बिहार के बेतिया में अस्पतालों की दुर्दशा एक बार फिर से सामने आई है और इस बार ये दुर्दशा किसी आम आदमी के लिए नहीं बल्कि इसी अस्पताल के एक डॉक्टर के लिए हुई है. जहां परिजन खुद इसी अस्पताल में ड्यूटी कर रहे एक बीमार डॉक्टर के इलाज के लिए भटकते रहे. (बेतिया से रामेंद्र गौतम की रिपोर्ट)
बीमार डॉक्टर की पत्नी अपने पति के इलाज व कोरोना जांच के लिए अस्पताल प्रशासन से गुहार लगाती रही हैं. वह पिछले सप्ताह यहीं पर ड्यूटी करते डॉक्टर कोरोना संक्रमित हुए थे.
ये पूरा मामला है बेतिया के नरकटियागंज के अनुमंडल अस्पताल की, जहां इसी अस्पताल के डॉक्टर राजीव कुमार पांडेय की गुरुवार को तबीयत खराब हो गई तो पिता और पत्नी डॉक्टर को लेकर अस्पताल पहुंचे लेकिन यहां की व्यवस्था को देखकर परिजनों के होश उड़ गए.
बीमार डॉक्टर को अस्पताल में भर्ती कराने और कोरोना जांच के लिए परिजन लगातार डॉक्टरों और कर्मियों से गिड़गिड़ाते रहे लेकिन कुछ नहीं हुआ. डॉक्टर राजीव इसी अस्पताल में लगातार और ओवर ड्यूटी करते हुए बीमार हुए थे. इसी अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी करते समय वो पिछली 4 तारीख को कोरोना संक्रमित हो गये थे. उसके बाद से डॉक्टर होम आइसोलेशन में थे.
गुरुवार को तबीयत खराब होने पर परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे थे. बाद में मीडियाकर्मियों के हस्तक्षेप से डॉक्टर का कोरोना टेस्ट हुआ और जांच रिपोर्ट नेगेटिव होने पर परिजन व्यवस्था को कोसते हुए डॉक्टर को घर लेते गए.
बीमार डॉक्टर की पत्नी अनामिका पांडेय ने बताया कि पति इसी हॉस्पिटल में पदस्थापित हैं और वह बीमार हैं. यहां कोई पूछने वाला तक नहीं है. प्रभारी डॉक्टर का मोबाइल बंद बता रहा है. हमारे बताने के बावजूद कि ये डॉक्टर हैं, तब भी कोई इनको भर्ती नहीं कर रहा. इनके कोरोना जांच के लिए भी कोई अस्पताल का कर्मी तैयार नहीं है. 4 तारीख को इसी अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में लगातार और ओवर ड्यूटी करने से कोरोना संक्रमित हुए थे. गुरुवार को जब इनकी तबीयत खराब हुई तो अस्पताल लेकर आये हैं, कोई पूछने वाला नहीं है.
बीमार डॉक्टर के परिजन तरुण चौबे ने बताया कि यहां एक डॉक्टर के साथ ऐसा हो रहा है तो आम लोगों के साथ कैसा हो रहा होगा. ये खुद यहां दिन-रात मरीजों की सेवा कर रहे थे. एक सप्ताह पहले यहीं पर कोरोना संक्रमित हुए थे, आज जब सांस लेने में दिक्कत हुई तो लेकर पहुंचे हैं, कोई भी यहां इनको देखने तक नहीं आ रहा है.