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EPF, PPF और NPS में क्या है अंतर? आइए जानते हैं तीनों के फायदे

भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित करने के लिए बचत बेहद जरूरी है. हर कोई किसी न किसी स्कीम में इन्वेस्टमेंट करके अपने लिए एक मोटा फंड इकठ्ठा करना चाहता है. सेविंग्स के मामले में सरकार की EPF, PPF और NPS योजनाएं बेहद लोकप्रिय हैं.

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ईपीएफ, पीपीएफ और एनपीएस में कौन बेहतर?
ईपीएफ, पीपीएफ और एनपीएस में कौन बेहतर?

हर नौकरीपेशा या बिजनेसमैन चाहता है कि वो अपनी कमाई में से कुछ हिस्से की बचत (Saving) करे. इस बचत के जरिए इकठ्ठा फंड उसके आने वाले दिनों या कहें रिटायरमेंट के बाद उसे फाइनेंशियली मजबूत बनाए रखे. इसके लिए लोग कई तरह की बचत योजनाओं (Saving Schemes) में इन्वेस्टमेंट करते हैं. इनमें ईपीएफ (EPF), पीपीएफ (PPF) और एनपीएस (NPS) खासी लोकप्रिय हैं. लेकिन, क्या आप जानते हैं इन तीनों में क्या अंतर है और इनके क्या-क्या बेनिफिट्स हैं? आइए जानते हैं...

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EPF Account
सबसे पहले बात कर लेते हैं कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) की, तो बता दें कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) का गठन 4 मार्च 1952 को हुआ था और ये श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत आता है. इस संगठन का उद्देश्य कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ प्रदान करना है. EPFO के तहत संस्था के कर्मचारियों को भविष्य निधि ,पेंशन और बीमा से जुड़े कई लाभ दिए जाते हैं.

प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले पेशेवरों के लिए अपनी सैलरी से बचत करने का ये सबसे बेहतर जरिया माना जाता है. 20 से ज्यादा वर्कफोर्स वाली कंपनी के कर्मचारियों की सैलरी से कुछ हिस्सा ईपीएफ अकाउंट में जमा कराया जाता है, जिसका रेग्युलेटर EPFO होता है. ईपीएफ के तहत बेसिक सैलरी और डीए का 12 फीसदी हिस्‍सा पीएफ फंड में जमा होता है और इ‍तना ही हिस्‍सा नियोक्‍ता की ओर से भी जमा किया जाता है. 

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EPF पर जमा राशि पर कंपाउंडिंग इंटरेस्‍ट का फायदा मिलता है. नियोक्ता के हिस्से में से 8.33 फीसदी कर्मचारी पेंशन योजना (Employee's Pension Scheme- EPS) में चला जाता है, जबकि शेष 3.67 फीसदी हिस्सा EPF में इन्वेस्ट रहता है. रिटायरमेंट के बाद पीएफ का पैसा कर्मचारियों को एकमुश्‍त और ईपीएस का पैसा पेंशन के तौर पर मिलता है. वर्तमान में ईपीएफ पर सरकार की ओर से 8.1 फीसदी ब्‍याज मिल रहा है. हालांकि, यह बीते चार दशक में सबसे कम ब्याज दर है, लेकिन इसके बावजूद भी ये वर्तमान में संचालित तमाम सेविंग्‍स स्‍कीम्‍स से ज्‍यादा है. इसके सदस्य हायर पेंशन ऑप्शन का चयन भी कर सकते हैं, इसके लिए सरकार की ओर से 3 मई 2023 तक का समय दिया गया है. 

PPF Account
दूसरे नंबर पर बचत की बेहतरीन स्कीम के तौर पर पब्लिक प्रोविडेंट फंड (Public Provident Fund) का नाम आता है. आम बोल-चाल में इसे हम PPF कहते हैं. यह देश की सबसे पॉपुलर स्मॉल सेविंग स्कीम (Small Saving Scheme) में शामिल है. आपके पैसे की सुरक्षा के साथ ही उसपर बेहतरीन ब्याज इस गारंटी वाली सरकारी स्कीम (Government Scheme) को लोकप्रिय बनाता है. इस सरकारी स्कीम में आप सालाना कम से कम 500 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक निवेश कर सकते हैं. इस राशि को आप एकमुश्त या फिर किश्तों में जमा कर सकते हैं. यहां एक बात ध्यान रखनी होगी कि एक फाइनेंशियल ईयर में  1.5 लाख रुपये से अधिक जमा की गई राशि पर कोई ब्याज नहीं मिलता है. 

