
महंगाई जमकर तांडव मचा रही है. टमाटर, अदरक, जीरा के बाद अब हरी मिर्च ने भी अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है. कुछ दिन पहले 40 किलो बिकने वाली हरी मिर्च के दाम अचानक डबल हो गए हैं. थोक भाव की बात करें तो थोक में 50 से 75 किलो मिर्ची मंडी में बिक रही है, खुदरा में मिर्च का भाव 80 से 120 किलो तक पहुंच गया है. चेन्नई में हरी मिर्च 200 रुपये किलो हो गई है. वहीं कई शहरों से इससे भी ज्यादा भाव हो गया है.
टमाटर ने स्वाद बिगाड़ा
सबसे पहले टमाटर की बात करते हैं, देश के तमाम शहरों में टमाटर 100 रुपये किलो से ऊपर बना हुआ है. कुछ शहरों में तो भाव 150 रुपये किलो तक पहुंच गया है. एशिया की सबसे बड़ी थोक फल और सब्जी मंडी आजादपुर में सोमवार को टमाटर का थोक भाव 60-120 रुपये किलो था. बारिश के कारण फसल खराब होने और सप्लाई में दिक्कत से दिल्ली-NCR में टमाटर की खुदरा कीमतें 140 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई हैं.
अदरक के भाव भी आसमान पर
वहीं अदरक की कीमत 300 रुपये किलो तक पहुंच गई है. इसके अलावा जीरा 500 रुपये किलो हो गया है. इस बीच मिर्च की कीमत में अचानक तेजी देखी जा रही है. अगर इंदौर की बात करें तो 120 रुपये किलो तक मिर्च का भाव पहुंच गया है. व्यापारियों के मुताबिक फसल खराब होने से हरी मिर्ची की आवक मंडी में कम हो गई है.
अभी मध्य प्रदेश के बड़वानी ओर गुजरात से मिर्ची आ रही है. मध्य प्रदेश में मिर्ची की फसल खराब होने के चलते गुजरात से हरी मिर्ची की आवक इंदौर में हो रही है, जिससे थोक में भाव 75 रुपये किलो तक हो गया है. थोक व्यापारियों का कहना है कि 2 साल बाद हरी मिर्च के दाम बढ़े हैं. खुदरा दुकानदारों का कहना है कि माल बहुत कम आ रहा है, संभावना ये है कि 40 रुपये पाव भी मिर्च हो सकती है.
कब हो सकती हैं कीमतें कम
हालांकि टमाटर, हरी मिर्च और हरा धनिया तीनों की फसल बारिश के चलते खराब हो गई है. जिसके चलते मंडियों में इनकी आवक भी कम हो गई हैं. व्यापारियों का कहना है कि आने वाले 15 दिनों के बाद इन सब्जियों के दामों में कमी आ सकती है.
दरअसल, टमाटर और मिर्च के बढ़ते भावों ने किचन का बजट बिगाड़ दिया है, खाना बेस्वाद हो गया है. आमतौर पर 10 से 15 रुपये बिकने वाला टमाटर अब 150 रुपये किलो के करीब पहुंच चुका है. हाल-फिलहाल में इसके भाव कम होने के आसार भी नजर नहीं आ रहे हैं, क्योंकि मांग और आपूर्ति में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है.
फसल आने में अभी लगेगा वक्त
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में टमाटर और मिर्च की भरपूर खेती होती है. यहां से दिल्ली, गाजियाबाद जैसे बड़े शहरों में भेजा टमाटर जाता है. लेकिन अभी स्थिति ऐसी है कि खांडवा मंडी एक कैरेट टमाटर भी नहीं मिल रहा है. किसानों का कहना है कि टमाटर का रौंपा लगाने से लेकर फल आने तक में करीब तीन महीने का वक्त लगता है. अब जो फसल आएगी, उसे आने में कम से कम डेढ़ से दो महीने और लगेंगे, तब तक टमाटर के लिए बाहर निर्भरता रहेगी. जाहिर है भाव ज्यादा ही रहेंगे.
टमाटर का उत्पादन कम होने का एक बड़ा कारण यह भी है कि इसी साल जनवरी में भाव गिरकर एक से डेढ़ रुपये किलो हो गया था. जिससे कुछ किसानों से टमाटर की खेती से दूरी बना ली. इधर, सबसे ज्यादा गृहणियों को परेशानी हो रही हैं. किचन का बजट बिगड़ गया है. थाली से टमाटर, अदरक और मिर्च का स्वाद गायब है. अब सेंडविच में भी टमाटर नहीं दिख रहा है. हालांकि टॉमेटो सॉस से लोग काम चला रहे हैं.