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केवल महिलाएं चलाती हैं ये पोस्ट ऑफिस, 1700 से ज्यादा सेक्स वर्कर को यहां से मिला Aadhaar

मुंबई का कमाठीपुरा इलाका, यहां काम करने वाली सेक्स वर्कर्स सालों से अपनी पहचान के लिए जद्दोजहद कर रही हैं. लेकिन यहां एक डाकघर (Post Office) है, जिसे सिर्फ महिलाएं चलाती हैं. ये डाकघर इन सेक्स वर्कर्स के लिए वरदान साबित हुआ है.

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केवल महिलाएं चलाती हैं ये पोस्ट ऑफिस
केवल महिलाएं चलाती हैं ये पोस्ट ऑफिस
स्टोरी हाइलाइट्स
  • रंग लाई भारतीय डाक की मुहिम
  • चलाया जागरुकता अभियान भी
  • खुले सेक्स वर्कर्स के बैंक खाते

हाल में आलिया भट्ट की फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ में मुंबई के कमाठीपुरा इलाके की कहानी को दिखाया गया. भले ये फिल्म 60 के दशक की कहानी कहती हो, लेकिन यहां काम करने वाली सेक्स वर्कर्स के हालात बहुत ज्यादा नहीं बदले हैं. ये सेक्स वर्कर समाज का वह वंचित हिस्सा है जिसे अभी भी सभ्य समाज ने अपनाया नहीं है. मुंबई के इस इलाके में हजारों महिलाएं सालों से बसी हैं, वहीं इस इलाके में रहने वाले लोग सालों से अपनी पहचान के लिए जद्दोजहद भी कर रहे हैं.

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रंग लाई भारतीय डाक की मुहिम
पहचान के इसी संकट को दूर करने का बीड़ा उठाया भारतीय डाक ने, यहां एक पोस्ट ऑफिस खोला गया जिसमें सिर्फ महिलाएं काम करती हैं. यही पोस्ट ऑफिस इस इलाके में रहने वाले लोगों के लिए वरदान साबित हुआ. पोस्ट ऑफिस ने यहां के लोगों की जिंदगी को थोड़ा आसान करने के लिए एक मुहिम शुरू की.

दरअसल, यहां रहने वाली ना जाने कितनी ही ऐसी सेक्स वर्कर हैं जिनके पास अपना पहचान पत्र भी नहीं है. ऐसे में इन लोगों को ना तो किसी सरकारी योजना का लाभ मिल पाता है और ना ही कोई सुविधा मिलती है. इन सभी को अपना जीवन कई दिक्कतों के साथ गुजारना पड़ता है. लेकिन कमाठीपुरा इलाके में जब से यह पोस्ट ऑफिस खुला है तब से हजारों सेक्स वर्कर्स की पहचान पत्र की समस्या खत्म हुई है.

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मिला आधार, खुले बैंक में खाते
कमाठीपुरा के इस पोस्ट ऑफिस ने अब तक 1700 से ज्यादा सेक्स वर्कर को उनका आधार पहचान पत्र दिया है. इतना ही नहीं इन महिलाओं का बैंक सेविंग अकाउंट भी खोला गया है. करीब 75 महिलाओं के बैंक सेविंग अकाउंट भी खोले गए हैं. वहीं इस पोस्ट ऑफिस की एक और खास बात यह भी है की यहां पर सेक्स वर्कर और उनके बच्चों के लिए अलग-अलग जागरुकता अभियान भी चलाए जाते हैं. 

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