कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हॉस्पिटल में इलाज किया जा रहा है. शुरुआत में उन्हें कोरोना में प्रभावी Remdesivir और REGN-COV2 दवा दी गई थीं, लेकिन अब खबर आई है कि डॉक्टरों ने उन्हें डेक्सामेथासोन दवा भी दी है.
डेक्सामेथासोन दवा काफी सस्ती होती है और इसे कोरोना से जान बचाने वाली दवा भी कहा जाता है. ब्रिटेन में हुए ट्रायल में पता चला था कि डेक्सामेथासोन दवा कोरोना के कुछ फीसदी मरीजों की जान बचाने में कामयाब रहती है.
भारत में डेक्सामेथासोन दवा बड़े पैमाने पर तैयार की जाती है. भारत दुनिया में डेक्सामेथासोन का सबसे बड़ा निर्यातक देश भी है. अमेरिका हर साल करीब 36 करोड़ रुपये की डेक्सामेथासोन दवा भारत से खरीदता है. इसलिए ऐसा संभव है कि ट्रंप को भारत में तैयार डेक्सामेथासोन दवा ही दी गई हो.
डेक्सामेथासोन एक स्टेरॉयड है. अन्य बीमारियों में पहले भी डॉक्टर इस दवा का इस्तेमाल करते रहे हैं. यही दवा ट्रंप को वॉल्टर रीड नेशनल मिलिट्री मेडिकल सेंटर के डॉक्टरों ने दी है.
ट्रायल में पता चला था कि डेक्सामेथासोन दवा की वजह से ऑक्सीजन की जरूरत वाले मरीजों की मौत का खतरा 20 से 25 फीसदी तक घट जाता है. वेंटिलेटर पर रहने वाले मरीजों को जब ये दवा दी गई तो देखा गया कि उनकी मौत का खतरा 28 से 40 फीसदी तक कम हो गया.
गठिया, दमा, सूजन, एलर्जी, सेप्सिस सहित अन्य बीमारियों में डेक्सामेथासोन का इस्तेमाल किया जाता रहा है. डेक्सामेथासोन टैबलेट और इंजेक्शन, दोनों ही रूप में बाजार में मिलती है. हालांकि, कोरोना बीमारी में सिर्फ उन्हीं मरीजों पर इस दवा का असर देखा गया जो हॉस्पिटल में भर्ती होते हैं यानी अधिक बीमार हो जाते हैं. सामन्य लक्षण वाले कोरोना मरीजों को इस दवा से लाभ नहीं हुआ.