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Survey on Digital Currency: क्रिप्टोकरेंसी पर कितना विश्वास करते हैं भारतीय?

सर्वे (Survey) में सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है, हर दूसरा भारतीय क्रिप्टोकरेंसी के पक्ष में नहीं है. यानी आधी आबादी चाहती है कि देश डिजिटल मुद्रा (Digital Currency) को वैध बनाया जाए. सर्वेक्षण में शामिल 76 फीसदी लोग चाहते हैं कि क्रिप्टोकरेंसी को लेकर तब देश में रोक हो, जब तक कि इसपर नियामक स्पष्टता न हो. 

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क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सर्वे
क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सर्वे
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 54 फीसदी भारतीय क्रिप्टोकरेंसी के पक्ष में नहीं 
  • 51 फीसदी लोग भारतीय डिजिटल मुद्रा के पक्ष में

क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) की देश में खूब चर्चा हो रही है. सरकार भी इस मसले को लेकर गंभीर है. पिछले कुछ हफ्तों से क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सरकार कई बैठकें कर चुकी हैं. इस बीच LocalCircles का एक सर्वे सामने आया है, जिसमें क्रिप्टोकरेंसी को लेकर देशवासियों की राय जानने की कोशिश की गई है. 

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दरअसल, सर्वे (Survey) में सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है, हर दूसरा भारतीय क्रिप्टोकरेंसी के पक्ष में नहीं है. यानी आधी आबादी चाहती है कि देश डिजिटल मुद्रा (Digital Currency) को वैध बनाया जाए. सर्वेक्षण में शामिल 76 फीसदी लोग चाहते हैं कि क्रिप्टोकरेंसी को लेकर तब देश में रोक हो, जब तक कि इसपर नियामक स्पष्टता न हो. 

54 फीसदी भारतीय क्रिप्टोकरेंसी के पक्ष में नहीं 
 
सर्वेक्षण में आगे कहा गया है कि फिलहाल 71 फीसदी भारतीयों का अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टोकरेंसी पर बिल्कुल भरोसा नहीं है. जबकि 51 फीसदी लोग चाहते हैं कि भारत सरकार अपनी डिजिटल मुद्रा को लॉन्च करे. वहीं 54 फीसदी भारतीय चाहते हैं कि सरकार क्रिप्टोकरेंसी को वैध ना करे. लेकिन उसपर टैक्स विदेशी डिजिटल संपत्ति की तरह ही लगाया जाए. जबकि 26 फीसदी लोग क्रिप्टोकरेंसी को अपनाने के पक्ष में हैं, और उनका कहना है कि इस वैध कर दिया जाए. और फिर उसपर टैक्स लगाया जाए. 

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सर्वेक्षण में यह भी पता चला है कि 87 फीसदी भारतीय परिवार क्रिप्टो में ट्रेडिंग या निवेश नहीं करता है, जबकि सर्वेक्षण में शामिल 74 प्रतिशत लोगों का कहना था कि क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े विज्ञापनों में जोखिमों के बारे में नहीं बताया जाता है. 

क्रिप्टोकरेंसी पर बिल लाने की तैयारी 

दरअसल, केंद्र सरकार क्रिप्टोकरेंसी को लेकर शीतलाकीन सत्र में एक बिल पेश करने की तैयारी में है. पिछले दिनों आरबीआई ने क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अपनी चिंता जाहिर की थी, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में इस मुद्दे को लेकर एक बैठक हुई. जिसमें तमाम बिंदुओं पर चर्चा हुई.  

क्रिप्टोकरेंसी पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का दावा है कि भारत का डिजिटल मुद्रा बाजार अप्रैल-2020 में 923 मिलियन डॉलर का था, जो अप्रैल 2021 में बढ़कर करीब 6.6 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया. हालांकि, आरबीआई गवर्नर के शक्तिकांत दास ने कहना है कि भले ही देश में क्रिप्टोकरेंसी की तरफ लोगों का झुकाव बढ़ा है. लेकिन अभी भी करीब 70-80 फीसदी भारतीय क्रिप्टोकरेंसी में केवल 500 रुपये से 1000 रुपये ही निवेश किया है.

क्रिप्टोकरेंसी को लेकर लोकलसर्किल (LocalCircles) ने पिछले 15 दिनों में ये सर्व किया है. इस सर्वे में 342 जिलों के कुल 56,000 लोगों के विचारों को शामिल किया गया है. सर्वे में 66 फीसदी पुरुष और 34 फीसदी महिलाओं की राय ली गई. इस सर्वे का मकसद यह था कि पता लगाया जा सके कि भारतीयों का क्रिप्टोकरेंसी में कितना विश्वास है.

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