बड़ी उम्मीद के साथ निवेशकों ने LIC के आईपीओ (IPO) में पैसे लगाए थे. खासकर LIC पॉलिसीहोल्डर्स को कंपनी पर भरोसा था, क्योंकि LIC देश की सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी है. मजबूत कारोबार है और सरकार का साथ है. लेकिन LIC के शेयरों ने निवेशकों को ऐसा झटका दिया है, जिससे जल्द उबरना मुश्किल है.
दरअसल, लिस्टिंग के दिन से ही LIC के शेयरों में गिरावट जारी है. यह गिरावट कहां जाकर थमेगी, किसी को पता नहीं है. मंगलवार को शेयरों गिरावट का एक नया रिकॉर्ड बना दिया, यानी ऑल टाइम लो बना दिया. LIC के शेयर BSE पर 3 फीसदी से ज्यादा गिरकर 752.30 रुपये को छुआ.
लिस्टिंग के दिन से ही गिरावट जारी
LIC के शेयरों की लिस्टिंग 17 मई को हुई थी. LIC के शेयर अपने IPO के इश्यू प्राइस से 20% से ज्यादा टूट चुका है. अभी कंपनी का एमकैप (LIC MCap) 4.77 लाख करोड़ रुपये है.
बता दें, अब तक LIC के आईपीओ में निवेश करने वालों को बड़ा नुकसान हो चुका है. LIC आईपीओ के लिए 902-949 रुपये का प्राइस बैंड तय किया गया था. LIC IPO के अपर प्राइस बैंड 949 रुपये था. उस हिसाब से निवेशकों को करीब 197 रुपये प्रति शेयर नुकसान हो रहा है. कंपनी का शेयर बाजार में करीब 9 फीसदी के डिस्काउंट के साथ लिस्ट हुआ था.
एलआईसी के आईपीओ का साइज (LIC IPO Size) 20,557 करोड़ रुपये था और इसे 2.95 गुना सब्सक्राइब किया गया था. लिस्टिंग के बाद से इसके भाव में लगातार गिरावट देखी जा रही है, जबकि देश के तमाम ब्रोकरेज हाउस ने इस आईपीओ में निवेश की सलाह दी थी.
लगभग सभी ब्रोकरेज ने दी थी निवेश की सलाह
अब निवेशकों के मन में सवाल दौड़ रहा है कि एक सुर में 17 बड़े ब्रोकरेज फर्म ने LIC के IPO में निवेश की सलाह किस आधार पर दी थी, क्या पैमाना था? Angel Broking, Hem Securities, IIFL Securities, Jefferies Group, Motilal Oswal, Nirmal Bang, Religare Broking Limited समेत 17 ब्रोकरेज ने LIC के IPO में Apply की रेटिंग दी थी.
इस बीच कंपनी के मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई है. वित्त वर्ष 2021-22 की चौथी तिमाही में LIC का शुद्ध मुनाफा (Net Profit) 18% घटकर 2372 करोड़ रुपये रहा है. जबकि Life Insurance Corporation of India (LIC) को समान तिमाही में पिछले साल कुल 2,893 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ था. वहीं कंपनी को FY22 की चौथी तिमाही में नेट प्रीमियम आय (Net Premium Income) बढ़कर 1.44 लाख करोड़ रुपये हो गई है, जो कि समान तिमाही में पिछले साल 1.22 लाख करोड़ रुपये थी.