कोरोना वायरस ने पश्चिम के ताकतवर देशों की कई कमियां उजागर कर दी हैं और वे महामारी से बुरी तरह जूझ रहे हैं. वहीं, पश्चिम के ज्यादातर देशों को ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनका की वैक्सीन से उम्मीदें हैं, लेकिन हाल ही में इस वैक्सीन के ट्रायल को रोकने की नौबत आ गई (हालांकि, बाद में दोबारा शुरू करने की अनुमति मिल गई). दूसरी ओर, चीन न सिर्फ वैक्सीन तैयार करने में, बल्कि वैक्सीन कूटनीति में भी आगे बढ़ता दिख रहा है. कई रिपोर्ट में ये दावा किया गया है कि चीन वैक्सीन की रेस जीतने में कामयाब हो सकता है.
ब्रिटिश टेलिग्राफ में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, पहली बार अन्य देशों के साइंटिस्ट अब इस थ्योरी पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं कि पहली सफल वैक्सीन चीन की ही हो सकती है. कई देशों के राजनयिक इस चीज का आकलन कर रहे हैं कि चीन अगर सफल वैक्सीन तैयार कर लेता है तो इससे दुनिया की राजनीति कैसे बदल सकती है.
चीन तीन कारणों से वैक्सीन की बाजी जीत सकता है.
1. फेज 3 ट्रायल में सबसे अधिक चीनी वैक्सीन कैंडिडेट हैं. दुनिया में फिलहाल 9 कोरोना वैक्सीन फेज-3 ट्रायल में पहुंच चुकी हैं. इनमें से 4 चीन की ही हैं.
2. चीन वैक्सीन बनाने के लिए पुरानी और भरोसेमंद तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है.
3. चीन ने कई अन्य देशों से पहले अपनी वैक्सीन का फेज-3 ट्रायल शुरू कर दिया.
खासकर पश्चिम के देशों के लिए वैक्सीन तैयार कर रही AstraZeneca, BioNTech-Pfizer और Moderna जैसी कंपनियों के पास अत्याधुनिक तकनीक हैं, वहीं चीन 'ओल्ड स्कूल' वैक्सीन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहा है. एक्सपर्ट विचार कर रहे हैं कि क्या वैक्सीन तैयार करने की पुरानी तकनीक ही कारगर तो साबित नहीं होगी?
बायोमेडिकल थिंक टैंक Policy Cures Research के टेक्निकल हेड डॉ. विपुल चौधरी कहते हैं कि चीन की 4 में से 3 वैक्सीन कैंडिडेट इनएक्टिवेटेड Sars-CoV-2 वायरस का इस्तेमाल कर रही हैं जो सबसे बेहतर साबित हो सकती है. चौधरी कहते हैं कि चीन ने किया ये है कि एंटीजन गुणों को छोड़कर वायरस को डिसेबल कर दिया है. यह वैक्सीन तैयार करने का परंपरागत तरीका है.
अमेरिका के एक अस्पताल में वैक्सीन एजुकेशन सेंटर के डायरेक्टर डॉ. पौल ऑफिट कहते हैं, 'मैं इनएक्टिवेटेड वैक्सीन कैंडिडेट को लेकर अधिक सहज महसूस करता हूं, क्योंकि हमारे पास पहले से ऐसी वैक्सीन को लेकर अनुभव है. दूसरी बात ये है कि ऐसी वैक्सीन के जरिए हम सभी 4 कोरोना वायरस प्रोटीन के खिलाफ इम्यून रेस्पॉन्स पैदा करते हैं, न कि सिर्फ स्पाइक प्रोटीन.'
वहीं, चीनी कंपनी China National Biotec Group (CNBG) ने कहा है कि उसकी कोरोना वैक्सीन के फेज 3 ट्रायल के शुरुआती रिजल्ट काफी अच्छे हैं. कंपनी का कहना है कि लाखों लोगों को वैक्सीन की खुराक दी जा चुकी है, इनमें से एक भी व्यक्ति में कोई रिएक्शन देखने को नहीं मिला और न ही कोई कोरोना से संक्रमित हुआ. कंपनी का कहना है कि उसकी दो वैक्सीन 3 साल तक कोरोना से सुरक्षा प्रदान कर सकती हैं.