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NPS Tier1 Vs Tier2: पाना चाहते हैं अतिरिक्त Tax छूट, एनपीएस अकाउंट खुलवाते वक्त चुनें ये विकल्प

नेशनल पेंशन स्कीम में दो तरह के अकाउंट खुलते हैं. पहले प्रकार के अकाउंट को एनपीएस टिअर-1 (NPS Tier-1) के नाम से जाना जाता है, जबकि दूसरे प्रकार के अकाउंट को एनपीएस टिअर-2 (NPS Tier-2) कहा जाता है. इन दोनों के बीच कुछ बड़े अंतर भी हैं. आइए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं...

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एनपीएस के दोनों अकाउंट में कई अंतर
एनपीएस के दोनों अकाउंट में कई अंतर

रिटायरमेंट (Retirement Planning) के हिसाब से फाइनेंशियल प्लानिंग (Financial Planning) करने वाले लोगों के लिए नेशनल पेंशन स्कीम (National Pension Scheme) काफी महत्वपूर्ण योजना है. इस स्कीम में पैसे लगाने के कई फायदे हैं. सबसे पहली बात कि इसे केंद्र सरकार बैक करती है. इसके अलावा इनकम टैक्स से छूट (Income Tax Deductions), जमा और निकासी को लेकर कई विकल्प आदि इस स्कीम को आकर्षक बना देते हैं. एनपीएस से जुड़ी कई अन्य बातें भी हैं, जिन्हें इसमें अकाउंट खुलवाने से पहले जान लेना जरूरी है. एनपीएस खाता खुलवाते समय जरा सी असावधानी आपको टैक्स से मिलने वाली छूट के लाभ से वंचित करा सकती है. आज हम आपको एनपीएस से जुड़ी ऐसी ही कुछ बातें बताने जा रहे हैं, जिन्हें जान लेने के बाद आपको फैसला करने में आसानी होगी.

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NPS Tier1 और NPS Tier2 में कई समानताएं

सबसे पहले आपको बता दें कि नेशनल पेंशन स्कीम में दो तरह के अकाउंट खुलते हैं. पहले प्रकार के अकाउंट को एनपीएस टिअर-1 (NPS Tier-1) के नाम से जाना जाता है, जबकि दूसरे प्रकार के अकाउंट को एनपीएस टिअर-2 (NPS Tier-2) कहा जाता है. यूं तो दोनों तरह के अकाउंट में कई तरह की समानताएं हैं, लेकिन इन दोनों के बीच कुछ बड़े अंतर भी हैं. दोनों तरह के अकाउंट के अपने फायदे और अपने नुकसान हैं. दोनों की संरचना एक जैसी है. दोनों तरह के अकाउंट में चार्जेज और फंड स्कीम के विकल्प लगभग एक समान हैं. आइए अब जानते हैं कि एनपीएस के टिअर-1 और टिअर-2 अकाउंट (NPS Tier1 Vs Tier2) में क्या अंतर हैं...

रिटायरमेंट के हिसाब से टिअर-1 अकाउंट बेहतर

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टैक्स एंड इन्वेस्टमेंट एक्सपर्ट बलवंत जैन (Tax & Investment Expert Balwant Jain) बताते हैं कि अगर कोई एनपीएस के फायदे पाना चाहता है, तो उसके लिए टिअर-1 अकाउंट ही विकल्प है. टिअर-1 अकाउंट मुख्य तौर पर उन लोगों के लिए है, जिनका पीएफ जमा नहीं होता है और वह रिटायरमेंट के बाद फाइनेंशियल सिक्योरिटी (Financial Security) चाहते हैं. इस प्रकार के अकाउंट यानी एनपीएस टिअर-1 को रिटायरमेंट के हिसाब से ही तैयार किया गया है. इसमें आप न्यूनतम 500 रुपये जमा कर अकाउंट खुलवा सकते हैं. रिटायरमेंट के बाद आप एक बार में 60 फीसदी तक रकम निकाल सकते हैं. बाकी 40 फीसदी रकम से एन्यूटीज (Annuties) खरीदी जाएंगी, जो मंथली पेंशन (Monthly Pension) के रूप में नियमित आय का साधन सुनिश्चित करता है.

बिना टिअर-1 के नहीं खुलेगा टिअर-2 अकाउंट

जैन बताते हैं, टिअर-1 और टिअर-2 अकाउंट में सबसे बड़ा अंतर है कि टिअर-2 अकाउंट खुलवाने के लिए टिअर-1 अकाउंट का होना जरूरी है. आप बिना टिअर-1 अकाउंट खुलवाए एनपीएस टिअर-2 अकाउंट नहीं खुलवा सकते हैं. एनपीएस टिअर-2 अकाउंट एक तरह से सेविंग अकाउंट (Saving Account) की तरह है. इसमें आप कभी भी अपने हिसाब से पैसे जमा करा सकते हैं और अपनी जरूरत के हिसाब से निकाल सकते हैं. आप चाहें तो एक ही बार में पूरी रकम भी निकाल सकते हैं. इसे न्यूनतम 1000 रुपये देकर खुलवाया जा सकता है. एनपीएस टिअर-1 में हर साल कम -से-कम एक बार पैसे जमा करना जरूरी है, जबकि टिअर-2 में यह बाध्यता नहीं होती है.

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कंट्रीब्यूशन पर इनकम टैक्स छूट में ये फर्क

दोनों प्रकार के एनपीएस अकाउंट में एक और बड़ा फर्क इनकम टैक्स से मिलने वाली छूट (Income Tax Benefits) है. एनपीएस टिअर-1 अकाउंट के मामले में अकाउंट होल्डर को इनकम टैक्स एक्ट 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक और 80सीसीडी (1बी) के तहत 50 हजार रुपये के टैक्स डिडक्शन का लाभ मिलता है.

वहीं टिअर-2 अकाउंट के मामले में इस तरह का कोई लाभ नहीं मिलता है. साल 2019 से इसमें कुछ बदलाव भी किए गए, लेकिन अब भी सिर्फ केंद्र सरकार के कर्मचारी ही एनपीएस टिअर-2 अकाउंट पर टैक्स लाभ उठा सकते हैं. हालांकि उनके लिए भी एक शर्त यह है कि टैक्स छूट का लाभ उठाने के लिए 03 साल का लॉक-इन पीरियड लग जाएगा.

एनपीएस-2 से निकाली कई रकम भी टैक्सेबल

यह बात हो गई कंट्रीब्यूशन की, अब दोनों मामलों में विदड्रॉअल को भी जान लेते हैं. एनपीएस टिअर-1 अकाउंट से निकासी कई गई पूरी रकम को टैक्स से छूट मिलती है. वहीं अगर आपने टिअर-2 अकाउंट से पैसे निकाले, तो निकाली गई रकम को टैक्सेबल इनकम (Taxable Income) माना जाएगा. इस इनकम पर आपको आपके स्लैब के हिसाब से इनकम टैक्स का भुगतान करना होगा.

 

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