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कोरोना

चीन में कोरोना बेहद कम कैसे? वुहान में 5 महीने तक फंसे युवक ने बताई ये वजह

China
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दुनियाभर में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन चीन के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में कोरोना पर काबू पा लिया गया है. आखिर चीन ने ऐसा क्या अलग किया? महामारी के दौरान वुहान में रहने वाले एक शख्स ने इसका जवाब दिया है. 

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लंदन में रहने वाले एक चीनी नागरिक ने वुहान में कोरोना महामारी को लेकर की गई कार्रवाई की असल कहानी शेयर की है. वुहान में जब कोरोना महामारी चरम पर थी तो युवक करीब 5 महीने तक वहां फंसा रह गया था. 
 

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अपने परिवार से मिलने वुहान गए 31 साल के 'शी लू' महामारी की वजह से 141 दिन तक वहीं फंसे रहे थे. उनका कहना है कि चीन में कोरोना महामारी को सबसे अच्छे तरीके से इसलिए काबू कर लिया गया क्योंकि वहां के लोग आज्ञाकारी होते हैं और नियम मानते हैं. पाबंदियों और आजादी को लेकर हो रही बहस पर उन्होंने कहा कि अगर कोई बचेगा ही नहीं तो फिर कोई मानवाधिकार नहीं होगा. 

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कोरोना फैलने के बाद 76 दिन तक वुहान में काफी सख्त पाबंदियां थीं. शी लू का कहना है कि चीनी नागरिक और अन्य लोगों में सांस्कृतिक अंतर है और वहां के लोग सरकार के नियमों का काफी पालन करते हैं. 

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शी लू ने कहा कि अगर चीन में कोई भी नियम लागू है तो हम उसे मानेंगे. उन्होंने कहा कि मास्क पहनने को लेकर भी लोगों ने नियमों का कड़ाई से पालन किया. चीन में अक्सर लोग पड़ोसियों के नियम तोड़ने पर अधिकारियों जानकारी दे देते हैं और लू ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान उन्होंने खुद भी ऐसा किया.  

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शी लू ने कहा कि अगर एंटी मास्क और एंटी वैक्सीन अभियान चलता रहा तो कोरोना की तीसरी लहर भी आएगी और फिर से लॉकडाउन करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि लोगों ने नियम नहीं माने तो कोरोना इतने पर भी नहीं रुकेगा और फिर चौथी लहर भी अगले मौसम में आएगी. 
 

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जब जनवरी में शी लू चीन गए थे तो उनकी पत्नी लंदन में ही रह रही थी. 141 दिन तक फंसे रहने के बाद वे जुलाई में ही लंदन लौट पाए थे. लंदन में वे बीते 7 साल से रह रहे हैं. बता दें कि वुहान में लगाए गए लॉकडाउन को दुनिया का सबसे कड़ा लॉकडाउन भी बताया गया था.

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