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किसी भी बैंक या पोस्ट ऑफिस में फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposite) के मुकाबले पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) में ज्यादा ब्याज मिलता है. फिलहाल, सरकार इस स्कीम के तहत सालाना 7.1 फीसदी की दर से ब्याज मुहैया करा रही है. इसके अलावा इसमें निवेश पर चक्रवृद्धि ब्याज भी मिलता है, जिसका सालाना आधार पर आंकलन होता है. हर साल मार्च में ब्याज का भुगतान किया जाता है. हर तीन महीने में यानी तिमाही आधार पर ब्याज दरों की समीक्षा की जाती है. टैक्स में छूट के आधार पर देखें तो ये सानदार स्कीम है. आप इनकम टैक्स की धारा 80C के तहत पीपीएफ में जमा राशि पर टैक्स छूट का लाभ उठा सकते हैं. PPF में निवेश, उसपर मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी पूरा होने पर मिलने वाली राशि, तीनों पूरी तरह से टैक्स फ्री होती हैं. 

PPF में 15 साल के लिए निवेश करना होता है. अगर आप मैच्‍योरिटी के बाद भी इसे जारी रखना चाहते हैं, तो फिर ऐसी स्थिति में पीपीएफ अकाउंट को 5-5 साल के लिए एक्सटेंड कराने की भी सुविधा मिलती है. हालांकि, एक्‍सटेंशन के लिए मैच्‍योरिटी से एक साल पहले ही आवदेन देना होता है. इस फंड से खाता खोले जाने के 6 साल के बाद किसी भी इमरजेंसी में आप 50 फीसदी तक जमा राशि निकाल सकते हैं. इसके अलावा तीन वर्ष तक PPF खाते को चलाने के बाद आप इसपर लोन ले सकते हैं. लोन लेने वाले व्यक्ति को 9.1 फीसदी की दर से ब्याज चुकाना होता है. 

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पीपीएफ अकाउंट में निवेश करना काफी सुरक्षित है. PPF खाता आप पोस्टऑफिस समेत देश के लगभग सभी सरकारी और प्राइवेट बैंकों में खुलवा सकते हैं. इसके लिए भारतीय नागरिक होना जरूरी है. आप नाबालिग बच्चों के नाम से पीपीएफ खाता खुलवा सकते हैं, लेकिन इसके लिए एक अभिभावक होना अनिवार्य है. बच्चे के खाते से कमाई को अभिभावक की आय में जोड़ा जाता है. 

NPS Account
एनपीएस यानी नेशनल पेंशन स्कीम, ये सरकारी बचत योजना रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए सबसे बेहतरीन इन्वेस्टमेंट ऑप्शन बन चुका है. सभी चाहते हैं कि बुढ़ापे में उन्हें किसी पर आर्थिक रूप से निर्भर नहीं रहना पड़े. ऐसे में लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट के लिए ये सरकारी स्कीम सबसे लोकप्रिय योजनाओं में ऊपर है. इस स्कीम के तहत आप हर महीने 6000 रुपये निवेश कर 60 साल की उम्र के बाद 50,000 रुपये की पेंशन पा सकते हैं. यानी रोजाना महज 200 रुपये बचाकर आप भविष्य सुरक्षित कर सकते हैं. इसमें निवेश पर भी टैक्स छूट का लाभ मिलता है. 

NPS में निवेशक को 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये की छूट के साथ ही 80 सीसीडी के तहत अतिरिक्त 50,000 रुपये तक की Income Tax छूट भी मिलती है. एनपीएस में जमा पैसे निवेशक को दो तरह से मिलते हैं. पहला ये कि आप जमा रकम का सीमित हिस्सा एक ही बार में निकाल सकते हैं, जबकि दूसरा हिस्सा पेंशन के लिए जमा रहेगा. इस राशि से एन्यूटी (Annuity) खरीदी जाएगी. एन्युटी खरीदने के लिए जितनी अधिक रकम आप छोड़ेंगे रिटायर होने के बाद आपको उतनी अधिक पेंशन मिलेगी.

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NPS में दो तरह के अकाउंट ओपन होते हैं- एनपीएस टिअर-1 (NPS Tier-1) और एनपीएस टिअर-2 (NPS). टिअर-1 अकाउंट मुख्य तौर पर उन लोगों के लिए है, जिनका पीएफ जमा नहीं होता है और वह रिटायरमेंट के बाद फाइनेंशियल सिक्योरिटी (Financial Security) चाहते हैं.  इसमें आप न्यूनतम 500 रुपये जमा कर अकाउंट खुलवा सकते हैं. रिटायरमेंट के बाद आप एक बार में 60 फीसदी तक रकम निकाल सकते हैं. बाकी 40 फीसदी रकम से एन्यूटीज खरीदी जाती है. 

 

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