मोबाइल ब्रॉडबैंड (Mobile Broadband) के साथ इंटरनेट का एक्सेस (Internet Access) सहज होने और किफायती एंड्रॉयड फोन (Android Phone) के प्रसार से कई चीजें आसान हो गई हैं. हालांकि इस डिजिटलीकरण ने इसके साथ ही कुछ चीजों को मुश्किल भी बना दिया है. खासकर इंटरनेट व सोशल मीडिया (Social Media) फर्जी खबरें (Fake News) और गलत सूचनाएं फैलाने का हथियार बन गए हैं. सरकार इनके प्रति लोगों को अवेयर करने के लिए वायरल मैसेजेज का अक्सर फैक्टचेक करती है. एक ऐसे ही फैक्टचेक में पीआईबी ने बताया है कि साइबर स्वच्छता केंद्र (Cyber Swachhta Kendra) को लेकर वायरल हो रहा मैसेज सही है और सरकार ने लोगों की सुरक्षा के लिए वास्तव में इसकी शुरुआत की है.
एक हालिया वायरल मैसेज में बताया जा रहा था कि साइबर स्वच्छता केंद्र भारत सरकार का एक बॉटनेट क्लीनिंग सेंटर (Botnet Cleaning Centre) है. इसे इंडियन कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) के द्वारा csk.gov.in के तहत भारत सरकार की एक मुहिम के तौर पर चलाया जा रहा है. इस वायरल मैसेज को लेकर एक यूजर ने पीआईबी से पूछा कि क्या यह वाकई में सही सरकारी साइट है. पीआईबी फैक्टचेक (PIB Fact Check) ने इसी पर स्थिति को साफ करने का प्रयास किया.
पीआईबी फैक्टचेक ने इस संबंध में एक Tweet कर बताया, 'हां, भारत सरकार ने नेटवर्क और सिस्टम पर असर डालने वाले मालवेयर व बॉटनेट का एनालिसिस करने के लिए साइबर स्वच्छता केंद्र की शुरुआत की है. यह भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के डिजिटल इंडिया इनिशिएटिव का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य बॉटनेट के संक्रमण की पहचान कर सुरक्षित साइबरस्पेस तैयार करना है.'
इससे पहले पीआईबी फैक्टचेक ने एटीएम से पैसे (ATM Withdrawal) निकालने के संबंध में आरबीआई (RBI) का हवाला देकर वायरल हो रहे एक मैसेज का खंडन किया. उक्त मैसेज में आरबीआई के हवाले से दावा किया गया कि अगर किसी ट्रांजेक्शन से पहले दो बार कैंसल बटन दबाने से पिन की चोरी से बचा जा सकता है. पीआईबी फैक्टचेक ने इसका खंडन किया और कहा कि यह फेक स्टेटमेंट है. आरबीआई ने ऐसा कोई स्टेटमेंट नहीं दिया है. सुरक्षा के लिए हमेशा प्राइवेसी में ही एटीएम से कोई ट्रांजेक्शन करें. कभी भी कार्ड पर एटीएम का पिन नहीं लिखें.