पिछले साल यस बैंक (Yes Bank) में फर्जीवाड़े के बाद से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बेहद सतर्क है. फिलहाल एक और प्राइवेट बैंक आरबीएल बैंक (RBL Bank) सुर्खियों में है. RBI ने 25 दिसंबर को इस बैंक के MD और CEO रहे विश्ववीर आहूजा को तत्काल छुट्टी पर भेज दिया था, और RBI के चीफ जनरल मैनेजर योगेश दयाल (Yogesh Dayal) को बोर्ड में शामिल कर एडिशनल डायरेक्टर बना दिया था.
दरअसल, बैंक की गतिविधियों को नजर रखने के लिए RBI ने योगेश दयाल को बोर्ड में शामिल किया है. वहीं केंद्रीय बैंक ने राजीव आहूजा को बैंक का अंतरिम मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO नियुक्ति किया है. RBL Bank ने गुरुवार को बताया कि RBI ने राजीव आहूजा को बैंक का अंतरिम मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO नियुक्ति किया गया है.
RBL बैंक में बड़ी गिरावट
RBI ने बताया कि राजीव आहूजा की नियुक्ति 25 दिसंबर 2021 से अगले तीन महीनों के लिए है. जब तक बैंक किसी रेगुलर MD और CEO की नियुक्ति नहीं हो जाती है. बैंक में इस बदलाव से 25 दिसंबर को RBL बैंक के शेयरों (RBL Bank Stock) में भारी गिरावट दर्ज की गई थी. उस दिन शेयरों में 20 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई थी.
लेकिन एक बार फिर गुरुवार को RBL बैंक के शेयरों में 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. इस गिरावट के पीछे एक बड़ी वजह बताई जा रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्राइवेट लेंडर RBL BANK में भारतीय रिजर्व बैंक के अचानक हस्तक्षेप का मुख्य कारण 300 करोड़ रुपये का कर्ज था, जिसे मंजूरी के महज 7 महीने के अंदर बट्टे खाते में डाल दिया गया था.
300 करोड़ का लोन घेरे में
हिंदुस्तान टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि आरबीएल बैंक ने 2018 में एक कंपनी को लोन दिया था. रिपोर्ट के मुताबिक बैंक ने 300 करोड़ रुपये का लोन दिया और उसे महज 7 महीने में ही बैड लोन में बदलकर बट्टे खाते में डाल दिया. यह बैंकों के एक कंसोर्टियम के रूप में दिया गया था.
इसी खबर की वजह से गुरुवार को RBL Bank के शेयर 9.29% गिरकर 130.90 रुपये पर बंद हुआ. यही नहीं, बैंक के शेयर गुरुवार को एक साल के न्यूनतम स्तर पर भी पहुंच गया. एक महीने में यह स्टॉक 31 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है. हालांकि RBL Bank ने यह भी साफ कर दिया है कि इन बदलावों से बैंक के फंडामेंटल्स पर कोई असर नहीं पड़ेगा. साथ ही आरबीआई का कहना है कि बैंक के वित्तीय स्थिति अच्छी है और इसके पास पर्याप्त पूंजी है.