बेहद आशावादी होकर कई एक्सपर्ट्स ने उम्मीद जताई थी कि कोरोना वायरस की वैक्सीन इस साल के अंत तक आ जाएगी. वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कोशिश कर रहे थे कि किसी तरह 3 नवंबर को होने वाले चुनाव तक वैक्सीन तैयार हो जाए. लेकिन अब ऐसा होता नहीं दिख रहा है. क्योंकि अमेरिका में वैक्सीन को मंजूरी देने वाली संस्था ने कहा है कि वह नई और कड़ी शर्तें जोड़ने जा रहा है.
असल में जल्दी वैक्सीन तैयार करने के लिए दवा कंपनियां सरकार, नेता और जनता के दबाव का सामना कर रही हैं. ऐसे में ये डर भी जताया जा रहा था कि कहीं कंपनियां जल्दबाजी में वैक्सीन की सुरक्षा को लेकर कोई समझौता न कर ले. यह भी कहा जा रहा था कि अमेरिका का फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए ) कहीं सरकार के दबाव में वैक्सीन को समय से पहले मंजूरी न दे दे.
वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका का एफडीए कोरोना वैक्सीन को मंजूरी देने के लिए नए और कड़े नियम लागू करने जा रहा है. इसकी वजह से इमरजेंसी यूज के लिए भी वैक्सीन को मंजूरी देने में देरी हो सकती है. साथ ही एफडीए वैक्सीन की मंजूरी से जुड़ी नई शर्तों को सार्वजनिक रूप से जारी करेगा ताकि अमेरिकी लोगों का वैक्सीन पर भरोसा बढ़े. हालांकि, ट्रंप किसी तरह 3 नवंबर के चुनाव तक वैक्सीन को लॉन्च करने की कोशिश कर रहे हैं.
एक सूत्र ने बताया कि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा के इमरजेंसी यूज के लिए जिस स्टैंडर्ड का पालन किया गया था, उसमें बढ़ोतरी की जा रही है. अब वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों को वॉलंटियर्स को दूसरी खुराक देने के 2 महीने बाद तक फॉलो अप करना होगा. इसकी वजह से वैक्सीन को मंजूरी देने में वक्त लगेगा. बता दें कि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा को पहले इमजरेंसी यूज के लिए मंजूरी दी गई थी, लेकिन बाद में फैसला बदल दिया गया.
रिपोर्ट के मुताबिक, एफडीए की नई शर्तों की वजह से फाइजर और मॉडर्ना, दोनों ही कंपनियों की वैक्सीन तैयार होने में देरी हो सकती है. इन कंपनियों ने जुलाई के आखिर में ही फेज-3 ट्रायल के लिए कैंडिडेट को शामिल करना शुरू किया है. उन्हें कैंडिडेट को दूसरी डोज देने के बाद 2 महीने तक इंतजार करना होगा जिसके बाद वे ट्रायल का डेटा सबमिट कर सकेंगे.