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इन 5 कंपनियों की संपत्तियां होंगी नीलाम, सस्ते में घर-ऑफिस खरीदने का मौका!

SEBI के मुताबिक नीलाम की जाने वाली सभी संपत्तियां पश्चिम बंगाल (West Bengal) में है. जिन 20 संपत्तियों की नीलामी की जानी है, उनमें जमीन के टुकड़े, कई मंजिला इमारतें, ऑफिस, एक कमर्शियल प्लेस और एक फ्लैट शामिल हैं.

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कंपनियों के खिलाफ शिकंजा
कंपनियों के खिलाफ शिकंजा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • क्विकर रियल्टी की मदद से संपत्तियों की नीलामी
  • नीलाम होने वाली सभी संपत्तियां पश्चिम बंगाल

निवेशकों के पैसे डकारने के मामले में देश की 5 कंपनियों की संपत्तियां नीलाम होने जा रही हैं. दरअसल, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) निवेशकों का पैसा वसूलने के लिए 30 जून को MPS ग्रुप (MPS Group), विबग्योर ग्रुप (Vibgyor Group), प्रयाग ग्रुप (Prayag Group), पाइलन ग्रुप (Pailan Group) और मल्टीपर्पज बायोस इंडिया ग्रुप (Multipurpose BIOS India Group) की कंपनियों की संपत्तियों (Property) की नीलामी (Auction) करेगा. इनकी नीलामी करीब 64 करोड़ रुपये के आरक्षित मूल्य (Reserve Price) पर की जाएगी. 

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पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक सेबी ने सोमवार को एक नोटिस में कहा कि नीलाम की जाने वाली संपत्तियां पश्चिम बंगाल (West Bengal) में है. जिन 20 संपत्तियों की नीलामी की जानी है, उनमें जमीन के टुकड़े, कई मंजिला इमारतें, एक ऑफिस, एक कमर्शियल प्लेस और एक फ्लैट शामिल हैं. 

संपत्तियों की ऑनलाइन नीलामी

इन संपत्तियों की बिक्री के लिए बोलियां आमंत्रित करते हुए सेबी ने कहा कि संपत्तियों की नीलामी 30 जून को सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे के बीच ऑनलाइन (Online) की जाएगी. नोटिस के मुताबिक इन संपत्तियों का कुल आरक्षित मूल्य लगभग 64 करोड़ रुपये आंका गया है. SEBI ने क्विकर रियल्टी (Quikr Realty) को संपत्तियों की बिक्री में सहायता के लिए नियुक्त किया गया है.

नियामक ने कहा कि बोलीदाताओं को अपनी बोलियां जमा करने से इन संपत्तियों की स्वतंत्र रूप से खुद जांच करनी चाहिए. नोटिस में कहा गया है, 'इन संपत्तियों की नीलामी सभी मौजूदा और भविष्य की देयता के साथ की जाएगी. सेबी किसी भी तीसरे पक्ष के दावों/अधिकारों/बकाया के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.'

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इन कंपनियों पर शिकंजा

गौरतलब है कि निवेशकों का पैसा ब्याज सहित वापस न करने पर सेबी पहले ही इन कंपनियों कुछ संपत्तियों को कुर्क कर चुका है. एपीएस समूह की कंपनियों में एमपीएस ग्रीनरी डेवलपर्स शामिल हैं, जिसने गैरकानूनी सामूहिक निवेश योजनाओं (सीआईएस) के जरिये निवेशकों से 1,520 करोड़ रुपये जुटाए थे. 

वहीं विबग्योर एलाइड इंफ्रास्ट्रक्चर ने साल 2009 में 49,562 निवेशकों से 61.76 करोड़ रुपये जुटाए थे. पेलन ग्रुप ऑफ कंपनीज ने 2010-11 और 2014-15 के बीच 23,685 व्यक्तियों को गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर जारी करके 83.42 करोड़ रुपये जुटाए थे. प्रयाग इन्फोटेक ने 2007-2008 और 2011-12 के बीच रिडीमेबल प्रेफरेंस की पेशकश की थी और 1.57 लाख से अधिक निवेशकों से 131.37 करोड़ रुपये जुटाए थे. इसके अलावा मल्टीपर्पज बायोस ने वित्तीय वर्ष 2007-08 और 2011-12 के दौरान 1460 लोगों से 5.97 करोड़ रुपये जुटाए थे. 

 

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