हॉस्पिटैलिटी टेक स्टार्ट-अप OYO के IPO में देरी हो सकती है. कंपनी शेयर बाजार में एंट्री के लिए प्लान पर काम कर रही है. लेकिन इसके IPO के आने में तीन महीने की देरी हो सकती है. बिजनेस टुडे में एक सूत्र के हवाले से छपी खबर के अनुसार, बाजार नियामक सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने OYO से इसके ड्राफ्ट रेड हियरिंग प्रॉस्पेक्ट्स में अतिरिक्त जानकारी देने के लिए कहा है. इसमें रिस्क फैक्टर्स, प्रदर्शन और वैल्यूएशन की जानकारी को अपडेट करने के लिए कहा गया है. इस वजह से मार्केट में लिस्ट होने के कंपनी के प्लान पर कुछ समय के लिए ब्रेक लग सकता है.
तीन महीने की हो सकती है देरी
सूत्र ने कहा, 'इससे OYO की प्रस्तावित आईपीओ योजना में लगभग तीन महीने की देरी होगी. क्योंकि डीआरएचपी को अपडेट करने और फाइलिंग को अपडेट करने में अतिरिक्त समय लगेगा.' रितेश अग्रवाल की अगुआई वाली कंपनी को 'प्री-आईपीओ स्टेज में कोई नई जानकारियां प्रदान करने दी जरूरत है. फिलहाल कंपनी ने इस पर किसी भी तरह का बयान देने से इंकार कर दिया है.
अतिरिक्त जानकारी एकत्र करने और जमा करने के प्रोसेस में कम से कम एक तिमाही का समय लगेगा. इस वजह से आईपीओ की लॉन्चिंग में देरी होगी. पहले उम्मीद जताई गई थी कि OYO के आईपीओ को फरवरी के दूसरे हफ्ते में सेबी से अनुमति मिल जाएगी. लेकिन फिलहाल ऐसा होता हुआ नजर नहीं आ रहा है.
रिपोर्ट के अनुसार, सेबी ने OYO को भेजे लेटर में कहा है कि कंपनी ने जिस तरह से मुनाफा और रेवेन्यू को जोड़ा है. उसी तरह अपने रिस्क फैक्टर्स को भी ऑफर प्राइस आधार पर दिखाना चाहिए.
मुश्किल समय के बाद शुरू किया प्लान
COVID-19 महामारी के कारण दो वर्षों के मुश्किल समय के बाद कंपनी ने इस साल शेयर बाजार में लिस्टिंग के लिए अपने प्लान पर फिर से काम करना शुरू किया है. हाल ही में कंपनी ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने वित्तीय रिजल्ट की भी घोषणा की थी. इसमें FY23 के H1 में उसका राजस्व 24 प्रतिशत बढ़कर 2,905 करोड़ रुपये हुआ था. इस दौरान OYO ने अपने ग्रॉस बुकिंग वैल्यू (GBV) में 69 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की. GBV वह मंथली राजस्व है जो कंपनी प्रति होटल कमाती है.
दूसरी तिमाही में कंपनी का प्रदर्शन
हालांकि, OYO ने FY23 की दूसरी तिमाही में 333 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा भी दर्ज किया था. OYO को रितेश अग्रवाल ने 2012 में लॉन्च किया था. ओयो को माइक्रोसॉफ्ट, सॉफ्टबैंक विजन फंड, लाइट्सपीड वेंचर पार्टनर्स, सिकोइया कैपिटल इंडिया और अन्य से समर्थन हासिल है.