प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने चालू वित्त वर्ष के दौरान बेहतर मानसून की बदौलत कृषि क्षेत्र की वृद्धि 4.8 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया है.
वर्ष 2013-14 के आर्थिक परिदृश्य पर जारी रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष मानसून की स्थिति बेहतर रहने से अनाज, दलहन और कपास का रिकार्ड उत्पादन होने का उम्मीद है. परिषद ने कहा है कि कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन अच्छा रहने से इसका खाद्य मुद्रास्फीति पर भी अनुकूल असर पड़ेगा. हालांकि, रुपये का भाव गिरने की वजह से मुद्रास्फीति पर दबाव बना रहेगा.
रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डॉ. रंगराजन की अध्यक्षता वाली प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने जारी रिपोर्ट में खेती और इसकी बाजार नीति में सुधार पर जोर दिया है. रिपोर्ट में कृषि उत्पाद विपणन समिति अधिनियम :एपीएमसी एक्ट: में भी उचित संशोधन की सिफारिश की गई है.
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘साल 2013-14 में कृषि क्षेत्र की वृद्धि 4.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जो कि 2012-13 में 1.9 प्रतिशत थी. जल्दी और अच्छे मानसून का बुवाई गतिविधियों पर अच्छा असर रहा है, इसलिए खरीफ और रबी दोनों ही फसलें अच्छी रहने की उम्मीद है.’
परिषद के अनुसार बेहतर मानसून और तालाबों आदि की अच्छी स्थिति को देखते हुए 2013-14 में चावल और गेहूं का अधिक उत्पादन होने का अनुमान है. इस दौरान मोटे अनाज और दलहन उत्पादन भी बेहतर रहने की उम्मीद है.
देश में 2011-12 के दौरान रिकार्ड 25 करोड़ 94 लाख 90 हजार टन अनाज का उत्पादन हुआ. हालांकि, पिछले साल यह मामूली कम रहकर 25 करोड़ 53 लाख 60 हजार टन रह गया.