भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी बिकवाली का दौर देखने को मिल रहा है, जिससे निवेशकों में हड़कंप मच गया है. निफ्टी-50 अपने 22,800 अंक के अहम सपोर्ट लेवल को तोड़कर नीचे आ गया है. बाजार में आई इस तेज गिरावट ने निवेशकों को मार्च 2026 की याद दिला दी है, जब अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते युद्ध और मिसाइल हमलों के चलते निफ्टी इसी निचले स्तर पर आ फिसला था. ठीक 6 महीने बाद बाजार एक बार फिर उसी गंभीर मोड़ पर खड़ा नजर आ रहा है.
दरअसल, सोमवार को कारोबार के दौरान निफ्टी 350 अंक से ज्यादा टूटकर 22,785.55 तक पहुंच गया है, एक्सपर्ट्स की मानें तो निफ्टी का 22800 का सपोर्ट टूटना बाजार के लिए अच्छा संकेत नहीं है. सेंसेक्स भी 1100 अंकों से ज्यादा टूट गया है.
कच्चे तेल ने बिगाड़ा खेल
बाजार में इस भारी बिकवाली और कोहराम के पीछे पश्चिम एशिया में दोबारा भड़का भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उछाल और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की चौतरफा बिकवाली को मुख्य वजह माना जा रहा है. क्रूड ऑयल महंगा होने से भारत के आयात बिल और महंगाई दर पर दबाव बढ़ने की आशंका गहरा गई है. ब्रेंट क्रूड का भाव चढ़कर 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है.
इससे भारत के महंगे तेल आयात, महंगाई और कंपनियों के मुनाफे को लेकर चिंता बढ़ी है. विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर वैश्विक संकेतों ने भी सेंटीमेंट पर दबाव बढ़ाया है. जिससे निफ्टी ने मजबूत 22,800 का सपोर्ट तोड़ दिया है.
विश्लेषकों के मुताबिक, 22,800 का अहम सपोर्ट स्तर टूटने के बाद बाजार में तकनीकी मंदी और गहरी हो सकती है. बैंकिंग, ऑटो और स्मॉल-मिडकैप सेक्टर्स में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है. अनिश्चितता के इस दौर में एक्सपर्ट्स रिटेल निवेशकों को जल्दबाजी में खरीदारी करने के बजाय सतर्क रहने और बाजार में स्थिरता आने का इंतजार करने की सलाह दे रहे हैं.
बाजार में इस गिरावट की तुलना मार्च 2026 की भारी बिकवाली से की जा रही है. 23 मार्च को अमेरिकी-ईरान तनाव और युद्ध की आशंकाओं के बीच निफ्टी करीब 2.5 फीसदी टूटकर 22,506 तक पहुंच गया था. उस समय बढ़ते कच्चे तेल के दाम, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और भू-राजनीतिक तनाव ने बाजार का माहौल बिगाड़ दिया था.
सूखे से महाराष्ट्र बेहाल
वैसे सोमवार को महाराष्ट्र से आई सूखे की रिपोर्ट ने बाजार को सबसे बड़ा झटका दिया है. महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की 358 में से 265 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है, जिससे राज्य का लगभग 74% हिस्सा प्रभावित क्षेत्र के दायरे में आ गया है. मानसून के दौरान 21 दिनों से अधिक बारिश न होने (ट्रिगर-1 मानदंड) और खरीफ फसलों के भारी नुकसान को देखते हुए यह फैसला लिया गया है. महाराष्ट्र में सोयाबीन, अरहर, मूंग, उड़द, गन्ना, प्याज, हरी मिर्च, टमाटर और कपास की पैदावार सबसे ज्यादा होती हैं. सूखे के दौरान हरा चारा और पानी की भारी किल्लत हो सकती है, जिससे मवेशियों के लिए चारा महंगा होने का डर है.