कोरोना के कहर से पूरी दुनिया परेशान है. इस महामारी से संक्रमित और मरने वालों के आंकड़े लगातार बढ़ते जा रहे हैं. चीन से फैले इस वायरस की मुख्य वजह अब तक साफ नहीं हो पाई है. वहीं, कोरोना वायरस पर संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण प्रमुख, इंगर एंडरसन का बयान सुर्खियों में है.
इंगर एंडरसन का कहना है कि प्रकृति हमें कोरोनावायरस महामारी और जलवायु संकट के जरिए एक संदेश भेज रही है. एंडरसन ने कहा कि एक के बाद एक कई हानिकारक चीजें करके हम लोग प्रकृति पर बहुत सारे दबाव डाल रहे थे.
एंडरसन ने कहा, 'हमें पहले कई बार चेतावनी मिली थी कि अगर हम इस पृथ्वी और प्रकृति की देखभाल करने में असफल रहे तो इसका मतलब यही होगा कि हम अपनी देखभाल नहीं कर पाए.'
कई प्रमुख वैज्ञानिकों का भी कहना है कि Covid-19 का प्रकोप एक स्पष्ट चेतावनी है जो यह बताता है कि वन्यजीवों में घातक बीमारियां मौजूद हैं और मनुष्य आग से खेलने का काम कर रहा है. वैज्ञानिकों का कहना है कि अपनी आदतों के चलते ही मानव जाति हमेशा इस तरह की बीमारियों का शिकार बनती है.
इन तरह के वायरस से आगे बचा जा सके इसके लिए विशेषज्ञों ने लोगों को प्रकृति से छेड़छाड़ ना करने को कहा है. उन्होंने अधिकारियों से जीवित पशु बाजार और अवैध पशु व्यापार को भी बंद करने को कहा है, जो बीमारियों का मुख्य केंद्र माना जाता है.
एंडरसन ने ब्रिटिश न्यूजपेपर द गार्जियन को बताया, 'इससे पहले कभी भी जंगली और घरेलू जानवरों से होते हुए कोई संक्रमण इस हद तक इंसानों तक नहीं पहुंचा था हालांकि फिर भी 75 फीसदी संक्रामक रोग जंगली जानवरों से ही होते हैं. कटते पेड़ और घटते जंगलों ने हमें जानवरों के और करीब ला दिया है.'
उन्होंने कहा, 'बदलते पर्यावरण, ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी भीषण आग, जरूरत से ज्यादा बढ़ता तापमान और केन्या में कई सालों से हो रहे टिड्डे दलों के हमले के जरिए प्रकृति हमें संदेश भेज रही है. जाने-अनजाने हम कहीं न कहीं प्रकृति से जुड़े हुए हैं और हमें उसके साथ अपना रिश्ता और मजबूत करने की जरूरत है.'
पिछले कुछ सालों में इबोला, बर्ड फ्लू, रिफ्ट वैली बुखार, वेस्ट नील वायरस, जीका वायरस, सार्स और मेर्स जैसे मानव संक्रामक रोगों का प्रकोप बढ़ा है.
जूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ लंदन के प्रोफेसर एंड्रयू कनिंघम ने कहा, 'Covid-19 जैसे वायरस के फैलने का अनुमान पहले ही लगाया जा चुका था.
सार्स प्रकोप पर की गई एक स्टडी के मुताबिक चमगादड़ों में पाया जाने वाला Sars-CoV आगे चलकर बड़ा खतरा बन सकता है क्योंकि चीन में इस तरह के जानवरों को खाने का चलन है.'
हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के डायरेक्टर हारून बर्नस्टीन ने कहा, 'ये लोगों की गलतफहमी है कि स्वास्थ्य का पर्यावरण नीति से कुछ लेना देना नहीं है जबकि हमारा स्वास्थ्य पूरी तरह से जलवायु, प्रकृति और अन्य जीवों पर निर्भर करता है.'
ऑस्ट्रेलिया के अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण संगठन के पूर्व सचिव जॉन स्कैनलोन का कहना है कि, अरबों डॉलर के अवैध वन्यजीव व्यापार भी इस समस्या का प्रमुख जड़ हैं.
स्कैनलोन ने कहा, 'जानवरों का आयात करने वाले देशों को इनके खिलाफ कड़े कानून बनाने की जरूरत है. अगर हम इन अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव अपराधियों के खिलाफ कदम उठाते हैं तो इससे हमारे स्थानीय व्यापारियों को भी लाभ होगा.
Covid-19 प्रकृति और जीवों के प्रति मनुष्यों को अपना नजरिया बदलने का एक मौका देगा. हालांकि प्रोफेसर एंड्रयू कनिंघम इस बात से सहमत नहीं हैं.
कनिंघम का कहना है, 'अगर ऐसा होना होता तो चीजें सार्स वायरस फैलने के बाद ही बदल गई होतीं क्योंकि वो पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी वेक-अप कॉल थी.'