कोरोना महामारी के शुरुआती दौर में कई लोगों ने यह समझा था कि यह बीमारी कुछ हफ्ते में ठीक हो जाती है. लेकिन कोरोना वायरस से जुड़े नए डेटा में सामने आया है कि हजारों मरीज कई महीने तक कोरोना के लक्षणों से जूझते हैं. वहीं इसके असर के तौर पर मरीजों को मानसिक तकलीफों का भी सामना करना पड़ रहा है.
कोरोना वायरस से मध्यम या गंभीर बीमार लोग जिनमें कोरोना के लक्षण कई महीने तक रहते हैं उन्हें Long-haulers कहा जाता है. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, काफी संख्या में कोरोना वायरस Long-haulers ने बताया है कि कोरोना से उनके मानसिक स्वास्थ्य को चोट पहुंचा है. एक छोटे आकार के सर्वे में पता चला कि दर्जनों लोग एंग्जाइटी और डिप्रेशन के शिकार हो गए हैं.
यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड स्कूल ऑफ मेडिसिन के मनोचिकित्सक टी पोस्टोलाचे का अनुमान है कि आधे या एक तिहाई कोरोना मरीज किसी न किसी तरह के मानसिक स्वास्थ्य से जूझ रहे हैं. असामान्य नींद, डिप्रेशन, थकान और एंग्जाइटी इनमें प्रमुख लक्षण हैं. वहीं, ब्रिटेन में अब तक कुल 3 लाख 50 हजार कोरोना मरीज सामने आए हैं, लेकिन एक आकलन के मुताबिक, करीब 60 हजार लोग तीन महीने से अधिक वक्त तक कोरोना के लक्षणों से जूझ रहे थे.
इंडियाना यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के रिसर्चर ने हाल ही में 1500 Long-haulers पर सर्वे किया. उन्होंने पाया कि काफी संख्या में ऐसे लोग हैं जो मनोवैज्ञानिक लक्षणों से जूझ रहे हैं. काफी संख्या में लोग एंग्जाइटी से जूझते मिले. लोगों ने बताया कि उन्हें ध्यान कायम करने में दिक्कत आ रही है. सर्वे के दौरान, 400 से अधिक लोग दुखी थे, जबकि 700 एंग्जाइटी से परेशान थे.
लंबे वक्त तक कोरोना से पीड़ित रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं लेने में भी मुश्किल आ रही है जिसकी वजह से उनकी मानसिक स्थिति और बिगड़ रही है. इसकी वजह से लोगों की नौकरी, सोशल साइफ और सामान्य दिनचर्या पर भी असर पड़ रहा है. कोरोना वायरस की शिकार होने वाली एक नर्स ने बताया कि कोई भी उनके पास नहीं आना चाहता, इसकी वजह से वह खुद को डिप्रेशन में महसूस करती हैं.