केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Modi Govt) ने नया वित्त वर्ष शुरू होने से पहले भविष्य निधि संगठन (EPFO) सब्सक्राइबर्स को बड़ा तोहफा दिया है. मंगलवार को संगठन ने EPF पर मिलने वाली ब्याज दर को 8.10 से बढ़ाकर 8.15 फीसदी कर दिया है. यानी अब पीएफ अकाउंट में जमा होने वाली रकम पर ज्यादा ब्याज मिलेगा. इससे पहले हाल ही में मोदी सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों को 4% DA Hike का तोहफा दिया था.
चुनाव से पहले सरकार का तोहफा
अगले साल यानी 2024 में देश में आम चुनाव होने वाले हैं और इससे पहले नरेंद्र मोदी सरकार देश के पेशेवर लोगों के लिए तोहफों की झड़ी लगा दी है. पहले डीए हाइक और फिर पीएफ पर मिलने वाले ब्याज में बढ़ोतरी का फैसला. बता दें EPFO ने 2021-22 के लिए ईपीएफ पर ब्याज दर 8.5 फीसदी से घटाकर 8.1 फीसदी कर दी थी, जो कि बीते 40 साल में सबसे न्यूनतम ब्याज दर थी. साल 1977-78 में ब्याज दर 8 फीसदी थी. इसके बाद से हमेशा ये 8.25 फीसदी से ऊपर ही रही.
ये है ब्याज में इजाफे पूरा गणित
ईपीएफओ द्वारा ब्याज दरों में की गई ये बढ़ोतरी हालांकि, बहुत ज्यादा नहीं है. इसमें महज 0.05 फीसदी का इजाफा किया गया है, लेकिन ये बढ़ोतरी भी देश के साढ़े छह करोड़ पीएफ अकाउंट होल्डर्स को राहत देने वाली है. अगर पीएफ पर मिलने वाले ब्याज के गणित को देखें, तो कर्मचारी हर महीने अपने मूल वेतन और महंगाई भत्ते का 12% योगदान करता है.
कंपनी/नियोक्ता भी कर्मचारी के अकाउंट में 12% का ही योगदान करता है. इस योगदान का 8.33% हिस्सा EPS में और 3.67% हिस्सा EPF में जाता है. EPF Account में जमा होने वाली इस राशि पर ब्याज मिलता है. एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के मुताबिक, न्यूनतम सैलरी के आधार पर देखें तो 15,000 रुपये पर पहले 8.10% की ब्याज दर के हिसाब से सालाना 1,215 रुपये Interest बनता था. वहीं अब इसमें जो 0.05 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है, तो इस हिसाब से ब्याज की रकम बढ़कर 8.15% के हिसाब से 1222.50 रुपये हो जाती है.
बात करें किसी भी कर्मचारी के अकाउंट में कुल जमा पर मिलने वाले ब्याज की. तो मानकर चलते हैं कि किसी कर्मचारी के PF Account में 1 लाख रुपये जमा हैं, तो उसे सालाना 8.15 फीसदी की दर से 8,150 रुपये ब्याज बनता है. पहले ये 8,100 रुपये बनता था यानी इसमें 50 रुपये का इजाफा होगा.
EPF की ब्याज दरों पर एक नजर
अगर बीते कुछ सालों में पीएफ जमा पर मिलने वाली ब्याज दरों पर नजर डालें तो साल 2005 से लेकर 2010 तक ये 8.50%, 2010-11 में 9.50%, 2012-13 में 8.50% और 2013-14 और 2014-15 में ब्याज दर 8.75% थी. इसके बाद
2015-16 में 8.80%, 2016-17 में 8.65%, 2017-18 में 8.55%, 2018-19 में 8.65% रही. फिर 2019-20 और 2020-21 में इसे 8.50% किया गया था, जबकि 2021-22 में ये चार दशक के निचले स्तर 8.10% पर पहुंच गई.