बुधवार को भारत में कोरोना वायरस से दोबारा संक्रमित होने का मामला सामने आया. अहमदाबाद की रहने वाली महिला करीब 4 महीने बाद कोरोना से दोबारा संक्रमित पाई गई है. वहीं, अन्य देशों से भी ऐसी घटना सामने आ रही है. यूरोपीय देश नीदरलैंड, बेल्जियम और हॉन्ग कॉन्ग से भी व्यक्ति के दोबारा कोरोना संक्रमित होने के मामले सामने आए हैं.
कोरोना वायरस से दोबारा संक्रमित होने के मामलों ने महामारी पर काबू पाने के लिए काम कर रहे एक्सपर्ट की चिंता बढ़ा दी है. कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले दिनों में दोबारा संक्रमण के और अधिक मामले सामने आ सकते हैं.
स्काई न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, नीदरलैंड में एक वरिष्ठ व्यक्ति के दोबारा संक्रमित होने का पता चला है. ऐसा समझा जा रहा है कि इस व्यक्ति का इम्यून सिस्टम कमजोर था. वायरोलॉजिस्ट Marc Van Ranst का कहना है कि यह अच्छी खबर नहीं है. उन्होंने कहा कि यह भी हो सकता है कि 6 या 7 महीने बाद अधिक लोग दोबारा संक्रमित होने लगे.
वहीं, बेल्जियम से खबर आई है कि मार्च में एक व्यक्ति कोरोना संक्रमित हुआ था. दोबारा फिर जून में भी उसमें वायरस के हल्के लक्षण दिखे. इससे पहले रिसर्चर्स ने आधिकारिक तौर से हॉन्ग कॉन्ग के एक व्यक्ति के दोबारा कोरोना से संक्रमित होने की पुष्टि की थी.
हॉन्ग कॉन्ग के रिसर्चर्स ने कहा था कि कोरोना से ठीक हो चुका व्यक्ति यूरोप गया था, जिसके बाद दोबारा संक्रमित पाया गया है. रिसर्चर्स का कहना है कि व्यक्ति दो बार, कोरोना वायरस के दो अलग-अलग स्ट्रेन से संक्रमित हुआ. साढ़े 4 महीने के अंतराल पर वह दोबारा पॉजिटिव हुआ.
नीदरलैंड सरकार की सलाहकार और वायरोलॉजिस्ट मैरिओन कूपमैन्स ने कहा कि किसी व्यक्ति के दोबारा संक्रमित होने की खबर से वह नर्वस नहीं हो रही हैं. उन्होंने कहा कि हमें यह देखना होगा कि क्या ऐसा आमतौर पर होता है?
असल में कोरोना से दोबारा संक्रमित होने वाले व्यक्ति की वास्तविक जांच मुश्किल होती है. इसके लिए वैज्ञानिकों को वायरस की Genetic Testing करने की जरूरत होती है.