एक वैश्विक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि जिस देश में मोटे लोग ज्यादा हैं, वहां पर कोरोना संबंधी मौतों की संख्या भी ज्यादा है. इस ग्लोबल रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस देश में 50 फीसदी वयस्क मोटापे के शिकार हैं, वहां पर अन्य देशों की तुलना में 10 फीसदी ज्यादा कोरोना मौतें हुई हैं. ये खुलासा किया है जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के ग्लोबल हेल्थ ऑब्जरवेटरी ने. (फोटोःगेटी)
इस ग्लोबल रिपोर्ट में बताया गया है कि मोटापे और कोरोना मौतों के बीच बेहद हैरान करने वाला संबंध है. जिन देशों में लोग मोटापे के शिकार हैं, वहां कुल मिलाकर 25 लाख लोगों की मौत कोरोना वायरस की वजह से हुई है. इनमें से 22 लाख लोग मोटापे के शिकार थे. यानी 90 फीसदी लोग मोटापे के उच्च स्तर पर थे. (फोटोःगेटी)
जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के ग्लोबल हेल्थ ऑब्जरवेटरी ने कई देशों में हुए कोरोना मौतों के आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद ये रिपोर्ट बनाई है. हैरानी की बात ये है कि स्टडी करने वाले साइंटिस्टस ने कहा है कि आमतौर पर ऐसा कोई देश नहीं मिला जहां कोई मोटापे का शिकार न हो. न ही कोई ऐसा देश मिला जहां मोटे लोग कोरोना से न मारे गए हों. (फोटोःगेटी)
वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन के सलाहकार और सिडनी यूनिवर्सिटी के विजिटिंग प्रोफेसर टिम लॉब्सटीन कहते हैं कि आप जापान और दक्षिण कोरिया को देखिए, वहां पर कोरोना की वजह से मौतों की दर काफी कम है. क्योंकि वहां पर मोटे लोगों की संख्या कम है. टिम लॉब्सटीन इस रिपोर्ट को तैयार करने वाली टीम में शामिल थे. (फोटोःगेटी)
टिम लॉब्सटीन कहते हैं कि जापान और दक्षिण कोरिया की सरकार ने और लोगों ने मिलकर सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर कई तरह के उपाय किए हैं. इसमें मोटापे को नियंत्रित करने के कई प्रयास शामिल हैं. यही वजह है कि कोरोना महामारी के दौरान इन दोनों देशों में कोरोना की वजह से मोटे लोगों की मौत कम हुई है. (फोटोःगेटी)
The majority of global COVID-19 deaths have been in countries where many people are obese, a worldwide study found https://t.co/Ca2C1KJKpH pic.twitter.com/2r4qW4wLmd
— Reuters (@Reuters) March 4, 2021
वहीं, दूसरी तरफ अमेरिका और ब्रिटेन में कोरोना की वजह से मोटे लोगों की मौत की दर बहुत ज्यादा है. कोरोनावायरस मृत्यु दर के मामले में यूनाइटेड किंगडम दुनिया में तीसरे स्थान पर है. जबकि मोटापे के मामले में चौथे स्थान पर. यहां पर प्रति एक लाख लोगों में से 184 लोगों की मौत कोरोना से हो रही है, इसमें से 63.7 फीसदी लोग मोटे हैं. (फोटोःगेटी)
अमेरिका में प्रति एक लाख लोगों में से 152.49 लोग कोरोना की वजह से मारे जा रहे हैं, इनमें से 67.9 फीसदी लोग मोटे हैं. लिवरपूल यूनिवर्सिटी में मेडिसिन के प्रोफेसर जॉन वाइल्डिंग ने कहा कि मोटापे को कोरोना के सबसे बड़े खतरे की सूची में शामिल करना चाहिए. इसके हिसाब से वैक्सीनेशन की योजना बनानी चाहिए. (फोटोःगेटी)
जॉन वाइल्डिंग कहते हैं कि पूरी दुनिया को मोटापे पर ध्यान देना चाहिए. यह कोरोना सहित कई तरह की बीमारियों का जनक है. क्योंकि जिस तरह लोग डायबिटीज और दिल संबंधी बीमारियों पर ध्यान दे रहे हैं, उसी तरह हम सबको मोटापे की समस्या पर ध्यान देना बहुत जरूरी है. ताकि वैक्सीनेशन के प्लान में बदलाव लाया जाए. (फोटोःगेटी)
प्रोसीडिंग्स ऑफ नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक जिनके शरीर का बॉडी मास इंडेक्स (Body Mass Index - BMI) ज्यादा होता है, वो सुपरस्प्रेडर (Superspreader) की कैटेगरी में सबसे ऊपर आते हैं. क्योंकि ये लोग संतुलित BMI वाले शख्स की तुलना में ज्यादा बायो-एयरोसोल हवा में निकालते हैं. (फोटोःगेटी)
अगर कोई बुजुर्ग है और उसका बॉडी मास इंडेक्स (Body Mass Index - BMI) ज्यादा है तो वह भी सुपरस्प्रेडर की कैटेगरी में आता है. क्योंकि इस उम्र में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है. ऐसे में जब वो छींकते या खांसते हैं तो ज्यादा रेस्पिरेटरी पार्टिकल्स बाहर निकालते हैं. इन्हीं पार्टिकल्स के साथ कोरोना वायरस हवा में मिल जाता है. जिसकी वजह से ज्यादा लोगों को संक्रमित होने का खतरा रहता है. (फोटोःगेटी)