली बार एक बड़ा फैसला लिया है. जी हां, देश में ब्याज दरों में बढ़ोतरी (Japan Interese Rate Hike) की गई है. बैंक ऑफ जापान ने मॉनेटरी पॉलिसी की बैठक के बाद ये बड़ा ऐलान किया है. 

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2007 के बाद पहली बार बढ़ोतरी
दि न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जापान के केंद्रीय बैंक (Bank of Japan) ने मंगलवार को  सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए बीते 17 वर्षों में पहली बार अपनी ब्याज दरों में इजाफा किया है. केंद्रीय बैंक ने बैठक के बाद लंबे समय से चली आ रहीं नकारात्मक ब्याज दरों को बढ़ाने का ऐलान किया. आखिरी बार जापाना में ब्याज दरों में बढ़ोतरी साल 2007 के फरवरी महीने में की गई थी. 

-0.1 से बढ़कर 0.1 फीसदी हुई ब्याज दर
बैंक ऑफ जापान ने अपनी नीति बैठक में शार्ट टर्म ब्याज दर को ऋणात्मक 0.1 फीसदी से बढ़ाकर 0.1 फीसदी कर दिया है. इस फैसले से अब Japana Interest Rate शून्य से ऊपर किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2016 में बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों को शून्य से नीचे या नकारात्मक दायरे में लाने का कदम उठाया था. 

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यहां ये जानना जरूरी है कि आखिर ये नकारात्मक ब्याज दर होती क्या है, तो बता दें ये मौद्रिक नीति का एक रूप है, जिसमें ब्याज दरें 0% से नीचे रहती हैं. केंद्रीय बैंक और नियामक इस असामान्य नीति का इस्तेमाल तब करते हैं, जब अपस्फीति के मजबूत संकेत होते हैं. नकारात्मक ब्याज दर के माहौल में उधारदाताओं को ब्याज का भुगतान करने के बजाय उधारकर्ताओं को ब्याज दिया जाता है. जापान ही नहीं बल्कि कुछ यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं में केंद्रीय बैंकों ने इसे लागू किया हुआ है. 

2 फीसदी के तय लक्ष्य से ऊपर महंगाई
जापान के केंद्रीय बैंक ने 2 फीसदी मुद्रास्फीति का लक्ष्य तय किया था, जिससे यह संकेत मिलता है कि जापान आखिरकार अपस्फीति की प्रवृत्ति से बच गया है. मुद्रास्फीति के विपरीत अपस्फीति में कीमतें कम होने लगती हैं. Bank Of Japan की चीफ काजुओ उएदा ने इससे पहले कहा था कि अगर देश 2 फीसदी का तय मुद्रास्फीति लक्ष्य के ऊपर रहती है, तो बैंक अपनी नकारात्मक ब्याज दर की समीक्षा करेगा. गौरतलब है कि जापान में मुख्य मुद्रास्फीति (Japan Inflation ) जनवरी में 2.2 फीसदी रही थी.

GDP में गिरावट से फिसली रैंकिंग
महीनेभर पहले ही जापान से दुनिया की तीसरी बड़ी इकोनॉमी (Japan Economy) का ताज छिना था और जर्मनी World Third Largest Economy बन गया था. बीते दो तिमाहियों से जापान के सकल घरेलू उत्पाद (Japan GDP) में गिरावट के चलते उसकी रैंकिंग पर असर पड़ा था. इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर के मुकाबले येन की वैल्यू गिरने से भी स्थिति खराब हुई है. Japan GDP अब 4.2 ट्रिलियन डॉलर पर आ गई थी, जबकि इसे पछाड़ते हुए नंबर-3 पायदान पर पहुंचे जर्मनी की जीडीपी का साइज 4.5 ट्रिलियल डॉलर हो गया था. 

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